काशीपुर आबकारी विभाग में 30 लाख का घपला

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फर्जी चालान जमा कर उठाया शराब का स्टॉक

देहरादून/ काशीपुर। उत्तराखण्ड में राजस्व को नुकसान पहुंचाने के मामलों में आबकारी विभाग को कोई न कोई कारनामा अकसर सामने आ ही जाता है। काशीपुर में भी ऐसा ही एक मामला सामने आया है जिसमें एक अनुज्ञापनी द्वारा अधिकारी से मिलीभगत कर प्रतिभूति के तौर पर 30 लाख का फर्जी चालान मार्च माह में आबकारी विभाग में जमा कर शराब का स्टॉक उठा लिया। गजब की बात तो यह रही कि तब से इस मामले को दबाये रखा गया लेकिन जब बैंक और ट्रेजरी में चालान का मिलान हुआ तो इस फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। सूत्रों के मुताबिक इस प्रकरण में बैंक की ओर से कोतवाली में तहरीर दी गई है।
काशीपुर जिला ऊधमसिंह नगर में आबकारी विभाग से जुड़ा सनसनीखेज मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि मार्च 2021 में अनुज्ञापी शरद कुमार द्वारा दुकान की प्रतिभूति के तौर पर तीस लाख रूपये की राशि का बैंक चालान जमा कराया गया। जब विभाग की ओर से चालान भुगतान के लिए बैंक में लगाया गया तो यह खुलासा हुआ कि चालान नकली है। संबंधित बैंक की ओर से इस तरह का कोई चालान बनाया ही नहीं गया है। वहीं ट्रेजरी ने भी इस चालान के फर्जी होने की पुष्टि की है।
जानकारी के अनुसार स्थानीय लोगों का मानना है कि अनुज्ञापी द्वारा शराब का स्टॉक उठाने के लिए 30 लाख का फर्जी चालान लगाया गया तो यह सब जिला आबकारी अधिकारी के जानकारी में आए बिना संभव नहीं हो सकता है। इस मामले में जब काशीपुर के जिला आबकारी अधिकारी कैलाश बिंजोला से बात करने की कोशिश की गई तो अधिकारी का फोन आउट ऑफ कवरेज एरिया आया। एक्साईज विभाग के बाबू को फोन किया तो उन्होंने इस मामले में कुछ भी कहने से इंकार करते हुए आबकारी अधिकारी द्वारा ही जानकारी दिए जाने की बात कही।
इसी प्रकरण में काशीपुर के ही अन्य दुकानदार व आबकारी अधिकारी के बीच हुई बातचीत का एक ऑडियो वायरल हो रहा है जिसमें दुकानदार द्वारा आबकारी अधिकारी को कहा जा रहा है कि 30 लाख का घपला तो बहुत बड़ा है और अब यह बात सभी को पता चल गई है। इसमें अब तक कोई कार्यवाही क्यों नहीं की गई है। वे इस मामले में जल्द से जल्द केस दर्ज कराए अन्यथा उन पर भी गाज गिर सकती है। वहीं ऑडियो में आबकारी अधिकारी यह कहते हुए भी सुने जा रहे हैं कि उक्त अनुज्ञापी द्वारा 14 लाख रूपये जमा करा दिये गये हैं और बाकी भी जल्द जमा कराने की बात कही जा रही है।
हालांकि यह बात समझ से परे है कि जब अनुज्ञापी द्वारा चालान ही फर्जी लगाया गया है तो अब उसके खिलाफ विभाग एक्शन क्यों नहीं ले रहा है। उस पर केस दर्ज करने की बजाय उसे बचाने के लिए रूपया कैश जमा करवाया जा रहा है लेकिन फर्जीवाड़ा तो हुआ ही है। अब इस कैश को बैकडेट में दिखाने के लिए भी क्या विभाग द्वारा कोई नया खेल ख्ेाला जाएगा। जानकारी यह भी मिल रही है कि इस प्रकरण में संबंधित बैंक द्वारा काशीपुर कोतवाली में तहरीर दी गई हैै लेकिन विभाग की ओर से अब तक कोई कार्यवाही नहीं की गई है। वहीं इस बारे में जानकारी लेने के लिए काशीपुर कोतवाल को फोन किया गया तो उनका फोन उठा ही नहीं।
विचारणीय बात तो यह है कि आखिर अनुज्ञापी इस तरह से फर्जी चालान किसी की मदद के बिना कैसे बना सकता है। सवाल यह उठता है कि क्या आबकारी विभाग या बैंक के लोगों की भी इसमें मिलीभगत है। अन्यथा अब तक इस मामले को दबा की क्यों रखा गया था और अब जब मामला खुल गया है तो फर्जीवाड़ा करने वाले के खिलाफ कार्यवाही करने में जिला आबकारी अधिकारी हाथ पीछे क्यों खींच रहे हैं।
वहीं आबकारी सचिव सचिन कुर्वे की ओर से दो जून को एक पत्र सभी आबकारी आयुक्त को जारी किया गया है कि वर्ष 2020—21 में कुछ जनपदों से सम्पूर्ण देय राजस्व अघतन जमा नहीं किए जाने की बात कही गई है। जिस वजह से राजस्व की हानि हो रही है। साथ ही यह भी निर्देशित किया गया है कि आयुक्त और जनपद स्तर पर देय राजस्व के जमा होने के बारे में जांच की जाए। वहीं उल्लेखनीय बात यह है कि देहरादून, हरिद्वार और नैनीताल से अब तक बकाया जमा ही नहीं हुआ है। तो जिलों में शासन की ओर क्या कार्यवाही की जाएगी यह भी गौर करने लायक बात होगी।

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