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मोदी की गारंटी कितनी विश्वसनीय

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मोदी की गारंटी मुसीबत से छुटृी, का उद्घोष करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब 2024 के लोकसभा चुनाव में अबकी बार 400 पार का नारा लगा रहे हैं। 2014 के चुनाव से पूर्व मोदी देश के प्रधानमंत्री नहीं थे। उस चुनाव में भाजपा ने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री के तौर पर पेश किया था जब काला धन वापस लाने का वायदा करते हुए सभी देश के गरीबों के खातों में 15—15 लाख रुपए जमा करने की बात कही गई थी। तब भाजपा का नारा था अच्छे दिन आने वाले हैं हम मोदी जी को लाने वाले हैं। महंगाई, बेरोजगारी और गरीबी से जूझ रहे लोगों को लगा कि अगर मोदी जी आ गए तो उनके अच्छे दिन आ जाएंगे। उन्होंने भाजपा के नारे अबकी बार मोदी सरकार को तो सार्थक सिद्ध कर दिया किंतु अपने चुनावी घोषणा पत्र में किए गए उस वायदे जिसमें 100 दिन में विदेशों में जमा काले धन को वापस लाने की बात और उससे देश की गरीबी मिटाने की बात कही गई थी उसे चुनाव जीतने के बाद यह कहकर हवा में उड़ा दिया गया कि वह तो चुनावी शगुफा था। हर साल 2 करोड़ बेरोजगारों को नौकरी देने का वायदा भी जनता से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ही किया था जो बाद में इन बेरोजगारों को चाय बेचने व पकोड़े तलने की नसीहत देते हुए यह कहते दिखे कि पकौड़ा तलना भी तो रोजगार ही है। ठीक इसी तरह पिछले लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री ने किसानों की आय दोगुना करने का वायदा किया था। किसानों की आय दो गुना होना तो दूर रहा अब वही किसान अपनी फसल और उपज की एमएसपी के लिए सरकार से कानून बनाने की मांग कर रहे है तो उन पर आसमान से अश्रु गैस के गोले दागे जा रहे हैं। बीते साल किसान कई महीनो तक दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलन करते रहे लेकिन उन्हें दिल्ली में नहीं घुसने दिया गया। इस आंदोलन में 700 से भी अधिक किसानों की जान चली गई। सवाल यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10 सालों में देश की सर्वाेच्च सत्ता पर आसीन है, अब 10 साल बाद अगर वह देश की जनता को मुसीबत से छुटृी दिलवाने का दावा कर रहे हैं तो फिर वह 10 सालों में उन्हें मुसीबत से छुटृी दिलवा कर उनके अच्छे दिन क्यों नहीं ला सके ऐसा लगता है कि देश के नेताओं द्वारा इस देश की आम जनता को इतना बेवकूफ समझ लिया गया है कि वह जो कुछ भी कहेंगे लोग उनका भरोसा और विश्वास कर ही लेंगे। भाजपा के नेता 2014 के चुनाव से पहले रसोई गैस सिलेंडर लेकर प्रदर्शन करते दिखते थे तब सिलेंडर 450 रुपए का था तब वह नारा लगाते थे कि बहुत हुई महंगाई की मार अबकी बार मोदी सरकार। लेकिन आज उन्हें सिलेंडर की कीमत हजार के पार हो जाने पर भी न महंगाई दिख रही है न पेपर लीक मामलों को लेकर सड़कों पर प्रदर्शन करते बेरोजगार दिख रहे हैं। न दिल्ली के बॉर्डर पर प्रदर्शन करते किसान। सरकार की लोकप्रियता और विश्वसनीयता भी सिर्फ कागजों में कुलाचे भर रही है। जैसे देश की अर्थव्यवस्था भर रही है। अभी राजस्थान विधानसभा चुनाव में भाजपा ने जो मोदी की गारंटी वाले होर्डिंग लगाये थे जिसमें 450 में रसोई गैस सिलेंडर देने का वायदा लिखा था वह होर्डिंग भाजपा को मुंह चिढ़ा रहे हैं। अटल बिहारी वाजपेई के शासनकाल की तरह इस दौर में भी भाजपा को विकसित भारत में इंडिया साइनिंग होता दिख रहा है। मोदी की गारंटी व उनकी विश्वसनीयता कितनी बची है इसका फैसला 2024 के चुनाव में जनता ही करेगी।

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