July 4, 2026जब कोई श्रद्धालु मंदिर की दानपेटी में एक रुपया डालता है, तो वह केवल एक सिक्का नहीं चढ़ाता, बल्कि अपने विश्वास, अपनी उम्मीद और अपने ईश्वर के प्रति समर्पण को अर्पित करता है। मंदिरों में चढ़ने वाला चढ़ावा धन का विषय कम और आस्था का विषय अधिक होता है। इसलिए जब किसी मंदिर का दानपात्र तोड़ा जाता है, चढ़ावे की चोरी होती है या धार्मिक संपत्तियों पर हाथ साफ किया जाता है, तब केवल रुपये-पैसे की चोरी नहीं होती, बल्कि समाज की सामूहिक आस्था भी घायल होती है। अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर बनना देश की सांस्कृतिक चेतना के पुनर्जागरण का प्रतीक है। करोड़ों लोगों ने इसे अपनी सदियों पुरानी आस्था की जीत माना। लेकिन इस ऐतिहासिक क्षण के साथ एक बड़ी जिम्मेदारी भी जुड़ी है क्या हम अपने मंदिरों की पवित्रता, संपदा और सुरक्षा को लेकर भी उतने ही सजग हैं, जितने उनके निर्माण को लेकर रहे हैं? देवभूमि उत्तराखंड इस प्रश्न के केंद्र में खड़ा दिखाई देता है। यहां के चारधाम बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्रीकृकेवल मंदिर नहीं, बल्कि सनातन आस्था के जीवंत तीर्थ हैं। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु हजारों किलोमीटर की यात्रा तय कर इन धामों में पहुंचते हैं। कोई अपनी मनोकामना लेकर आता है, कोई कृतज्ञता व्यक्त करने और कोई आत्मिक शांति की तलाश में। उनके द्वारा चढ़ाया गया दान उस अटूट विश्वास का प्रतीक है, जो पीढ़ियों से भारतीय समाज को जोड़ता आया है। विडंबना यह है कि इसी आस्था पर समय-समय पर अपराधियों की नजर पड़ती रही है। मंदिरों में चढ़ावे की चोरी की घटनाएं यह बताती हैं कि हमारी धार्मिक संस्थाओं की सुरक्षा व्यवस्था अभी भी कई स्थानों पर कमजोर है। यह प्रश्न केवल कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि सामाजिक संवेदनशीलता का भी है। आखिर ऐसा क्यों हो कि जिन स्थलों को लोग ईश्वर का धाम मानते हैं, वह अपराधियों के लिए आसान निशाना बन जाएं? आज आवश्यकता केवल मंदिरों की भव्यता बढ़ाने की नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षा को भी उतनी ही प्राथमिकता देने की है। दानपात्रों की निगरानी, सीसीटीवी व्यवस्था, डिजिटल लेखा-जोखा, पारदर्शी प्रबंधन और स्थानीय समुदाय की भागीदारी को मजबूत करना समय की मांग है। मंदिरों की सुरक्षा को एक व्यापक सांस्कृतिक दायित्व के रूप में देखना होगा। आस्था की रक्षा केवल कानून नहीं कर सकता। इसके लिए समाज को भी प्रहरी बनना होगा। मंदिरों की घंटियां तभी तक पवित्रता का संदेश देंगी, जब तक उनमें समर्पित विश्वास सुरक्षित रहेगा। यदि श्रद्धालु यह महसूस करने लगें कि उनका अर्पण भी सुरक्षित नहीं है, तो यह केवल मंदिरों की नहीं, समाज के नैतिक ताने-बाने की भी क्षति होगी। राम मंदिर का निर्माण हमें यह संदेश देता है कि आस्था केवल पूजा का विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना का आधार है। इसलिए देश के हर मंदिर, हर तीर्थ और हर दानपात्र की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। क्योंकि जहां विश्वास सुरक्षित रहता है, वहीं संस्कृति जीवित रहती है और जहां आस्था पर चोट होती है, वहां समाज की आत्मा भी कहीं न कहीं आहत हो जाती है।
