July 7, 2026नई दिल्ली। सऊदी अरब ने एशिया के अपने सबसे बड़े ग्राहकों के लिए कच्चे तेल की कीमतों में $11 प्रति बैरल की भारी कटौती कर दी है। पिछले 26 साल में सऊदी अरब द्वारा की गई यह अब तक की सबसे बड़ा प्राइस कट है। बाजार के जानकारों को उम्मीद थी कि कीमतों में करीब $8 की कमी हो सकती है, लेकिन सऊदी अरामको के इस फैसले ने सभी अनुमानों को पीछे छोड़ दिया है। कच्चे तेल की कीमतों में इस भारी गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह Strait of Hormuz का दोबारा खुलना है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव खत्म होने और रास्ते से रुकावटें हटने के बाद, इस मुख्य समुद्री रास्ते से तेल की सप्लाई फिर से तेजी से शुरू हो गई है। इस रास्ते के बंद होने से जो ग्लोबल सप्लाई रुकी हुई थी, वह अब अचानक बाजार में आ गई है। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड फिसलकर $72 प्रति बैरल के स्तर पर आ गया है, जो फरवरी के बाद का सबसे निचला स्तर है। सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी ‘सऊदी अरामको’ ने अपने मुख्य ‘अरब लाइट’ क्रूड की कीमतों को क्षेत्रीय बेंचमार्क से $1।50 डिस्काउंट (कम) पर बेचने का फैसला किया है।युद्ध के दौरान सऊदी अरब ने होर्मुजका रास्ता बंद होने के डर से अपने तेल की सप्लाई को लाल सागर के यानबू पोर्ट पर शिफ्ट कर दिया था। अब हालात सामान्य होने के बाद, अरामको ने अपने मुख्य पर्शियन गल्फ पोर्ट ‘रस तनुरा’ से दोबारा एक्सपोर्ट शुरू कर दिया है। कंपनी अपनी सप्लाई को युद्ध-पूर्व के 90% के स्तर पर ले आई है।OPEC देशों की रणनीति और बढ़ता कॉम्पिटिशन सऊदी अरब और रूस की अगुवाई वाले ओपेक (OPEC) संगठन ने अगस्त महीने से तेल उत्पादन के कोटे में मामूली बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। युद्ध के समय जब रास्ते बंद थे, तब ओपेक देशों द्वारा उत्पादन बढ़ाना सिर्फ कागजी लग रहा था क्योंकि तेल बाहर भेजने के रास्ते सीमित थे। ईरान युद्ध का बड़ा असर! पेट्रोल-डीजल महंगा पड़ते ही EV, CNG और Hybrid कारों की बिक्री 29% उछली लेकिन अब होर्मुज का रास्ता पूरी तरह साफ होने के बाद सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे बड़े तेल उत्पादक देश अपनी बढ़ी हुई क्षमता का पूरा इस्तेमाल कर रहे हैं। बाजार में तेल की कोई कमी न रहे और ग्राहक हाथ से न निकलें, इसी कॉम्पिटिशन के चलते सऊदी अरब को कीमतों में यह ऐतिहासिक कटौती करनी पड़ी है।
July 7, 2026हरिद्वार। सड़क हादसे मेंं देर रात दो तेज रफ्तार बाइकों के आमने—सामने टक्कर हो जाने से जहां तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गयी वहीं दोे लोग गम्भीर रूप से घायल हुए है। सूचना मिलने पर पुलिस ने तीनों शवों को कब्जे में लेकर दोनों घायलों को अस्पताल पहुंचाया जहां उनकी हालत चिंताजनक बनी हुई है।मामला कोतवाली रुड़की क्षेत्र के रुड़की—कलियर मार्ग स्थित बाजूहेड़ी गांव के पास गंगनहर पटरी मार्ग के समीप का है। यहंा दो तेज रफ्तार बाइकों की आमने—सामने की भीषण टक्कर में तीन दोस्तों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दोनों बाइक पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं। हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा—तफरी मच गई।