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सऊदी अरब ने कच्चे तेल की कीमतें $11 प्रति बैरल घटाईं !

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नई दिल्ली। सऊदी अरब ने एशिया के अपने सबसे बड़े ग्राहकों के लिए कच्चे तेल की कीमतों में $11 प्रति बैरल की भारी कटौती कर दी है। पिछले 26 साल में सऊदी अरब द्वारा की गई यह अब तक की सबसे बड़ा प्राइस कट है। बाजार के जानकारों को उम्मीद थी कि कीमतों में करीब $8 की कमी हो सकती है, लेकिन सऊदी अरामको के इस फैसले ने सभी अनुमानों को पीछे छोड़ दिया है। कच्चे तेल की कीमतों में इस भारी गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह Strait of Hormuz का दोबारा खुलना है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव खत्म होने और रास्ते से रुकावटें हटने के बाद, इस मुख्य समुद्री रास्ते से तेल की सप्लाई फिर से तेजी से शुरू हो गई है। इस रास्ते के बंद होने से जो ग्लोबल सप्लाई रुकी हुई थी, वह अब अचानक बाजार में आ गई है। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड फिसलकर $72 प्रति बैरल के स्तर पर आ गया है, जो फरवरी के बाद का सबसे निचला स्तर है। सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी ‘सऊदी अरामको’ ने अपने मुख्य ‘अरब लाइट’ क्रूड की कीमतों को क्षेत्रीय बेंचमार्क से $1।50 डिस्काउंट (कम) पर बेचने का फैसला किया है।
युद्ध के दौरान सऊदी अरब ने होर्मुजका रास्ता बंद होने के डर से अपने तेल की सप्लाई को लाल सागर के यानबू पोर्ट पर शिफ्ट कर दिया था। अब हालात सामान्य होने के बाद, अरामको ने अपने मुख्य पर्शियन गल्फ पोर्ट ‘रस तनुरा’ से दोबारा एक्सपोर्ट शुरू कर दिया है। कंपनी अपनी सप्लाई को युद्ध-पूर्व के 90% के स्तर पर ले आई है।
OPEC देशों की रणनीति और बढ़ता कॉम्पिटिशन सऊदी अरब और रूस की अगुवाई वाले ओपेक (OPEC) संगठन ने अगस्त महीने से तेल उत्पादन के कोटे में मामूली बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। युद्ध के समय जब रास्ते बंद थे, तब ओपेक देशों द्वारा उत्पादन बढ़ाना सिर्फ कागजी लग रहा था क्योंकि तेल बाहर भेजने के रास्ते सीमित थे। ईरान युद्ध का बड़ा असर! पेट्रोल-डीजल महंगा पड़ते ही EV, CNG और Hybrid कारों की बिक्री 29% उछली लेकिन अब होर्मुज का रास्ता पूरी तरह साफ होने के बाद सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे बड़े तेल उत्पादक देश अपनी बढ़ी हुई क्षमता का पूरा इस्तेमाल कर रहे हैं। बाजार में तेल की कोई कमी न रहे और ग्राहक हाथ से न निकलें, इसी कॉम्पिटिशन के चलते सऊदी अरब को कीमतों में यह ऐतिहासिक कटौती करनी पड़ी है।

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