कावड़ियों को रोकने की चुनौती

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आस्था और धार्मिक भावनाओं से जुड़ी कावड़ यात्रा को लेकर इन दिनों जो संशय की स्थिति बनी हुई है वह ठीक नहीं है। बात चाहे यूपी की हो या फिर उत्तराखंड और हरियाणा की। सभी राज्य अपना अपना अलग राग अलाप रहे हैं। उत्तराखंड राज्य सरकार द्वारा इस मसले पर अपना रुख स्पष्ट कर दिया गया है। उत्तराखंड में कांवड़ यात्रा पर रोक लगा दी गई है। सरकार के इस फैसले को सभी उचित भी मान रहे हैं। लेकिन यूपी और हरियाणा कावड़ यात्रा पर रोक लगाने को तैयार नहीं है जबकि देश की सर्वाेच्च अदालत ने इस पर सवाल उठाते हुए केंद्र और राज्य सरकारों से जवाब तलब किया है। यूपी सरकार ने अब अदालत में हलफनामा देकर इस यात्रा को सांकेतिक रखने और कॉेविड नियमों के अनुपालन का भरोसा दिलाया है। जबकि अदालत का कहना है कि जब कोरोना की तीसरी लहर के गंभीर खतरे की संभावना है तो यात्रा को रोका क्यों नहीं जा सकता है? हरियाणा और उत्तर प्रदेश अगर इस यात्रा को पूरी तरह नहीं रोकते हैं तो इसके प्रभाव से उत्तराखंड भी नहीं बच सकता है, भले ही उसने कावड़ यात्रा पर रोक लगा दी हो। क्योंकि यूपी, हरियाणा और दिल्ली से करोड़ों की संख्या में कांवड़िए जल लेने हरिद्वार और ऋषिकेश आते हैं जिन्हें सीमा पर रोक पाना संभव नहीं होगा। श्रद्धालुओं को बल प्रयोग से रोका नहीं जा सकता है और अपील का कोई असर इतनी भीड़ पर नहीं हो सकता। उत्तराखंड शासन प्रशासन अब इस स्थिति पर चिंतन मंथन जरूर कर रहा है लेकिन जिन उपायों पर चर्चा हो रही है उनसे कांवड़ियों को रोका नहीं जा सकता क्योंकि यह उपाय व्यवहारिक नहीं है। उत्तराखंड सरकार अपनी सीमा में घुसने वाले कांवड़ियों पर अगर मुकदमे दर्ज करेगी तो इनकी संख्या लाखों में होगी और अगर इन्हें क्वारंटाइन करेगी तो इन लाखों कावड़ियों को रखा कहां जाएगा और इनके खानपान की व्यवस्था कैसी होगी। सामान्य तौर पर तीन से चार करोड़ कावड़िए इस यात्रा में आते हैं अभी यह मान भी लिया जाए कि इनकी संख्या को सीमित रखा जाएगा और यात्रा सांकेतिक होगी तो भी तीन चार लाख से कम तो नहीं हो सकती है क्या इतनी बड़ी भीड़ से कोविड नियमों का पालन कराया जाना संभव है? भले ही उत्तर प्रदेश सरकार अपने हलफनामे में सीमित संख्या और सांकेतिक यात्रा की बात कह रही हो और नियमों के पालन का हवाला दिया जा रहा हो लेकिन सच यही है कि यह बातें सिर्फ हलफनामे तक ही सच है व्यवहारिक नहीं है। अच्छा तो यही है कि सभी राज्यों में फिलहाल इस यात्रा पर रोक लगा दी जाए। जहां तक बात उत्तराखंड की है तो सरकार को यूपी दिल्ली और हरियाणा की सरकारों व अधिकारियों से इस मुद्दे पर साफ—साफ बात करनी चाहिए कि वह अपने प्रदेश के कावड़ यात्रियों को उत्तराखंड आने से रोके और इन कांवड़ियों की यात्रा का दायरा उनके प्रदेश में तक ही सीमित रहें।

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