प्राप्त जानकारी के अनुसार बीती रात करीब 10.45 बजे दोनों मोटरसाइकिलें तेज रफ्तार से आमने—सामने आ गईं। टक्कर इतनी भीषण थी कि तीन युवकों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। हादसे के बाद गंगनहर पटरी मार्ग पर चीख—पुकार मच गई और बड़ी संख्या में लोग मौके पर जुट गए। स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी। सूचना मिलते ही सिविल लाइंस कोतवाली और पिरान कलियर पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचीं। पुलिस ने राहगीरों की मदद से दोनों गंभीर रूप से घायल युवकों को उपचार के लिए रुड़की सिविल अस्पताल भेजा, जहां उनका इलाज चल रहा है।पुलिस ने हादसे में क्षतिग्रस्त दोनों बाइकों को कब्जे में ले लिया है। इनमें से एक बाइक पर उत्तर प्रदेश की नंबर प्लेट लगी थी, जबकि दूसरी बाइक बिना नंबर प्लेट के मिली। हादसे के बाद घटनास्थल के वीडियो भी सामने आए हैं, जिनमें सड़क पर हादसे की भयावह तस्वीरें दिखाई दे रही हैं। कोतवाली रुड़की के प्रभारी निरीक्षक प्रदीप बिष्ट ने बताया कि हादसे में मृत तीनों युवकों की पहचान कराने का प्रयास किया जा रहा है। शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए मोर्चरी भेज दिया गया है। पुलिस दुर्घटना के कारणों की जांच कर रही है। प्रारंभिक जांच में तेज रफ्तार हादसे की प्रमुख वजह मानी जा रही है। फिलहाल पुलिस मृतकों की शिनाख्त, घायलों की पहचान और हादसे की परिस्थितियों की विस्तृत जांच में जुटी हुई है।
July 7, 2026चुनाव से पहले राजनीतिक खालीपन खत्म करेगी भाजपा, प्रकोष्ठों के जरिए तैयार की जमीनी फौज कार्यकर्ताओं के दम पर बूथ मजबूत करेगी भाजपा, 10 हजार की फौज को मैदान में उतरने का टास्क देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 की आहट के साथ भारतीय जनता पार्टी ने चुनावी तैयारियों को अब संगठन के सबसे निचले स्तर तक पहुंचाने का फैसला कर लिया है। प्रदेश भाजपा ने अपने विभिन्न संगठनात्मक प्रकोष्ठों के माध्यम से 10 हजार से अधिक कार्यकर्ताओं की चुनावी फौज मैदान में उतारने की रणनीति तैयार की है। उद्देश्य साफ हैकृसरकार की योजनाओं का लाभ और संदेश सीधे मतदाता तक पहुंचे, बूथ स्तर पर संगठन सक्रिय रहे और चुनावी मुकाबले से पहले कोई भी राजनीतिक खालीपन न बचे।प्रदेश भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने प्रकोष्ठों की महत्वपूर्ण बैठक में स्पष्ट संदेश दिया कि अब चुनाव केवल बड़े जनसभाओं या सोशल मीडिया से नहीं जीते जाएंगे, बल्कि बूथ, बस्ती और परिवार स्तर पर सतत संपर्क ही जीत की असली कुंजी होगा। उन्होंने सभी प्रकोष्ठों को मंडल और बूथ स्तर तक अपनी मजबूत इकाइयों का गठन शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए। भाजपा की नई रणनीति पारंपरिक चुनाव प्रचार से आगे बढ़कर माइक्रो मैनेजमेंट पर आधारित दिखाई दे रही है। पार्टी चाहती है कि किसान, युवा, महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, व्यापारी, पूर्व सैनिक, चिकित्सा, शिक्षा, विधि, आईटी और अन्य सामाजिक वर्गों से जुड़े प्रकोष्ठ सीधे अपने-अपने समाज के बीच सक्रिय रहें। भाजपा इस माडल के जरिए हर वर्ग तक अलग-अलग संदेश पहुंचाने की तैयारी कर रही है। इससे पार्टी को स्थानीय मुद्दों की जानकारी भी मिलेगी और संगठन की पकड़ भी मजबूत होगी।बैठक में कार्यकर्ताओं से कहा गया कि वह सरकार की विकास योजनाओं, जनकल्याणकारी कार्यक्रमों और पिछले वर्षों में हुए कार्यों को गांव-गांव और घर-घर तक पहुंचाएं। यानी भाजपा का चुनावी नैरेटिव एक बार फिर विकास और डिलीवरी पर केंद्रित रहने वाला है। पार्टी का आकलन है कि यदि योजनाओं के लाभार्थियों से सीधे संवाद मजबूत हुआ तो सत्ता विरोधी माहौल को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।