आपदा में भी अवसर तलाश लेने में माहिर मानी जाने वाली भाजपा और उसके नेताओं ने शायद इस बात पर कभी कल्पना भी नहीं की होगी कि उनकी यह रणनीति संसद में उन्हें ऐसे गंभीर संकट में भी ला सकती है कि वह अपनी पहली चाल में ही हार जाए। नये अभिनंदन बिल (महिला आरक्षण) की आड़ में सरकार जिस तरह से परिसीमन बिल को भी ससद से पास कराने की फिराक में थी। उसका भंडा या उसके पीछे सरकार की क्या मंशा थी चर्चा शुरू होने से पहले ही फूट गया। महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण बिल के साथ जिन दो अन्य बिलों को भी कल संसद में पेश किया गया उसे पर चर्चा के लिए कराए गए मत विभाजन से सरकार के पक्ष में 251 मत पड़े जबकि विपक्ष ने एकता दिखाई और उसके पक्ष में 185 मत पड़े। जिसमें सरकार दो तिहाई के आंकड़े से पांच मत पीछे रह गई। अब चर्चा के बाद इन बिलों पर कल अंतिम फैसला मतदान से होना है। लेकिन इस शुरुआती झटके से भाजपा की सरकार और नेता इतने असहज हो चुके हैं कि उन्हें अपनी हार का सुनिश्चित अंदाजा लग चुका है। संसद में आज प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्ष को यह कहकर धमकाया कि अगर उन्होंने इस बिल पर यानी नारी वंदन बिल पर विरोध का रोडा अटकाया तो उन्हें तैयार रहना चाहिए देश की आधी आबादी यानी की महिलाएं 20 29 के चुनाव में उनका क्या हाल करेगी? हास्यापद बात यह है कि कांग्रेस सहित कोई विपक्षी दल इस इस नारी अभिनंदन बिल का विरोध नहीं कर रहा है ना ही इससे पहले कांग्रेस ने इसका विरोध किया है। राहुल गांधी ने इस बिल के पेश होने से पहले ही एक वीडियो जारी कर यह साफ कर दिया था कि इस बिल के साथ परिसीमन बिल को क्यों जोड़ा जा रहा है उनका कहना है कि सरकार परिसीमन बिल का आधार 2011 की जनगणना को क्यों बना रही है जबकि 2026 में जातिगत जनगणना कराई जा रही है उनका आरोप है कि वह महिलाओं तथा एससी एसटी की महिलाओं के साथ धोखा करना चाहती है जो हम नहीं होने देंगे। विपक्ष का कहना है कि सरकार 2026 की जनगणना के आधार पर महिलाओं को आरक्षण दे। 2011 की जनगणना में यह स्थिति स्पष्ट नहीं है कि किस राज्य में किस वर्ग की कितनी महिलाएं हैं देश में जब जातिगत जनगणना हो रही है तो फिर आरक्षण उसी हिसाब से हो। सरकार द्वारा परिसीमन बिल लाकर लोकसभा की सीटों को 543 से 850 किए जाने की कोशिश है तो फिर यह काम नए परिसीमन के अनुसार ही किया जाना चाहिए राहुल गांधी का कहना है कि महिला आरक्षण के भीतर भी आरक्षण की व्यवस्था कर सरकार महिलाओं का हक मारने की कोशिश कर रही है। आपदा में अवसर की जहां तक बात है उसके मद्देनजर खास बात यह है कि जहां एक तरफ लोग ईरान इजरायल के कारण समस्याओं से जूझ रहे हैं वहीं दूसरी ओर दो बड़े राज्यों में चुनाव की प्रक्रिया भी अंतिम दौर में होने के कारण सभी दलों के नेता व्यस्त हैं। सरकार की मनशक्ति थी कि नारी अभिनंदन बिल की आड़ में सरकार परिसीमन बिल को भी आसानी से पास करा लेगी तथा 2029 में भी अपनी जीत का भी पुख्ता तौर पर इंतजाम कर सकेगी लेकिन उचित समय तलाशने के बावजूद भी विपक्ष को सरकार की मंशा और नीयत का पता चल गया। सरकार के पास भले ही इस समय 392 सांसदों का समर्थन है लेकिन दो तिहाई बहुमत के लिए उसे 60 विपक्षी सांसदों का समर्थन भी चाहिए जो वर्तमान हालात में मुश्किल ही नहीं नामुमकिन दिख रहा है।




