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संसद और संविधान का मजाक

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केंद्र की भाजपा सरकार ने 2023 में महिलाओं को राज्यों की विधानसभाओं और लोकसभा में 33 फीसदी आरक्षण के लिए जो कानून (बिल) लाया गया था उसे कल संसद में सरकार पारित नहीं करा सकी। लोकसभा में औंधे मुंह गिरे इस बिल के साथ ही परिसीमन बिल जिसके जरिए संासदों की सदस्य संख्या 543 से बढ़ाकर सरकार 850 करना चाहती थी तथा केंद्र शासित राज्यों के लिए लाया गया बिल भी स्वतः ही गिर गए। सवाल यह है कि क्या सरकार ने जानबूझकर सोची समझी रणनीति के तहत विपक्ष को महिला आरक्षण जैसे बिल को गिराने का मौका दिया गया है। ग्यारह साल में यह पहली बार हुआ है जब सरकार को संसद में मुंह की खानी पड़ी है सरकार द्वारा जानबूझकर अपनी किरकिरी कराने के कई कारण है। इस बिल पर चर्चा के बाद हुए मत विभाजन में सरकार 56 मतों से हार गई। जब इस बिल पर चर्चा के दौरान पीएम मोदी विपक्ष को यह कहकर डरा रहे थे कि अगर आपने इस बिल का समर्थन नहीं किया तो आने वाले चुनाव में देश की जागरूक महिलाएं क्या हाल करेगी? इसलिए मेरी विपक्ष के नेताओं को सलाह है कि वह इसे पास करा के श्रेय के के भागीदार बने। एक अन्य बात यह है कि जब इस बिल पर या यूं समझो कि परिसीमन के बिल पर चर्चा के बाद मत विभाजन में हार के बाद भाजपा की महिला सांसदों ने कांग्रेस व विपक्ष के खिलाफ तख्तियोेंं पर लिखे नारों के साथ विरोध प्रदर्शन किया तो यह साफ हो गया था कि सरकार को पहले से ही अपनी हार का पता था और वह विरोध की तैयारी के साथ आई थी। सरकार द्वारा देश की संसद और संविधान का ऐसा मजाक शायद कभी नहीं बनाया गया है। 2023 में सरकार जब इस नये अभिनंदन बिल को लाई थी तब कांग्रेस ने इसे 2024 के चुनाव से पूर्व ही लागू करने की मांग की थी तथा विपक्ष ने अपना समर्थन भी दिया था लेकिन सरकार ने इसे 3 साल तक लटकाए रखा लोकसभा राज्यसभा से पारित होने व राष्ट्रपति की मोहर लगने के बाद इसे कानूनी जामा क्यों नहीं पहनाया गया? तथा अब अचानक उसे उसकी याद क्यों आई? शायद इसलिए कि वह इसका इस्तेमाल अपने राजनीतिक लाभ के लिए ही करना चाहती है। इस बिल को 2011 की जनगणना के आधार पर लागू करने और उससे पहले परिसीमन बिल के जरिए सभी राज्यों में सांसद सीट अपनी सुविधा अनुसार बढ़ाने की मंशा के तहत ही उसने यह सब किया। यही नहीं सरकार महिलाओं के आरक्षण का लाभ 2019 के चुनाव में भी नहीं देना चाहती थी लेकिन विपक्ष ने उसकी चतुराई को भांप ही नहीं लिया बल्कि एकजुट होकर इसका विरोध किया यही कारण है कि सरकार ने आधी रात को इस कानून को लागू करने का प्रयास किया गया। सरकार खुद ही नहीं चाहती थी कि यह बिल पास हो क्योंकि वह कांग्रेस और विपक्ष को महिला विरोधी साबित करने का प्रयास कर रही थी। कांग्रेस के नेताओं का साफ कहना है कि उसने पूर्व समय में कभी महिलाओं के आरक्षण का विरोध नही किया है न अब कर रहे हैं। वह तो पूरी संहमति के आधार पर उनके आरक्षण की हिमायत कर रहे हैं। महिलाओं के आरक्षण की आड़ में सरकार परिसीमन के जरिए जो खेल करना चाहती है उसका विरोध कर रहे हैं। सरकार द्वारा इस नारी वन्दन बिल के जरिए न सिर्फ आधी आबादी को बल्कि देश की संसद और संविधान के साथ घटिया मजाक किया जा रहा है। इस पूरे ड्रामे ने भाजपा को बेनकाब कर दिया है अब उसे इसका राजनीतिक लाभ कम बल्कि नुकसान ही अधिक होगा।

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