भाजपा की यह सक्रियता ऐसे समय सामने आई है जब कांग्रेस प्रदेशभर में संगठन विस्तार और परिवर्तन के संदेश के साथ कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने में जुटी है। ऐसे में भाजपा का प्रकोष्ठ अभियान केवल संगठनात्मक कवायद नहीं, बल्कि विपक्ष की राजनीतिक सक्रियता का जवाब भी माना जा रहा है। दोनों दल अब जनसभाओं से ज्यादा कैडर आधारित चुनाव की तैयारी कर रहे हैं, जो पार्टी बूथ स्तर पर मजबूत होगी, वही चुनावी बढ़त हासिल कर सकती है।भाजपा की कोशिश है कि प्रत्येक बूथ पर ऐसा कार्यकर्ता मौजूद हो, जो स्थानीय मतदाताओं से लगातार संपर्क बनाए रखे। यही वजह है कि प्रकोष्ठों को केवल औपचारिक संगठन नहीं, बल्कि चुनावी अभियान का सक्रिय हिस्सा बनाया जा रहा है। पार्टी सूत्रों के अनुसार आने वाले महीनों में प्रकोष्ठों के प्रशिक्षण शिविर, लाभार्थी सम्मेलन, सामाजिक संवाद कार्यक्रम और घर-घर संपर्क अभियान भी तेज किए जाएंगे। भाजपा की रणनीति का एक महत्वपूर्ण पहलू संगठन और सरकार के बीच समन्वय भी है। सरकार की योजनाओं का राजनीतिक लाभ तभी मिलेगा, जब संगठन उन्हें प्रभावी ढंग से जनता तक पहुंचाए। यही कारण है कि इस बार संगठनात्मक ढांचे को पहले से अधिक सक्रिय बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
July 7, 2026राम मंदिर करोड़ों भारतीयों की आस्था का प्रतीक है। यह केवल एक भव्य मंदिर नहीं, बल्कि दशकों के सामाजिक, सांस्कृतिक और न्यायिक संघर्ष का परिणाम भी है। ऐसे में यदि इस मंदिर में श्र(ालुओं के चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर सवाल उठते हैं, तो मामला किसी सामान्य प्रशासनिक विवाद तक सीमित नहीं रहता। यह सीधे उस विश्वास से जुड़ जाता है, जिसके सहारे श्र(ालु अपनी मेहनत की कमाई का अंश भगवान के चरणों में अर्पित करते हैं। भारत में यह प्रवृत्ति नई नहीं है कि किसी भी संस्थान में विवाद होते ही सबसे पहले चेहरे बदल दिए जाते हैं। इससे तत्काल राजनीतिक और सामाजिक दबाव कुछ समय के लिए कम जरूर हो जाता है, लेकिन यदि संस्थागत सुधार नहीं किए जाते, तो वही समस्याएं फिर लौट आती हैं। सवाल व्यक्तियों का कम और व्यवस्था का अधिक होता है। आखिर ऐसी परिस्थितियां पैदा ही क्यों होती हैं, जहां आस्था से जुड़े संस्थानों की कार्यप्रणाली पर उंगली उठने लगे? राम मंदिर का महत्व इसलिए भी अलग है क्योंकि यह केवल उत्तर प्रदेश या अयोध्या तक सीमित नहीं है। देश के कोने-कोने से श्र(ालु यहां पहुंचते हैं। विदेशों में बसे भारतीय भी अपनी श्र(ा के अनुसार दान भेजते हैं। ऐसे में चढ़ावे का प्रत्येक रुपया केवल आर्थिक संसाधन नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों के विश्वास की अभिव्यक्ति है। इस विश्वास की रक्षा करना ट्रस्ट की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। इस्तीफा किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में नैतिक उत्तरदायित्व का प्रतीक माना जाता है। लेकिन इस्तीफा स्वयं में समाधान नहीं होता। समाधान तब होता है, जब उस घटना से सबक लेकर पूरी व्यवस्था को अधिक मजबूत बनाया जाए। यदि निगरानी प्रणाली कमजोर रही, यदि लेखा-जोखा पारदर्शी नहीं रहा, यदि जिम्मेदारियों का स्पष्ट निर्धारण नहीं हुआ, तो नए पदाधिकारी भी उसी व्यवस्था का हिस्सा बन जाएंगे, जिसने पहले विवाद को जन्म दिया था। आज देश डिजिटल युग में प्रवेश कर चुका है। बैंकिंग से लेकर रेलवे