July 4, 2026देहरादून। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से.नि.) एवं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज आईडीपीएल ग्राउंड, ऋषिकेश में आयोजित सेवा, सुशासन एवं समर्पणः जन—जन की सरकार, जन—जन के द्वार’ सेवा पखवाड़ा कार्यक्रम में प्रतिभाग करते हुए प्रदेशवासियों को संबोधित किया।इस अवसर पर राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री ने देहरादून जनपद की 219 करोड़ रूपये से अधिक लागत की 51 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से.नि.) ने कहा कि यह अभियान लोकसेवा, सुशासन और जनकल्याण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का सशक्त प्रतीक है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की वास्तविक सफलता तभी है, जब शासन की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम छोर पर खड़े प्रत्येक नागरिक तक सम्मान, संवेदनशीलता, पारदर्शिता और समयबद्धता के साथ पहुँचे। राज्यपाल ने इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को मुख्यमंत्री के रूप में पांच वर्ष से अधिक समय तक दायित्व निभाने की उपलब्धि पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं।राज्यपाल ने कहा कि समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने वाला उत्तराखण्ड देश का पहला राज्य बना, जिसने समानता, न्याय और सामाजिक समरसता की भावना को सुदृढ़ किया है। उन्होंने कहा कि युवाओं के हितों की रक्षा के लिए सशक्त नकल विरोधी कानून, जबरन धर्मांतरण और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने वालों के विरुद्ध कठोर कानूनी प्रावधान तथा प्रभावी भू—कानून जैसे निर्णय जनहित और सुशासन के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। उन्होंने महिलाओं को सरकारी सेवाओं में 30 प्रतिशत क्ष्ौतिज आरक्षण, स्वयं सहायता समूहों के सशक्तीकरण तथा ट्टलखपति दीदी’ जैसी योजनाओं को महिला सशक्तीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। राज्यपाल ने कहा कि केदारनाथ एवं बदरीनाथ धाम के पुनर्विकास कार्य, पर्यटन और होमस्टे योजना के विस्तार, ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट, जी—20 बैठकों, राष्ट्रीय खेलों तथा आधारभूत संरचना परियोजनाओं ने उत्तराखण्ड को विकास और निवेश के नए केंद्र के रूप में स्थापित किया है। उन्होंने युवाओं से स्टार्टअप और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसे नवाचार आधारित क्षेत्रों में आगे बढ़ने का आह्वान किया।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आज से पांच वर्ष पूर्व उन्हें देवभूमि उत्तराखण्ड की सेवा का अवसर प्राप्त हुआ था और यह यात्रा जनसेवा, सुशासन एवं समर्पण की भावना के साथ निरंतर आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य वर्ष 2035 तक उत्तराखण्ड को विकसित एवं श्रेष्ठ राज्य बनाना है। इसी उद्देश्य से प्रदेश में आधारभूत संरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क, कृषि, पर्यटन, उघोग, निवेश, स्वरोजगार एवं सीमांत क्षेत्रों के विकास पर विशेष बल दिया जा रहा है।