July 4, 2026कराची। पाकिस्तान कोस्ट गार्ड के एक मजबूत सैन्य कैंप पर बलोच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने भीषण ‘फिदायीन’ हमला किया है। इस अलगाववादी संगठन का दावा है कि इस सुनियोजित और घातक मिलिट्री ऑपरेशन में पाकिस्तान के 30 से अधिक सुरक्षाकर्मी मारे गए हैं और दर्जनों गंभीर रूप से घायल हैं। स्थानीय मीडिया संगठन ‘द बलोचिस्तान पोस्ट’ ने इस घटना की विस्तृत रिपोर्ट जारी की है।रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह हमला शुक्रवार शाम करीब 6:32 बजे (स्थानीय समयानुसार) अंजाम दिया गया। इसे बीएलए की सबसे खतरनाक और कुख्यात आत्मघाती विंग ‘मजीद ब्रिगेड’ ने अंजाम दिया है। हमले के लिए अताउल्लाह बलोच उर्फ अजमल नाम के एक सुसाइड बॉम्बर का इस्तेमाल किया गया, जिसने विस्फोटकों से पूरी तरह लदे एक ट्रक को कोस्ट गार्ड के किलेनुमा सैन्य कैंप के मुख्य हिस्से से टकरा दिया। संगठन ने बताया कि यह केवल एक आत्मघाती ट्रक हमला नहीं था। जैसे ही आत्मघाती धमाके ने सैन्य कैंप की सुरक्षा को ध्वस्त किया, बीएलए की विंग ‘फतेह स्क्वाड’ के लड़ाकों ने तबाह हो चुके कैंप को चारों तरफ से घेर लिया और जीवित बचे कोस्ट गार्ड के जवानों पर हमला करने लगे। बीएलए की मीडिया विंग ‘हक्काल’ ने इस हमले का एक 43 सेकंड का वीडियो क्लिप भी जारी किया है। बीएलए के प्रवक्ता जीयंद बलोच के अनुसार, हमले में 30 से अधिक सुरक्षाकर्मी मौके पर ही मारे गए हैं जिनकी संख्या और बढ़ सकती है।प्रतिबंधित संगठन बीएलए ने चेतावनी दी है कि बलोचिस्तान की ‘पूर्ण स्वतंत्रता’ के अंतिम लक्ष्य को प्राप्त करने तक पाकिस्तानी सुरक्षा बलों को निशाना बनाकर चलाया जा रहा उनका यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। दूसरी ओर, इस भीषण हमले को लेकर पाकिस्तानी सेना की मीडिया विंग या सरकार की तरफ से खबर लिखे जाने तक कोई भी आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है और न ही हताहतों के आधिकारिक आंकड़ों की पुष्टि की गई है।
July 3, 2026भाजपा विधायक दिलीप रावत की वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर टिप्पणी से आया राजनीति में भूचाल पब्लिक नाराज, विपक्ष भी आगबबूला, बीजेपी विधायक के लिए भारी पड़ा पब्लिक अपीयरेंस चुनावी साल में भाजपा के लिए नया सिरदर्द, विधायक दिलीप रावत आए विपक्ष के निशाने पर देहरादून। लैंसडाउन से भाजपा विधायक दिलीप रावत के एक सार्वजनिक कार्यक्रम में दिए गए विवादित बयान ने उत्तराखंड की राजनीति में नया बवंडर खड़ा कर दिया है। पेशावर कांड के नायक और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी वीर चंद्र सिंह गढ़वाली को लेकर की गई टिप्पणी के बाद विपक्ष ने भाजपा पर जोरदार हमला बोल दिया है। कांग्रेस और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने इसे उत्तराखंड की अस्मिता और स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास का अपमान बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है।