अमृतसर। पंजाब के मानसा में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले एक्टिविस्ट परविंदर झोटा की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल है। गोलीबारी में झोटा का एक साथी भी गंभीर रूप से घायल हुआ है। वारदात के बाद पंजाब की कानून-व्यवस्था और नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को लेकर राजनीतिक विवाद भी तेज हो गया है।
जानकारी के मुताबिक, परविंदर झोटा एक फार्मेसी पर पहुंचे थे। वहां उन्होंने दुकान के मालिक से उस व्यक्ति के बारे में पूछताछ की, जिसने कथित तौर पर उसी सुबह दुकान से नशीले पदार्थ खरीदे थे। इसी बात को लेकर दोनों के बीच बहस शुरू हो गई। आरोप है कि बहस के दौरान दुकान में मौजूद एक व्यक्ति ने झोटा पर गोलियां चला दीं। गोली लगने से उनकी मौत हो गई, जबकि उनका एक साथी गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद दुकान का मालिक दुकान बंद कर मौके से फरार हो गया। गोलीबारी की सूचना मिलते ही पुलिस घटनास्थल पर पहुंची।
घटना के बाद पंजाब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने आम आदमी पार्टी की सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने राज्य की कानून-व्यवस्था और नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान पर सवाल उठाए। राजा वड़िंग ने आरोप लगाया कि परविंदर झोटा पंजाब में नशे के कारोबार के खिलाफ आवाज उठा रहे थे, लेकिन राज्य सरकार ने उनके प्रयासों को पर्याप्त समर्थन नहीं दिया। उन्होंने इस घटना को लेकर सरकार की भूमिका और नशे के खिलाफ कार्रवाई पर सवाल खड़े किए।
शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने भी इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए सरकार को घेरा। उन्होंने दावा किया कि परविंदर झोटा अपने कैमरे पर नशे के कारोबार से जुड़े लोगों को दिखा रहे थे, तभी कथित तौर पर चिट्टा बेचने वाली मेडिकल दुकान के मालिक ने उन पर गोली चला दी। मजीठिया ने आरोप लगाया कि पंजाब में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों को गंभीर खतरे का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान को सार्वजनिक कार्यक्रमों में भी चिट्टे के मुद्दे पर सवालों का सामना करना पड़ रहा है।