July 4, 2026भाजपा और कांग्रेस में शह-मात का खेल अभी से हुआ शुरू तीसरे विकल्प की तलाश में छटपटाती देवभूमि की राजनीति दिल्ली दूर, गांवों व बूथों से तय होगा उत्तराखंड का महासमर देहरादून। प्रदेश की राजनीति एक नए मोड़ पर खड़ी है। सत्ता की राह दिल्ली से नहीं, बल्कि गांवों, बूथों और कार्यकर्ताओं के मन से होकर गुजरती है। 2027 की चुनावी शतरंज में मोहरे सजने शुरू हो गए हैं, लेकिन बाजी कौन जीतेगा, इसका फैसला आने वाले महीनों में कार्यकर्ताओं के मूड और जनता के मन से तय होगा। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव-2027 अभी समय है, लेकिन प्रदेश की राजनीति पूरी तरह चुनावी मोड में आ चुकी है। सत्तारूढ़ भाजपा तीसरी बार लगातार सत्ता में लौटने का इतिहास रचने की तैयारी में है, तो कांग्रेस एक बार फिर सत्ता विरोधी माहौल को भुनाने की रणनीति बना रही है। वहीं, क्षेत्रीय दल और नए राजनीतिक विकल्प भी अपने लिए जमीन तलाश रहे हैं। इन सबके बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रदेश का राजनीतिक समीकरण किस करवट बैठेगा और कार्यकर्ताओं का मूड क्या कह रहा है?प्रदेश में भाजपा की सबसे बड़ी ताकत उसका मजबूत संगठन और बूथ स्तर तक फैला नेटवर्क है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में सरकार विकास, समान नागरिक संहिता, निवेश और बुनियादी ढांचे के मुद्दों को चुनावी नैरेटिव बनाने की तैयारी में है। लेकिन पार्टी के सामने चुनौतियां भी कम नहीं हैं। कई विधायकों की सार्वजनिक नाराजगी, नौकरशाही के बढ़ते प्रभाव को लेकर असंतोष और टिकट कटने की आशंकाओं ने संगठन के भीतर बेचौनी पैदा कर दी है। भाजपा के कार्यकर्ताओं का एक वर्ग यह मानता है कि सरकार की योजनाएं जनता तक पहुंची हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को अपेक्षित महत्व नहीं मिल पाया है। पार्टी के अंदर यह चर्चा भी तेज है कि 2027 में बड़े पैमाने पर टिकट परिवर्तन हो सकता है। ऐसे में कई मौजूदा विधायक और दावेदार अपने-अपने क्षेत्रों में राजनीतिक ताकत दिखाने में जुट गए हैं।कांग्रेस के लिए 2027 सत्ता में वापसी का बड़ा अवसर माना जा रहा है। पार्टी सत्ता विरोधी रुझान, बेरोजगारी, महंगाई, पलायन और स्थानीय मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है। लेकिन कांग्रेस की सबसे बड़ी चुनौती उसकी आंतरिक गुटबाजी और नेतृत्व का सवाल है। पार्टी के कार्यकर्ता यह मानते हैं कि यदि समय रहते संगठनात्मक एकजुटता नहीं दिखाई गई तो भाजपा के खिलाफ माहौल बनने के बावजूद चुनावी लाभ उठाना मुश्किल होगा। कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में उत्साह जरूर है, लेकिन वह स्पष्ट रणनीति और मजबूत नेतृत्व का इंतजार भी कर रहे हैं। पार्टी की चुनावी संभावनाएं काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेंगी कि वह अपने भीतर के मतभेदों को कितना नियंत्रित कर पाती है।उत्तराखंड क्रांति दल एक बार फिर क्षेत्रीय अस्मिता, मूल निवास, भू-कानून और पलायन जैसे मुद्दों को लेकर अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। हालांकि संगठनात्मक कमजोरी और सीमित जनाधार उसके सामने बड़ी चुनौती हैं। फिर भी यदि राज्य में त्रिकोणीय मुकाबले की स्थिति बनती है, तो कुछ सीटों पर क्षेत्रीय दलों की भूमिका निर्णायक हो सकती है। राजनीतिक दलों की रणनीति का केंद्र इस बार युवा मतदाता हैं। रोजगार, स्वरोजगार, शिक्षा और तकनीकी अवसरों के मुद्दे युवाओं के बीच सबसे अधिक चर्चा में हैं। महिला मतदाताओं के बीच सरकारी योजनाओं और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों का असर देखने को मिल सकता है, जबकि पहाड़ से पलायन कर चुके मतदाताओं को भी चुनावी विमर्श में शामिल करने की कोशिशें शुरू हो गई हैं।जमीनी स्तर पर भाजपा कार्यकर्ताओं में सरकार की उपलब्धियों को लेकर आत्मविश्वास है, लेकिन स्थानीय नेतृत्व और संगठनात्मक समन्वय को लेकर कुछ असंतोष भी दिखाई देता है। दूसरी ओर कांग्रेस कार्यकर्ता भाजपा विरोधी माहौल की उम्मीद में हैं, लेकिन वह यह भी मानते हैं कि केवल सरकार विरोधी भावनाओं के भरोसे चुनाव नहीं जीता जा सकता। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि 2027 का चुनाव केवल नेताओं का नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं की ऊर्जा और संगठनात्मक प्रबंधन का चुनाव होगा। जिस दल का कार्यकर्ता सबसे अधिक सक्रिय और संतुष्ट होगा, वही चुनावी बढ़त हासिल कर सकता है।