बता दें कि वीर चंद्र सिंह गढ़वाली ने 23 अप्रैल 1930 को पेशावर में निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने के ब्रिटिश आदेश को मानने से इनकार कर दिया था। उनके इस ऐतिहासिक निर्णय ने उन्हें भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के अमर नायकों की श्रेणी में खड़ा कर दिया। विधानसभा चुनाव की आहट के बीच सामने आया यह विवाद भाजपा के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकता है। पार्टी जहां विकास और सुशासन के मुद्दों पर जनता के बीच जाने की तैयारी कर रही है, वहीं विधायक के बयान ने विपक्ष को नया राजनीतिक हथियार दे दिया है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि भाजपा के नेता लगातार उन महापुरुषों के सम्मान को ठेस पहुंचा रहे हैं, जिन पर उत्तराखंड को गर्व है। पार्टी नेताओं ने कहा कि वीर चंद्र सिंह गढ़वाली किसी एक दल या विचारधारा के नहीं, बल्कि पूरे देश की धरोहर हैं।गढ़वाल क्षेत्र के कई सामाजिक संगठनों और बु(िजीवियों ने भी बयान पर नाराजगी जताई है। सोशल मीडिया पर भी मामला तेजी से तूल पकड़ रहा है। लोगों का कहना है कि जिस व्यक्ति ने अंग्रेजी हुकूमत के आदेश को ठुकराकर मानवता और देशभक्ति की मिसाल पेश की, उसके योगदान पर सवाल खड़े करना या उसके प्रति असम्मानजनक टिप्पणी करना जनभावनाओं को आहत करने वाला है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उत्तराखंड में स्वतंत्रता सेनानियों और राज्य के गौरव पुरुषों को लेकर जनता बेहद संवेदनशील रही है। ऐसे में यह विवाद केवल एक बयान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस का बड़ा विषय बन सकता है। भाजपा के सामने अब दोहरी चुनौती हैकृएक ओर विपक्ष के हमलों का जवाब देना और दूसरी ओर जनता के बीच पैदा हुई नाराजगी को शांत करना।उत्तराखंड की राजनीति में इतिहास और क्षेत्रीय गौरव से जुड़े मुद्दे हमेशा भावनात्मक रहे हैं। ऐसे में दिलीप रावत के विवादित बयान ने चुनावी मौसम में नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है और भाजपा-कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप की लड़ाई को और धार दे सकता है।
July 3, 2026देहरादून। पुलिस ने चोरी के दो दुपहिया वाहनों के साथ तीन लोगों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उनको न्यायालय में पेश किया जहां से उनको न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।आज यहां इसकी जानकारी देते हुए एसपी सिटी ने बताया कि थाना नेहरू कॉलोनी पर अलग—अलग तिथियां में वाहन स्वामियों द्वारा अपने वाहनों को नेहरुकोलोनी क्षेत्रान्तर्गत अलग अलग स्थानों से चोरी किये जाने के सम्बन्ध में दी गई तहरीर के आधार पर थाना नेहरू कॉलोनी पर वाहन चोरी के अलग—अलग मुकदमें दर्ज किये गए।पुलिस टीमों द्वारा लगातार किये जा रहे अथक प्रयासों के परिणाम स्वरूप पुलिस टीम द्वारा चैकिंग के दौरान मिली सूचना पर वाहन चोरी की घटनाओं में शामिल मोहन क्षेत्री उर्फ मांचा पुत्र दिल बहादुर हरिपुर नवादा निकट शिव मंदिर जंगल रोड, वीरपाल उर्फ भेड़ पुत्र सरफराज मिनी मसूरी नवादा नेहरू कॉलोनी, तथा अरसल पुत्र असलम निवासी रफीक का मकान भगत सिंह कॉलोनी, नियर जैन प्लॉट रायपुर को नेहरू कॉलोनी क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया, जिनकी निशानदेही पर पुलिस टीम द्वारा अलग—अलग स्थानों से चुराई गई 02 मोटर साइकिल, 06 एक्टिवा तथा 02 एक्टिवा के इंजन व अन्य पार्टस बरामद किये गये।
