- राजनैतिक बयानबाजी से मचे घमासान से कांग्रेसी अभी भी चुप
- कांग्रेस नेता हरीश रावत ने आयोजित की थी दून में फल पार्टी
- कांग्रेस के बडे़ नेताओं के नहीं पहुंचने से आपसी ‘खटास’ दिखी
देहरादून। कांग्रेस नेताओं के बीच बयानबाजी से मचा घमासान जारी है। कांग्रेसियों के लिए पूर्व सीएम हरीश रावत द्वारा आयोजित ‘सियासी स्वाद’ पार्टी में कांग्रेस के बडे़े नेताओं ने दूरी बनाए रखी, जबकि राजनैतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस पार्टी का आयोजन कांग्रेस में मचे घमासान को कम करना था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। कांग्रेस के बडे़ नेताओं के पार्टी में नहीं पहुंचने से आपसी ‘खटास’ साफ देखी गई।
बता दें कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व सीएम हरीश रावत ने फल पार्टी का आयोजन किया था। इसका मकसद सभी कांग्रेस नेताओं को एकजुट कर चुनाव के लिए एकता का संदेश देना था, लेकिन पार्टी में समर्थक और कार्यकर्ता तो भारी संख्या में पहुंचे मगर पार्टी के बडे़ नेताओं की नाराजगी पार्टी में नहीं आने से साफ दिखी।
ज्ञात हो कि पूर्व सीएम हरीश रावत पार्टी से नाराज होकर राजनैतिक अवकाश पर चले गए थे। इसके बाद पार्टी में बयानबाजी का दौर शुरू हुआ और यह बडे़ घमासान के रूप में सामने आयी। पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के सूबे में बैठकों के माध्यम से पार्टी में एकता का संदेश दिया गया, लेकिन यह जमीन पर कही नहीं दिखा। हरदा की फल पार्टी से यह साबित हो गया कि कांग्रेस में अभी भी अंदर खाने खटपट चल रही है और यह आने वाले विधानसभा चुनाव के लिए बडे़ खतरे का संकेत है।
राजनैतिक विशेषज्ञों की माने तो हरदा के राजनैतिक अवकाश के बाद कांग्रेस को एकजुट करने के लिए हरदा की फल पार्टी राजधानी में आयोजित की गई। लेकिन इस पार्टी में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह, चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरक सिंह रावत सहित कई बडे़ नेता उपस्थित नहीं थे। इससे साफ संकेत जाता है कि कांग्रेस पार्टी में सब कुछ ठीक-ठाक नहीं है और यह पार्टी के लिए अच्छे संकेत नहीं है।
दूसरी ओर राजनैतिक विशेषज्ञों की मानें तो राजनीतिक अवकाश के बाद आयोजित हरदा की फल पार्टी से एक बड़ा संदेश जा रहा है कि अब हरीश रावत फिर से राजनीति में सक्रिय हो गए हैं। पार्टी का आयोजन कर स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के साथ ही आम जनता से जुड़ने की कोशिशें कर चुके हैं। एक बार फिर अपनी राजनीतिक सक्रियता का संदेश तो दिया गया, लेकिन पार्टी में कांग्रेस के बडे़ नेताओं की अनुपस्थिति से यह भी संदेश गया है कि घमासान अभी कम नहीं हुआ है।




