—तुम मुझे यूं भुला न पाओगे—

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लता दी नहीं रही, मृत्यु जीवन का अटल सत्य है और जीवन एक सफर भर है, जीवन का मतलब भले ही आना जाना भर ही क्यों न सही लेकिन इस जीवन से एक उम्र को कैसे चुराया जा सकता है लता दी इसकी एक अद्भुत मिसाल है। जीवन भर लोग जीवन का मतलब तलाशने में लगे रहते हैं। उन्हें लगता है कि जैसे सब कुछ उनके ही हाथ में है और वही काल के नियंता और नियंत्रक भी हैं जबकि यथार्थ यही है कि हम सब काल के नियंत्रण में हैं। हमारा खुद का नियंत्रण भी हमारे हाथ में नहीं होता है। महज 13 साल की अल्पायु में पिता का साया सर से उठ जाने के बाद पारिवारिक जिम्मेदारियों का बोझ उठाने वाली लता दी का जीवन, संघर्ष के साथ शुरू हुआ वह सफर किसी के लिए भी आसान नहीं हो सकता है। लता दी के लिए आसान नहीं था। उस दौर में किसी की आवाज धनोपार्जन और आजीविका का इतना बेहतर जरिया बन सकता है, अकल्पनीय ही था। संगीत के 60 साल के लंबे सफर ने न सिर्फ उन्हें भारत रत्न और स्वर साम्रागी बना दिया बल्कि उनकी मर्म स्पर्शी आवाज ने देश ही नहीं बल्कि पूरे विश्व की ह्रदय साम्रागी बना दिया। 36 भाषाएं और 25 हजार से अधिक गीत गाने वाली लता दी ने सिर्फ इन गीतों को गाया नहीं है बल्कि इन गीतों को जिया भी है। लता दी की गायकी की कोई दूसरी मिसाल न है न होगी, जिसका कारण है उनकी संवेदनशीलता। उन्होंने जितने भी गाने गाए वह कंठ की मधुरता और हृदय की गहराइयों से गाए हैं। संगीत के सभी रसों को महसूस करने की जो अद्वितीय कला लता दी के पास थी उस पर उनका हमेशा ही एकाधिकार रहा। उनके समकालीन गायक—गायिकांए उनकी इस अद्भुत कला के आसपास भी नहीं दिखाई देते हैं। लता दी ने जो भी गाया वह अमर हो गया। उनके किसी एक गीत की बात तो की ही नहीं जा सकती है न उन्हें उसके द्वारा याद किया जा सकता है। गीतों का एक अनंत आकाश है जिस पर हजारों तारों की तरह वह झिलमिलाती रहेगी। भले ही उनकी आवाज एक थी जो उनकी पहचान थी लेकिन उनकी इस आवाज की पहचान को समय भी नहीं मिटा पाएगा। युगों—युगों तक लोग उनकी जादुई आवाज के आकर्षण को भुलाये भी नहीं भूल सकेंगे। उनके यू हमारे बीच से चले जाने पर न सिर्फ करोड़ों—करोड़ हिंदुस्तानियों की आंखें नम हैं बल्कि पूरा विश्व उन्हें अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि दे रहा है। लोग स्तब्ध हैं उनके पास शब्द नहीं है सिर्फ भाव है और वह भावनाओं के पुष्प उन्हें श्रद्धा स्वरूप समर्पित कर रहे हैं। ईश्वर लता दी की पुण्य आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान दे। ओम शांति ओम।

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