July 3, 2026देहरादून। मुख्स सचिव आनन्द बर्द्धन से शुक्रवार को सचिवालय में संयुत्तQ राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) की भारत में डिप्टी रेजिडेंट रिप्रेजेंटेटिव सुश्री ईजाबेल ने शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर उत्तराखण्ड सरकार एवं यूएनडीपी के मध्य चल रहे विभिन्न कार्यक्रमों पर चर्चा हुयी।मुख्य सचिव ने उत्तराखण्ड में सुश्री ईजाबेल एवं उनकी टीम का स्वागत किया। कुछ विशेष क्षेत्रों की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि स्किल एवं रोजगार, कार्बन क्रेडिट, डिजीटाईजेशन एवं ऑनलाईन सिस्टम का विकास एवं बच्चे के जन्म से ट्रेकिंग सिस्टम लागू करने के लिए यूएनडीपी द्वारा उनकी विशेषज्ञता का लाभ प्रदेश को हो सकता है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड की साक्षरता दर बहुत अच्छी है, यहां युवाओं को कौशल विकास पर कार्य करने की आवश्यकता है। उन्होंने यूएनडीपी से प्रदेश में कौशल विकास के साथ आजीविका के क्षेत्र में कार्य किए जाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि उत्तरखण्ड में कौशल विकास एवं रोजगार पर विशेष फोकस किए जाने की आवश्यकता है।मुख्य सचिव ने यूएनडीपी से कार्बन क्रेडिट के क्षेत्र में भी सहयोग किए जाने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड एक हिमालयी राज्य है, जिसमें 70 प्रतिशत फॉरेस्ट लैण्ड है। यह पर्यावरण की दृष्टि से काफी महत्त्वपूर्ण है। उन्होंने प्रदेश में डिजिटल और ऑनलाइन सिस्टम को बढ़ाने एवं बच्चे के जन्म से ही ट्रैकिंग सिस्टम लागू करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। उन्होंने इन दोनों क्षेत्रों में यूएनडीपी से सहयोग की बात कही।यूएनडीपी से सुश्री ईजाबेल ने बताया कि यूएनडीपी प्रदेश में सार्वजनिक नीति और सुशासन (सीपीपीजीजी) के साथ ही सतत् विकास लक्ष्य को तेजी से बढ़ाने की दिशा में कार्य कर रहा है। यूएनडीपी प्रदेश में सतत विकास लक्ष्य का स्थानीयकरण और एकीकरण, निगरानी और मूल्यांकन, सार्वजनिक नीति, उत्पादक अर्थव्यवस्था और उघमिता, आईटी और एमआईएस, संचार और क्षमता निर्माण के साथ ही सीएसआर और निजी क्षेत्र में तकनीकी सहयोग उपलब्ध करा रहा है। राज्य सरकार एवं यूएनडीपी के मध्य एक व्यापक समझौता ज्ञापन हुआ है, जो जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, ऊर्जा, जैव विविधता संरक्षण, आपदा जोखिम में कमी और लचीलापन, आजीविका, कौशल विकास (जिसमें सर्कुलर इकोनॉमी भी शामिल है), सिस्टम को मजबूत करना एवं ज्ञान प्रबंधन के क्षेत्र में तकनीकी सहायता उपलब्ध कराएगा।इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुन्दरम, अपर सचिव नरेन्द्र सिंह भण्डारी, यूएनडीपी से सत्यन चौहान एवं प्रदीप मेहता भी उपस्थित थे।
July 3, 2026दावों और नाकामियों की जंग से गरमाया सियासी पारा चुनावी महासंग्राम का बिगुल बजने से पहले चुनावी रंग देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव की औपचारिक घोषणा भले ही अभी बाकी हो, लेकिन प्रदेश की राजनीति पूरी तरह चुनावी रंग में रंग चुकी है। सत्तारूढ़ भाजपा और मुख्य विपक्षी कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। दोनों दल जनता के मुद्दों को लेकर एक-दूसरे पर हमलावर हैं और सियासी बयानबाजी से चुनावी माहौल गरमाने लगा है। भाजपा जहां मुख्यमंत्री के नेतृत्व में विकास, समान नागरिक संहिता, निवेश, सड़क और धार्मिक पर्यटन को अपनी उपलब्धियों के रूप में जनता के सामने रख रही है, वहीं कांग्रेस बेरोजगारी, पलायन, महंगाई, स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली और स्थानीय मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने में जुटी है।