टिकट, आयकर से लेकर सरकारी भुगतान तक अधिकांश व्यवस्थाएं तकनीक आधारित हो चुकी हैं। फिर धार्मिक संस्थानों में करोड़ों रुपये के चढ़ावे का प्रबंधन भी उसी स्तर की तकनीकी पारदर्शिता से क्यों न जुड़ा हो? प्रत्येक दान की डिजिटल प्रविष्टि, बहु-स्तरीय निगरानी, उच्च गुणवत्ता वाले सीसीटीवी, स्वतंत्र वित्तीय आडिट और समय-समय पर सार्वजनिक लेखा-जोखा अब विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता हैं। इससे न केवल अनियमितताओं की संभावना घटेगी, बल्कि श्र(ालुओं का भरोसा भी मजबूत होगा। देश के अनेक बड़े मंदिरों में अब आधुनिक प्रबंधन प्रणाली अपनाई जा रही है। दान पेटियों की इलेक्ट्रानिक निगरानी, आनलाइन दान का विस्तृत रिकार्ड, स्वतंत्र आडिट और समय-समय पर सार्वजनिक वित्तीय रिपोर्ट जैसी व्यवस्थाएं विश्वास बढ़ाने का काम करती हैं। राम मंदिर जैसा राष्ट्रीय महत्व का संस्थान इन मानकों से पीछे नहीं रह सकता। बल्कि उसे देश के अन्य धार्मिक संस्थानों के लिए आदर्श स्थापित करना चाहिए। इतिहास यह बताता है कि संस्थान व्यक्तियों से नहीं, व्यवस्थाओं से मजबूत होते हैं और यदि व्यवस्था नहीं बदली, तो आज के इस्तीफे कल की नई नियुक्तियों में बदल जाएंगे, लेकिन कुछ समय बाद फिर कोई नया विवाद सामने होगा। तब देश एक बार फिर वही प्रश्न पूछेगाकृक्या सचमुच सुधार हुआ, या केवल चेहरे बदल दिए गए?
July 6, 2026मामूली कहा सुनी के चलते दिया गया था घटना को अंजाम देहरादून। मामूली कहा सुनी के चलते हुए विवाद के दौरान दोस्त पर जानलेवा हमला करने वाले आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। जिसके पास से घटना में प्रयुक्त धारदार हथियार बरामद हुआ है।जानकारी के अनुसार बीते रोज कोतवाली प्रेमनगर पर रजत मलिक द्वारा तहरीर देकर बताया गया था कि उनका भाई कृष्णा अपने दोस्त शिवानंद बालियान के साथ मुज्जफरनगर से देहरादून घूमने के लिए आया था। देहरादून घूमने के दौरान प्रेम नगर दशहरा ग्राउंड में शिवानंद द्वारा उनके भाई को जान से मारने की नीयत से धारदार हथियार से उसके पेट तथा जाघ पर वार कर गम्भीर रूप से घायल कर दिया। प्राप्त तहरीर के आधार पर पुलिस ने तत्काल मुकदमा दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी गयी। आरोपी की तलाश में जुटी पुलिस टीम द्वारा आज सुबह एक सूचना के बाद घटना को अंजाम देने वाले आरोपी शिवानंद बालियान उर्फ शिवा को पौधा रोड से गिरफ्तार किया गया, जिसकी निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त धारदार हथियार बरामद किया गया। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह मूल रूप से मुजफ्फरनगर का रहने वाला है तथा अपने दोस्त कृष्णा के साथ मुजफ्फरनगर से देहरादून घूमने के लिए आया था, घूमने के दौरान वे दोनों अपने एक अन्य साथी से मिलने उसके सेलाकुई स्थित कमरे में गए, जहां उन्होंने साथ में बैठकर शराब पी। शराब पीने के बाद आरोपी शिवानंद मुजफ्फरनगर वापस जाने की जिद करने लगा, जबकि कृष्णा द्वारा उसे देहरादून में ही रुकने को कहा, इस बात को लेकर उन दोनों के मध्य विवाद हो गया तथा वापसी में दशहरा ग्राउंड के पास उक्त विवाद के चलते हुई आपसी बहस में आरोपी शिवानंद द्वारा आवेश में आकर अपने पास रखे धारदार हथियार से कृष्णा पर वार कर दिया और मौके से फरार हो गया। बहरहाल पुलिस ने उसे न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया है।