July 4, 2026तमंचा, कारतूस, नगदी, गौ मांस व बाइक बरामद गौकशी और पुलिस पार्टी पर फायरिंग की घटना में चल रहा था फरार गौकशी मामले में पहले भी जा चुका है जेल उधमसिंहनगर। गौकशी व पुलिस पार्टी पर फायरिंग मामले में फरार चल रहे आरोपी को एसओजी व पुलिस टीम ने मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी के पैर में गोली लगी है जिसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। आरोपी के कब्जे से पुलिस ने तमंचा, कारतूस, गौमांस व बाइक बरामद की है। हालांकि मुठभेड़ के दौरान गौ तस्कर का एक साथी फरार होने मेंं सफल रहा जिसकी तलाश जारी है।जानकारी के अनुसार बीती रात एसओजी व थाना गदरपुर पुलिस को सूचना मिली कि गदरपुर क्षेत्र में पूर्व में गोकशी कर पुलिस टीम पर फायरिंग करने वाला फरार आरोपी मोईन पुत्र यामीन निवासी चक्कर की मिलक, मुरादाबाद, उ.प्र. अपने किसी अन्य साथी के साथ स्वार (रामपुर) के रास्ते बाजपुर में गोमांस की तस्करी करने की फिराक में है। सूचना पर त्वरित कार्यवाही करते हुए एसओजी व थाना गदरपुर पुलिस ने बाजपुर क्षेत्र के कनौरा तिराहे (राष्ट्रीय राजमार्ग 74) पर चेकिंग शुरू की। इस दौरान स्वार की ओर से आ रही एक संदिग्ध मोटरसाइकिल को जब पुलिस ने रोकने का इशारा किया, तो चालक ने पुलिस टीम को देखकर मोटरसाइकिल तेज गति से बाजपुर की ओर भगा ली।पुलिस टीम द्वारा पीछा करने पर आरोपियों की मोटरसाइकिल अनियंत्रित होकर आम के बाग की तरफ गिर गई। अपने आप को घिरा देख आरोपियों ने जान से मारने की नीयत से पुलिस टीम पर सीधे फायरिंग झोंक दी। पुलिस टीम ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए आत्मरक्षार्थ जवाबी फायरिंग की, जिसमें मुख्य आरोपी मोईन के बाएं पैर में गोली लगी और वह वहीं गिर गया, जबकि उसका साथी अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गया। घायल आरोपी मोईन को तत्काल प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल भेजा गया। जिसके कब्जे से एक तमंचा, तीन जिन्दा व दो खोखा कारतूस, करीब 17 किलो गौमांस व घटना में प्रयुक्त बाइक बरामद की गयी है। पुलिस अब फरार आरोपी की तलाश में दबिश देने में जुट गयी है।
July 4, 2026जब कोई श्रद्धालु मंदिर की दानपेटी में एक रुपया डालता है, तो वह केवल एक सिक्का नहीं चढ़ाता, बल्कि अपने विश्वास, अपनी उम्मीद और अपने ईश्वर के प्रति समर्पण को अर्पित करता है। मंदिरों में चढ़ने वाला चढ़ावा धन का विषय कम और आस्था का विषय अधिक होता है। इसलिए जब किसी मंदिर का दानपात्र तोड़ा जाता है, चढ़ावे की चोरी होती है या धार्मिक संपत्तियों पर हाथ साफ किया जाता है, तब केवल रुपये-पैसे की चोरी नहीं होती, बल्कि समाज की सामूहिक आस्था भी घायल होती है। अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर बनना देश की सांस्कृतिक चेतना के पुनर्जागरण का प्रतीक है। करोड़ों लोगों ने इसे अपनी सदियों पुरानी आस्था की जीत माना। लेकिन इस ऐतिहासिक क्षण के साथ एक बड़ी जिम्मेदारी भी जुड़ी है क्या हम अपने मंदिरों की पवित्रता, संपदा और सुरक्षा को लेकर भी उतने ही सजग हैं, जितने उनके निर्माण को लेकर रहे हैं? देवभूमि उत्तराखंड इस प्रश्न के केंद्र में खड़ा दिखाई देता है। यहां के चारधाम बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्रीकृकेवल मंदिर नहीं, बल्कि सनातन आस्था के जीवंत तीर्थ हैं। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु हजारों किलोमीटर की यात्रा तय कर इन धामों में पहुंचते हैं। कोई अपनी मनोकामना लेकर आता है, कोई कृतज्ञता व्यक्त करने और कोई आत्मिक शांति की तलाश में। उनके द्वारा चढ़ाया गया दान उस अटूट विश्वास का प्रतीक है, जो पीढ़ियों से भारतीय समाज को जोड़ता आया है। विडंबना यह है कि इसी आस्था पर समय-समय पर अपराधियों की नजर पड़ती रही है। मंदिरों में चढ़ावे की चोरी की घटनाएं यह बताती हैं कि हमारी धार्मिक संस्थाओं की सुरक्षा व्यवस्था अभी भी कई स्थानों पर कमजोर है। यह प्रश्न केवल कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि सामाजिक संवेदनशीलता का भी है। आखिर ऐसा क्यों हो कि जिन स्थलों को लोग ईश्वर का धाम मानते हैं, वह अपराधियों के लिए आसान निशाना बन जाएं? आज आवश्यकता केवल मंदिरों की भव्यता बढ़ाने की नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षा को भी उतनी ही प्राथमिकता देने की है। दानपात्रों की निगरानी, सीसीटीवी व्यवस्था, डिजिटल लेखा-जोखा, पारदर्शी प्रबंधन और स्थानीय समुदाय की भागीदारी को मजबूत करना समय की मांग है। मंदिरों की सुरक्षा को एक व्यापक सांस्कृतिक दायित्व के रूप में देखना होगा। आस्था की रक्षा केवल कानून नहीं कर सकता। इसके लिए समाज को भी प्रहरी बनना होगा। मंदिरों की घंटियां तभी तक पवित्रता का संदेश देंगी, जब तक उनमें समर्पित विश्वास सुरक्षित रहेगा। यदि श्रद्धालु यह महसूस करने लगें कि उनका अर्पण भी सुरक्षित नहीं है, तो यह केवल मंदिरों की नहीं, समाज के नैतिक ताने-बाने की भी क्षति होगी। राम मंदिर का निर्माण हमें यह संदेश देता है कि आस्था केवल पूजा का विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना का आधार है। इसलिए देश के हर मंदिर, हर तीर्थ और हर दानपात्र की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। क्योंकि जहां विश्वास सुरक्षित रहता है, वहीं संस्कृति जीवित रहती है और जहां आस्था पर चोट होती है, वहां समाज की आत्मा भी कहीं न कहीं आहत हो जाती है।
July 4, 2026कराची। पाकिस्तान कोस्ट गार्ड के एक मजबूत सैन्य कैंप पर बलोच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने भीषण ‘फिदायीन’ हमला किया है। इस अलगाववादी संगठन का दावा है कि इस सुनियोजित और घातक मिलिट्री ऑपरेशन में पाकिस्तान के 30 से अधिक सुरक्षाकर्मी मारे गए हैं और दर्जनों गंभीर रूप से घायल हैं। स्थानीय मीडिया संगठन ‘द बलोचिस्तान पोस्ट’ ने इस घटना की विस्तृत रिपोर्ट जारी की है।रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह हमला शुक्रवार शाम करीब 6:32 बजे (स्थानीय समयानुसार) अंजाम दिया गया। इसे बीएलए की सबसे खतरनाक और कुख्यात आत्मघाती विंग ‘मजीद ब्रिगेड’ ने अंजाम दिया है। हमले के लिए अताउल्लाह बलोच उर्फ अजमल नाम के एक सुसाइड बॉम्बर का इस्तेमाल किया गया, जिसने विस्फोटकों से पूरी तरह लदे एक ट्रक को कोस्ट गार्ड के किलेनुमा सैन्य कैंप के मुख्य हिस्से से टकरा दिया। संगठन ने बताया कि यह केवल एक आत्मघाती ट्रक हमला नहीं था। जैसे ही आत्मघाती धमाके ने सैन्य कैंप की सुरक्षा को ध्वस्त किया, बीएलए की विंग ‘फतेह स्क्वाड’ के लड़ाकों ने तबाह हो चुके कैंप को चारों तरफ से घेर लिया और जीवित बचे कोस्ट गार्ड के जवानों पर हमला करने लगे। बीएलए की मीडिया विंग ‘हक्काल’ ने इस हमले का एक 43 सेकंड का वीडियो क्लिप भी जारी किया है। बीएलए के प्रवक्ता जीयंद बलोच के अनुसार, हमले में 30 से अधिक सुरक्षाकर्मी मौके पर ही मारे गए हैं जिनकी संख्या और बढ़ सकती है।प्रतिबंधित संगठन बीएलए ने चेतावनी दी है कि बलोचिस्तान की ‘पूर्ण स्वतंत्रता’ के अंतिम लक्ष्य को प्राप्त करने तक पाकिस्तानी सुरक्षा बलों को निशाना बनाकर चलाया जा रहा उनका यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। दूसरी ओर, इस भीषण हमले को लेकर पाकिस्तानी सेना की मीडिया विंग या सरकार की तरफ से खबर लिखे जाने तक कोई भी आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है और न ही हताहतों के आधिकारिक आंकड़ों की पुष्टि की गई है।
