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जब जेब खाली, तो काहे की दिवाली

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दिवाली आ गई, हवा में थोड़ा बढ़ता प्रदूषण दिवाली आने का संदेश देने लगा है। हमने बचपन में बुजुर्गों से सुना था ट्टरोज दिवाली सोहनी जो घर में गेहूं होय,। निसंदेह अगर आपकी जेब खाली है तो फिर आपकी क्या दिवाली। आपकी जेब से हमारा मतलब उस आम आदमी से है जिनके पास ना तो कोई सरकारी नौकरी है न अपना कोई कारोबार। देश की वह 60 फीसदी आबादी जो असंगठित क्षेत्र में मेहनत मजदूरी करती है और उसके आसरे उनके घर का चूल्हा जलता है। उनके लिए यूं तो हमेशा ही आर्थिक संकट का दौर बना रहता है लेकिन यह संकट इस बार इसलिए कुछ अधिक गंभीर हो गया है कि बीते 6 माह से वह बेतहाशा महंगाई की मार झेल रहे हैं। अभी बीते दिनों अखबारों में आपने इस तरह की खबरें पढ़ी होगी कि पिछले 6 माह में जितनी महंगाई बढ़ी है उतनी महंगाई तो पिछले 10 सालों में भी नहीं बढ़ी थी। खास तौर पर सब्जियों और आम उपभोक्ता वस्तुओं की दरों में हुई भारी मूल्य वृद्धि का इस आम आदमी की जिंदगी पर इतना प्रभाव पड़ा है कि उसके लिए अपने बुरे वक्त के लिए बचा कर रख पाना तो दूर अपनी जरूरतोें को पूरा करना भी बहुत मुश्किल हो गया है। निजी क्षेत्र में काम करने वालों को आमतौर पर पगार 7 से 10 तारीख के बीच मिलती है वहीं सरकारी नौकरी करने वालों को 1 तारीख के आसपास। महंगाई के कारण इन वेतन भोगियों के लिए महीने के अंतिम 8—10 दिन वैसे भी कठिन हालात में गुजरते हैं। इस बार दिवाली 31 अक्टूबर यानी कि महीने के अंतिम दिन होगी इसलिए इस वर्ग की जेब स्वाभाविक रूप से खाली है और उनकी जेब दीपावली जैसे त्यौहार में कुछ खर्च करने की स्थिति बिल्कुल भी नहीं है। बात अगर अगस्त माह की करें तो इसमें 10.10 फीसदी महंगाई बढ़ी जो अक्टूबर में 36 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। आप खुद सोच कर देखिए कि प्याज की कीमत इन दिनों 65 से 70 रूपये किलो है और टमाटर 60 से 80 रूपये किलो में मिल रहा है। बीते दो माह में थाली की कीमत में 56 फीसदी का इजाफा हो चुका है। बताया जा रहा है कि सरकार ने दिल्ली वालों के लिए नासिक से भारी मात्रा में प्याज मंगवाया है तथा उन्हें 35 रूपये किलो प्याज देने की बात कही है 35 रूपये किलो प्याज उन्हें मिल पाया है या नहीं इसका तो पता नहीं लेकिन हां अब हिंदुस्तान में वह वक्त भी नहीं रहा है जब जनता प्याज की कीमतें बढ़ने पर सरकार बदल देती थी शायद अब उसके वोट में वह ताकत नहीं रही है। आरबीआई ने अक्टूबर के महीने में महंगाई दर 4.5 फीसदी रहने का अनुमान लगाया लेकिन वह अब 5.5 फीसदी का भी आंकड़ा पार कर चुकी है। सब परेशान है व्यापारी कह रहे हैं कि उनके कारोबार में 25 से 30 फीसदी तक गिरावट बीते कुछ माह में हो चुकी है। लोग न कार खरीद रहे हैं न महंगे मोबाइल क्योंकि जेब खाली है। भला हो सरकार का जो 5 किलो मुफ्त में राशन दे रही है वरना इस दिवाली पर जेब तो खाली है ही खाली पेट ही दिवाली गुजर जाती। सवाल यह भी मन में आ रहा है जिनकी जेब भी खाली है और पेट भी खाली है उन्हें इस दिवाली की क्या शुभकामनाएं दी जाए।

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