बड़े बेआबरू होकर तेरे कूचे से हम निकले

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हरीश रावत 14 हजार से अधिक वोटों से हारे
सीएम धामी को कापड़ी ने दी पटखनी

देहरादून। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के लिए आज आए चुनाव परिणाम किसी बुरे सपने से कम नहीं है सालों से खुद को मुख्यमंत्री बनाने की जद्दोजहद में उलझे हरीश रावत ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि हरदा कहे जाने वाले हरीश रावत की राजनीतिक पाली हारदा की छाप के साथ समाप्त होगी और उन्हें लाल कुआं सीट से इतनी करारी हार के साथ राजनीति से विदा होना पड़ेगा। इस हार का दर्द उन्हें उम्र भर सालता रहेगा।
आज के चुनाव परिणामों में सिर्फ हरीश रावत की यह हार ही हैरान करने वाली नहीं है। अपने आपको मुख्य सेवक बताने वाले वर्तमान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के लिए यह हार किसी बड़ी दुर्घटना से कम नहीं है। राज्य के युवा नेता और युवा सीएम के चेहरे पर भले ही भाजपा ने दो—दो मुख्यमंत्री बदल कर भी चुनाव जीत लिया हो, लेकिन वह अपनी पारंपरिक सीट खटीमा जहां से वह दो बार चुनाव जीत चुके हैं ऐसे समय में उन्हें हार का मुंह देखना पड़ेगा इसके बारे में उन्होंने शायद कल्पना भी नहीं की होगी। भले ही प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें अलग सीएम का चेहरा बताया हो या उनकी इस हार के बाद भी प्रदेश प्रभारी दुष्यंत, धामी के ही सीएम बनने की बात कह रहे हो लेकिन अब यह बहुत दूर की कौड़ी है। खास बात यह है कि पूर्व सीएम हरीश रावत जहां 2017 में दो—दो सीटों से चुनाव हार गए थे वहीं इस बार वह रिकॉर्ड 14 हजार से अधिक मतों से चुनाव हारे हैं। वही सीएम पुष्कर सिंह धामी भी भारी मतों के अंतर से कांग्रेस के भुवन चंद कापड़ी के हाथों हार का सामना करना पड़ा है।
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल को भी हार का सामना करना पड़ा है। हरीश रावत के लिए थोड़ी राहत की बात यह है कि उनकी पुत्री अनुपमा रावत हरिद्वार ग्रामीण क्षेत्र से चुनाव जीतने में सफल हो गई।

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