July 3, 2026भाजपा विधायक दिलीप रावत की वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर टिप्पणी से आया राजनीति में भूचाल पब्लिक नाराज, विपक्ष भी आगबबूला, बीजेपी विधायक के लिए भारी पड़ा पब्लिक अपीयरेंस चुनावी साल में भाजपा के लिए नया सिरदर्द, विधायक दिलीप रावत आए विपक्ष के निशाने पर देहरादून। लैंसडाउन से भाजपा विधायक दिलीप रावत के एक सार्वजनिक कार्यक्रम में दिए गए विवादित बयान ने उत्तराखंड की राजनीति में नया बवंडर खड़ा कर दिया है। पेशावर कांड के नायक और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी वीर चंद्र सिंह गढ़वाली को लेकर की गई टिप्पणी के बाद विपक्ष ने भाजपा पर जोरदार हमला बोल दिया है। कांग्रेस और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने इसे उत्तराखंड की अस्मिता और स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास का अपमान बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है।बता दें कि वीर चंद्र सिंह गढ़वाली ने 23 अप्रैल 1930 को पेशावर में निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने के ब्रिटिश आदेश को मानने से इनकार कर दिया था। उनके इस ऐतिहासिक निर्णय ने उन्हें भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के अमर नायकों की श्रेणी में खड़ा कर दिया। विधानसभा चुनाव की आहट के बीच सामने आया यह विवाद भाजपा के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकता है। पार्टी जहां विकास और सुशासन के मुद्दों पर जनता के बीच जाने की तैयारी कर रही है, वहीं विधायक के बयान ने विपक्ष को नया राजनीतिक हथियार दे दिया है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि भाजपा के नेता लगातार उन महापुरुषों के सम्मान को ठेस पहुंचा रहे हैं, जिन पर उत्तराखंड को गर्व है। पार्टी नेताओं ने कहा कि वीर चंद्र सिंह गढ़वाली किसी एक दल या विचारधारा के नहीं, बल्कि पूरे देश की धरोहर हैं।गढ़वाल क्षेत्र के कई सामाजिक संगठनों और बु(िजीवियों ने भी बयान पर नाराजगी जताई है। सोशल मीडिया पर भी मामला तेजी से तूल पकड़ रहा है। लोगों का कहना है कि जिस व्यक्ति ने अंग्रेजी हुकूमत के आदेश को ठुकराकर मानवता और देशभक्ति की मिसाल पेश की, उसके योगदान पर सवाल खड़े करना या उसके प्रति असम्मानजनक टिप्पणी करना जनभावनाओं को आहत करने वाला है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उत्तराखंड में स्वतंत्रता सेनानियों और राज्य के गौरव पुरुषों को लेकर जनता बेहद संवेदनशील रही है। ऐसे में यह विवाद केवल एक बयान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस का बड़ा विषय बन सकता है। भाजपा के सामने अब दोहरी चुनौती हैकृएक ओर विपक्ष के हमलों का जवाब देना और दूसरी ओर जनता के बीच पैदा हुई नाराजगी को शांत करना।उत्तराखंड की राजनीति में इतिहास और क्षेत्रीय गौरव से जुड़े मुद्दे हमेशा भावनात्मक रहे हैं। ऐसे में दिलीप रावत के विवादित बयान ने चुनावी मौसम में नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है और भाजपा-कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप की लड़ाई को और धार दे सकता है।