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उत्तराखण्ड में मानसूनी दस्तक

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उत्तराखण्ड में आखिरकार मानसून ने दस्तक दे ही दी है। करीब 10 दिन की देरी से पहुंचे मानसून के साथ अब प्रदेश भर में बारिश का दौर शुरू हो गया है। मानसून के आने के साथ ही प्रदेश भर में लोगो को गर्मी से राहत मिली है। वहीं इस मानूसनी बारिश के झमाझम चलने के कारण राज्य के नदी नाले उफान पर आ गये है। जिस कारण लोगो को परेशानियों का सामना भी करना पड़ रहा है। राज्य की राजधानी देहरादून की बात करें तो यहंा देर रात से हो रही बारिश के कारण सड़कों पर पानी भर चुका है। जिसके चलते लोगों को आवागमन में भी दिक्कते आ रही है। कहने को तो राजधानी देहरादून को स्मार्ट सिटी बनाने की तो बात लम्बे समय से की जा रही है लेकिन बीते रोज से हो रही बरसात ने इसकी पोल खोलकर रख दी है। बात अगर राज्य के पहाड़ी जिलों की की जाये तो बीते वर्ष की मानसूनी बारिश के कारण पहाड़ो मेंं आपदा का दौर शुरू हो गया था। जिसमे कई लोगों को अपनी जान माल से हाथ धोना पड़ा था। उत्तराखण्ड में आपदा का यह कहर राज्य के दोनो मंडलों मेें देखने को मिला था। गढ़वाल मंडल मेें उत्तरकाशी जनपद सहित कई जिले जहंा आपदा की चपेट में आये थे वहीं कुमांऊ मंडल भी आपदा से अछुता नही रहा था। यहंा भी कई सड़के बह जाने के कारण लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। जिस कारण खाघ सामग्री भी दूरस्थ क्षेत्रों में पहुंचाना शासन—प्रशासन के लिए मुश्किल हो गया था। हालांकि मानूसन काल समाप्त होते ही शासन प्रशासन द्वारा राज्य की कई सड़कों को ठीक कर दिया गया जबकि अब भी कई पुलो व पुलियाओं को ठीक करने का काम आज भी जारी है। राजधानी देहरादून में बीते वर्ष मानसून के दौरान हुई बारिश से कई घर मकान बह गये थे। जिनमें मालदेवता, सहस्त्रधारा गढ़ी कैंट के दुरस्त इलाके व रानीपोखरी शामिल थे। देखना होगा कि इस वर्ष मानूसनी बारिश जिसका इंतजार गर्मी के कारण सभी लोग कर रहे थे उत्तराखण्ड पर इसका क्या असर पैदा करता है।

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