भाजपा का कहना है कि प्रदेश में डबल इंजन सरकार ने विकास की नई इबारत लिखी है। पार्टी नेताओं का दावा है कि उत्तराखंड में बुनियादी ढांचे, कनेक्टिविटी, पर्यटन और निवेश के क्षेत्र में अभूतपूर्व काम हुआ है। भाजपा का पूरा फोकस लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी के लक्ष्य पर है। पार्टी संगठन बूथ स्तर तक अपनी तैयारियों में जुट गया है और विकास पखवाड़ा, जनसंपर्क अभियान तथा विभिन्न कार्यक्रमों के जरिए जनता के बीच अपनी उपलब्धियां पहुंचाने की रणनीति पर काम कर रहा है। दूसरी ओर कांग्रेस सरकार पर वादाखिलाफी और जन समस्याओं की अनदेखी का आरोप लगा रही है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि प्रदेश में बेरोजगारी, पलायन और महंगाई जैसे मुद्दे लगातार बढ़े हैं और जनता अब जवाब मांग रही है।कांग्रेस यह भी दावा कर रही है कि कई विधानसभा क्षेत्रों में सत्तापक्ष के विधायकों का जनता द्वारा घेराव इस बात का संकेत है कि लोगों में सरकार के प्रति नाराजगी बढ़ रही है। पार्टी इसे आगामी चुनाव में परिवर्तन की लहर की शुरुआत मान रही है। चुनाव नजदीक आते ही राजनीतिक बयानबाजी भी तीखी होती जा रही है। भाजपा कांग्रेस पर परिवारवाद, गुटबाजी और नेतृत्व संकट का आरोप लगा रही है, जबकि कांग्रेस भाजपा पर सत्ता के दुरुपयोग, जनभावनाओं की उपेक्षा और केवल प्रचार की राजनीति करने का आरोप मढ़ रही है।प्रदेश की सियासत में अब मुद्दों के साथ-साथ व्यक्तिगत और वैचारिक हमले भी तेज होने लगे हैं। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि आने वाले महीनों में यह जुबानी जंग और अधिक तीखी हो सकती है। भाजपा और कांग्रेस की सीधी लड़ाई के बीच क्षेत्रीय दल भी अपने लिए राजनीतिक जमीन तलाशने में जुटे हैं। मूल निवास, भू-कानून और क्षेत्रीय अस्मिता जैसे मुद्दों पर कुछ दल जनता के बीच सक्रियता बढ़ा रहे हैं। हालांकि प्रदेश की मुख्य लड़ाई फिलहाल भाजपा और कांग्रेस के बीच ही दिखाई दे रही है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी बयानबाजी अपनी जगह है, लेकिन अंतिम फैसला जनता के मुद्दों पर ही होगा। रोजगार, पलायन, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और पहाड़ के विकास जैसे विषय इस चुनाव के केंद्र में रहने वाले हैं। विधानसभा चुनाव की घोषणा से पहले शुरू हुई भाजपा और कांग्रेस की यह जुबानी जंग दरअसल आगामी चुनावी महासंग्राम का ट्रेलर है। आने वाले दिनों में आरोपों और प्रत्यारोपों की यह लड़ाई और तेज होगी, लेकिन जनता की नजर इस बात पर रहेगी कि कौन-सी पार्टी उसके मुद्दों का ठोस समाधान प्रस्तुत करती है। उत्तराखंड की सियासत अब चुनावी मोड़ पर पहुंच चुकी है। चुनाव की तारीखों का ऐलान भले ही बाकी हो, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपने-अपने मोर्चे खोल दिए हैं और प्रदेश में चुनावी रण का शंखनाद लगभग हो चुका है।