August 18, 2026हरिद्वार। धनौरी क्षेत्र में बावनदर्रा पुल के बीचोंबीच एक विशालकाय मगरमच्छ के सड़क पर आ जाने से राहगीरों में हड़कंप मच गया। सड़क पर मगरमच्छ को देखकर राहगीरों के होश उड़ गए। इस दौरान किसी राहगीर ने मगरमच्छ का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।पिरान कलियर में दरगाह साबिर पाक का सालाना उर्स चल रहा है। उर्स में शामिल होने के लिए देश के कोने—कोने से जायरीन दिन—रात पिरान कलियर पहुंच रहे हैं। ऐसे में व्यस्त मार्ग पर विशालकाय मगरमच्छ के आ जाने से किसी बड़ी दुर्घटना की आशंका बनी हुई है। स्थानीय लोगों के अनुसार, मेहवड़ और धनौरी के बीच पुरानी गंगनहर से कई बार मगरमच्छ बाहर निकलकर सड़क तक पहुंच जाते हैं। इससे राहगीरों और वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। रात के समय सड़क पर मगरमच्छ दिखाई न देने से हादसे का खतरा और बढ़ जाता है। उर्स के चलते इस मार्ग पर जायरीनों और वाहनों की आवाजाही लगातार बढ़ी हुई है। ऐसे में लोगों ने वन विभाग से सड़क और आबादी के आसपास दिखाई देने वाले मगरमच्छों को सुरक्षित तरीके से पकड़कर गंगनहर से दूर सुरक्षित स्थान पर छोड़ने की मांग की है। लोगों का कहना है कि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो उर्स के दौरान किसी जायरीन के साथ गंभीर हादसा हो सकता है। स्थानीय लोगों ने वन विभाग से गश्त बढ़ाने और मगरमच्छों की आवाजाही वाले संवेदनशील स्थानों को चिह्नित कर प्रभावी कार्रवाई करने की मांग की है।
August 18, 2026हरिद्वार। नहर किनारे गला कटा हुआ शव मिलने से क्षेत्र में हड़कंप मच गया। सूचना मिलने पर पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर मृतक की शिनाख्त के प्रयास शुरू कर दिये है।मामला मंगलौर कोतवाली क्षेत्र का है। यहंा नहर किनारे एक व्यक्ति का गला कटा शव बरामद होने से क्षेत्र में सनसनी फैल गई। सूचना मिलते ही मंगलौर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर अग्रिम कार्यवाही शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि मृतक की पहचान नहीं हो पायी है जिसकी शिनाख्त के प्रयास पुलिस ने शुरू कर दिये है। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने आसपास के क्षेत्र में भी जानकारी जुटाई तथा घटनास्थल से साक्ष्य एकत्र किए। जानकारी मिलने पर एसपी देहात शेखर चंद सुयाल भी मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण कर पुलिस अधिकारियों से मामले की जानकारी ली। उन्होंने पुलिस टीम को घटना के सभी पहलुओं की गहनता से जांच करने के निर्देश दिए। एसपी देहात ने बताया कि फिलहाल शव की शिनाख्त के प्रयास किए जा रहे हैं। पुलिस मामले की जांच में जुटी है और जल्द ही घटना का खुलासा किया जाएगा। घटना को लेकर पुलिस आसपास के लोगों से भी पूछताछ कर रही है।
August 18, 2026पौड़ी। सतपुली तहसील में भारी बारिश के कारण एक बड़ा हादसा हो गया। द्वारीखाल ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले ग्राम मेहरगांव (भलगांव) में एक मकान पर भारी मात्रा में मलबा गिरने से पूरा मकान धराशाई हो गया। मलबे में चार लोगों के दबे होने की सूचना मिलते ही प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीम सक्रिय हो गई है।स्थानीय निवासियों के अनुसार, रात भर की लगातार बारिश के बाद सुबह के समय पहाड़ी ढलान से बड़ी मात्रा में मिटृी, पत्थर और मलबा फिसलकर मकान पर आ गिरा। जिस कारण मकान पूरी तरह ढह गया और उसके नीचे रहने वाले लोग मलबे में दब गए। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, इस मकान में एक मैक्स चालक अपने परिवार के साथ रहता था। घटना की खबर फैलते ही आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और मलबा हटाने का काम शुरू कर दिया। सतपुली और लैंसडौन से एसडीआरएफ की टीम तथा प्रशासनिक अधिकारी तुरंत मौके के लिए रवाना हो गए हैं। रेस्क्यू ऑपरेशन चल रहा है और मलबे में दबे लोगों को सुरक्षित निकालने की कोशिशें जारी हैं। मौसम विभाग के अनुसार क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से भारी से बहुत भारी बारिश हो रही है, जिससे कई जगहों पर भूस्खलन और मकानों के क्षतिग्रस्त होने की घटनाएं सामने आ रही हैं।