July 6, 2026देहरादून। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में आज सचिवालय में नाबार्ड की उच्च स्तरीय समिति की बैठक सम्पन्न हुयी। बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने प्राईमरी सेक्टर पर जोर देते हुए, ग्रामीण अवसंरचना विकास कोष (आरआईडीएफ) के तहत् अधिक से अधिक प्रोजेक्ट शामिल किए जाने के निर्देश विभागों को दिए।मुख्य सचिव ने सभी विभागों को अपने प्रोजेक्ट अगले तीन दिन में पोर्टल पर अपलोड किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि गतिमान परियोजनाओं की प्रतिपूर्ति के लिए भी प्रस्ताव शीघ्र अपलोड किए जाएं, ताकि समय से प्रतिपूर्ति जारी की जा सके। उन्होंने धीमी गति से चल रहे प्रोजेक्ट्स पर भी चिंता जाहिर करते हुए पुरानी परियोजनाओं को प्राथमिकता पर पूर्ण किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विभागीय सचिव स्लो गोईंग प्रोजेक्ट्स की साप्ताहिक समीक्षा करते हुए कार्यों को पूर्ण कराएं।मुख्य सचिव ने कहा कि सभी विभागों द्वारा एकीकृत दृष्टिकोण अपनाते हुए प्रोजेक्ट तैयार करने पर ही किसी क्षेत्र में योजनाओं का उचित लाभ मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने की आवश्यकता है। कृषि—बागवानी क्षेत्र में सम्पूर्ण लिंकेज के साथ एक से अधिक क्लस्टर्स को शामिल करते हुए बड़े प्रोजेक्ट बनाए जाएं। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रोजेक्ट्स में एक क्षेत्र के आसपास के सभी क्लस्टर्स को कोल्ड चेन, इंफ्रास्ट्रक्चर, ट्रांसपोर्टेशन आदि की सुविधा एक ही प्राजेक्ट के अंतर्गत मिल सके।मुख्य सचिव ने इसके लिए नाबार्ड से तकनीकी एवं विशेषज्ञ सहायता उपलब्ध कराए जाने का भी अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि नाबार्ड को गतिशक्ति पोर्टल का एक्सेस उपलब्ध कराया जाए, ताकि वह सभी परियोजनाओं का अध्ययन कर पायलट प्रोजेक्ट के रूप में 4, 5 क्षेत्र चिन्हित करते हुए इन चिन्हित क्षेत्रों के एक सम्पूर्ण लिंकेज प्लान तैयार करने में तकनीकी एवं विशेषज्ञ सहायता उपलब्ध करा सकें। इस पर नाबार्ड ने शीघ्र एक टीम लगाए जाने के आश्वासन दिया।मुख्य सचिव ने कहा कि उघान विभाग को पॉलीहाऊस परियोजना को शीघ्र से शीघ्र पूर्ण कराए जाने हेतु सचिव स्तर पर साप्ताहिक समीक्षा करते हुए लगातार निगरानी किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने पशुपालन विभाग को भी सभी जनपदों में बड़े स्तर के अस्पतालों को स्थापित कर दूरस्थ क्षेत्रों में पशुओं के लिए स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराए जाने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि जो प्रोजेक्ट पूर्ण हो चुके हैं, उन प्रोजेक्ट्स के पूर्ण होने का प्रमाण—पत्र एवं रिपोर्ट, शीघ्र से शीघ्र नाबार्ड को उपलब्ध कराए जाएं। बैठक के दौरान बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2026—27 के लिए कुल 1 हजार करोड़ के प्रस्ताव का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से 500 करोड़ से अधिक के प्रस्ताव शासन को प्राप्त हो गए हैं। इनमें से कुल 271 करोड़ के प्रस्ताव नाबार्ड को प्राप्त हो गए हैं, इन 271 करोड़ के प्रोजेक्ट्स में से 210 करोड़ की डीपीआर नाबार्ड को प्राप्त हो गई हैं। इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुन्दरम, विशेष प्रमुख सचिव अमित सिन्हा, सचिव दिलीप जावलकर, डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरूषोत्तम, सी. रविशंकर, धीराज सिंह गर्ब्याल एवं सीजीएम नाबार्ड पंकज यादव सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।