- होली पर राजनीतिक दलों के मिलन समारोहों का सच
देहरादून। चुनावी साल में नेता कोई भी मौका नहीं छोड़ना चाहते हैं। खासकर जब होली का समय हो, तब नेताओं को मौका मिल जाता है कि हम एक है और हमने कोई मनमुटाव नहीं है अर्थात ‘सब ठीक है’ का दिखावा तो जरूरी हो जाता है।
बता दें कि प्रदेश में होली मिलन समारोहों की धूम मची है। खासकर राजनैतिक दलों के कार्यालय, नेताओं के आवास, नेताओं के अपने आफिस और हर उस छोट-बडे़ कार्यक्रमों में सब ठीक है का दिखावा चल रहा है। सालभर तक मनमुटाव, ईईर्ष्या या रंजिशों के चलते जो एक-दूसरे की टांग खिचाई पर लगे रहते हैं और एक दूसरे पर कीचड़ उछालने के लिए कोई कमी नहीं छोड़ते हैं होली के बहाने आयोजित समारोहों में ‘एका’ का संदेश देना चाहते हैं। लेकिन हकीकत क्या है यह होली के बाद सभी को दिख जात है।
वैसे भी होली तो सामाजिक समरसता और प्रेम का संदेश देने वाला पर्व है और इस समय नेताओं ने अगर मौके का फायदा नहीं उठाया तो वह नेता भी किस काम का। प्रदेश में भाजपा, कांग्रेस, यूकेडी, सपा, बसपा, आप सहित सभी पार्टियों के कार्यालयों और नेताओं के अपने आफिसों में होली मिलन समारोहों का आयोजन किया जा रहा है। पार्टी नेता किसी भी परिस्थिति में सब ठीक है के फार्मूले के तहत जनता को यह विश्वास दिखना चाहते हैं कि हम ही आपके सबसे बडे़ शुभचिंतक है। क्योंकि चुनावी साल है और जनता को नाराज करने का मतलब अपने लिए मुसीबत का पहाड़ खड़ा करना है।
आपको बता दें कि नेताओं ने अलग-अलग स्थानों पर होली मिलन समारोह आयोजित कर लोगों को होली की बधाई दी जा रही है और इस बहाने जनता को साधने की कोशिश भी हो रही है। दलों के छोटे-बडे़ नेता पार्टियों का आयोजन कर एक दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर शुभकामनाएं देने के साथ ही अपना राग अपालने के साथ ही जनता के बीच यह संदेश देना चाहते हैं कि हम भी आपके सबसे बडे़े नेता और शुभचिंतक है। भाजपा हो या कांग्रेस या फिर अन्य दलों के नेता सभी होली के बहाने जनता को साधने का कार्य कर रहे हैं। ‘सफेदपोश’ इस ‘एका’ के पीछे का कारण चुनावी साल है।
प्रदेश में भाजपा मुख्यालय से लेकर जिले और मंडल कार्यालयों में होली मिलन कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं। यही तस्वीर कांग्रेस सहित अन्य दलों की भी है। सभी दल के नेता आपसी सद्भाव और सांस्कृतिक विविधता के रंगों के साथ सामाजिक एकता को सुदृढ़ करने संदेश दे रहे हैं, जबकि उनके अंदर क्या है सभी जानते हैं। प्रदेश भर में होली की धूम मची हुई है और कांगेस-बीजेपी सहित सभी दलों के नेता होली मिलन कार्यक्रमों में शामिल होकर कार्यकर्ताओं और जनता के साथ होली खेल रहे है। असली बजह क्या है यह सभी जानते है। चुनावी साल में अगर ऐसे आयोजन नहीं होंगे तो नेता को नेताजी कौन कहेगा। क्योंकि बुरा न मानो होली है भाई !




