नेता विपक्ष व प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव में उलझी कांग्रेस

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दिल्ली/देहरादून। चार दिन से जारी मैराथन मंथन के बाद भी कांग्रेस नेता विपक्ष के नाम की घोषणा नहीं कर पाई है।
बीते कल प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह को नेता विपक्ष बनाए जाने की खबरें आई थी लेकिन प्रीतम को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाकर नेता विपक्ष बनाए जाने पर नया प्रदेश अध्यक्ष कौन हो? इस सवाल पर आकर कांग्रेस अटक गई है। क्योंकि कांग्रेस के 10 विधायकों में एक भी ब्राह्मण नेता नहीं है। इसलिए कुमाऊं क्षेत्र के किसी पूर्व विधायक की तलाश पर आकर मामला अटक गया है। प्रीतम सिंह जिनका प्रदेश अध्यक्ष पद पर भले ही कार्यकाल चंद दिनों का ही बचा सही लेकिन वह नेता विपक्ष नहीं बनना चाहते हैं। वही प्रीतम सिंह को नेता विपक्ष बनाए जाने की पैरवी करने वाले नेता ऐसा कर उन्हें आगामी चुनाव के लिए निष्प्रभावी बनाना चाहते हैं। उनकी कोशिश है कि चुनाव समिति प्रभारी व प्रदेश अध्यक्ष पद पर हरीश रावत खेमा ही प्रभावी रहे। यह अलग बात है कि अब इंदिरा हृदयेश के निधन के बाद चंद गिने—चुने बड़े नेता ही कांग्रेस में बचे हैं लेकिन यह नेता अभी दो धड़ों में बटें हुए हैं। तथा अपने अपने खेमे की मजबूती के लिए लामबंद दिख रहे हैं। चुनाव से पूर्व कांग्रेस में जिस तरह की खेमेबाजी जारी है वह कांग्रेस के लिए अच्छे संकेत नहीं है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत जो पहले ही पंजाब प्रदेश प्रभारी की जिम्मेवारी छोड़ने व पूर्णकालिक उत्तराखंड की राजनीति करने की मंशा जता चुके हैं।
इस मामले का पटाक्षेप आसानी से हो सकता था। कांग्रेस अगर किसी कुमांऊ मंडल के नेता को नेता विपक्ष बना देती और प्रीतम सिंह को अध्यक्ष पद पर ही बने रहने देती। लेकिन अब यह मामला उलझ चुका है। प्रीतम को नेता विपक्ष बनाने व किसी ब्राह्मण और कुमाऊं क्षेत्र के नेता को क्या प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाता है यह सबसे अहम सवाल है उससे भी अहम सवाल होगा कि नया प्रदेश अध्यक्ष क्या कांग्रेस को 2022 के चुनाव में जीत दिला पाएगा?

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