जिला प्रशासन ने सतपुली तहसील के संवेदनशील क्षेत्रों में अलर्ट जारी कर रखा है। एसडीआरएफ, स्थानीय पुलिस और राजस्व विभाग की टीमें प्रभावित इलाकों में तैनात हैं। अधिकारियों ने बताया कि बारिश जारी रहने की संभावना को देखते हुए लोगों से अनुरोध किया गया है कि वे असुरक्षित स्थानों से सुरक्षित जगहों पर चले जाएं। पहाड़ी ढलानों के पास बने मकानों में रहने वाले परिवारों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। एसडीआरएफ टीम के पहुंचने के बाद मलबा हटाने का काम मशीनरी और मानव बल दोनों से किया जा रहा है। घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया जाएगा। प्रशासन प्रभावित परिवार को राहत सामग्री और मुआवजे की प्रक्रिया भी शुरू करने वाला है।
August 18, 2026राजनीति में विरोधी को नाम देना पुरानी परंपरा है। कभी कोई देशद्रोही कहलाता है, कभी अराजकतावादी, कभी टुकड़े-टुकड़े गैंग और कभी किसी नए विशेषण से संबोधित किया जाता है। लेकिन लोकतंत्र की विडंबना तब सामने आती है, जब सत्ता की ओर से दिया गया कोई तंज विरोधियों के लिए ही पहचान और प्रतिरोध का प्रतीक बन जाए। दिमागी नक्सल भी अब इसी बहस का हिस्सा बनता दिखाई दे रहा है। प्रधानमंत्री के तंज के बाद इस शब्द को राजनीतिक पहचान के रूप में इस्तेमाल किए जाने और बड़ी संख्या में लोगों के इससे जुड़ने के दावे ने एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा किया है क्या राजनीतिक विरोधियों को दिए गए विशेषण अब उनके खिलाफ नहीं, बल्कि उनके पक्ष में काम करने लगे हैं? यह केवल किसी नए राजनीतिक समूह के गठन का मामला नहीं है। इसके पीछे भारतीय राजनीति की बदलती भाषा और सोशल मीडिया के दौर में बन रहे नए राजनीतिक व्यवहार को समझने की जरूरत है। सत्ता जब किसी विरोधी विचार को खारिज करने के लिए एक कठोर विशेषण इस्तेमाल करती है तो वह शायद तत्काल राजनीतिक हमला समझती है। लेकिन सोशल मीडिया की दुनिया में शब्दों की यात्रा सत्ता के नियंत्रण में नहीं रहती। वही शब्द मीम बनता है, अभियान बनता है और कभी-कभी राजनीतिक पहचान का हिस्सा भी बन जाता है। यही इस पूरे घटनाक्रम की सबसे दिलचस्प बात है। लोकतंत्र का मूल स्वभाव ही असहमति है। सरकार की नीतियों पर सवाल करना, बेरोजगारी पर आवाज उठाना, महंगाई पर बहस करना, शिक्षा और स्वास्थ्य की बदहाली पर सवाल पूछना या किसी कानून का विरोध करना नागरिक जीवन का हिस्सा है। इन सवालों के जवाब तर्क और तथ्यों से दिए जाने चाहिए। यदि हर आलोचक को किसी खतरनाक राजनीतिक खांचे में डाल दिया जाएगा तो लोकतांत्रिक संवाद की जगह आरोपों की राजनीति ले लेगी। फिर मुद्दा यह नहीं रहेगा कि सवाल सही है या गलत। मुद्दा यह बन जाएगा कि सवाल पूछने वाला किस खेमे में है। यही स्थिति लोकतंत्र के लिए सबसे अधिक चिंताजनक है। दिमागी नक्सल नाम से सामने आए राजनीतिक प्रयोग को केवल मजाक या सोशल मीडिया की सनसनी मानकर खारिज करना भी जल्दबाजी होगी। क्योंकि जनता किसी राजनीतिक पहचान से क्यों जुड़ती है, यह सवाल ज्यादा महत्वपूर्ण है। अगर बड़ी संख्या में लोग सचमुच इससे जुड़ रहे हैं तो मुख्यधारा की पार्टियों को यह समझना होगा कि जनता के भीतर किसी तरह की राजनीतिक बेचौनी मौजूद है। लेकिन यहां एक दूसरी कसौटी भी है। किसी तंज को अपना नाम बना लेना आसान है, राजनीति करना कठिन। सोशल मीडिया पर समर्थन और चुनावी मैदान में समर्थन एक चीज नहीं है। चुनाव संगठन, उम्मीदवार, बूथ और स्थानीय मुद्दों के दम पर जीता जाता है। इसलिए इस नए प्रयोग की असली परीक्षा तभी होगी जब यह नाम से आगे बढ़कर नीति और कार्यक्रम की बात करेगा। आज भारतीय राजनीति को सबसे ज्यादा जरूरत भाषा में संयम और बहस में गंभीरता की है। राजनीतिक विरोधी दुश्मन नहीं होते। सत्ता बदलना लोकतंत्र की सामान्य प्रक्रिया है। आज जो सत्ता में है, कल विपक्ष में हो सकता है। इसलिए ऐसे विशेषणों की राजनीति अंततः किसी एक दल को नहीं, पूरी राजनीतिक संस्कृति को नुकसान पहुंचाती है। लोकतंत्र में किसी व्यक्ति को यह साबित करने की जरूरत नहीं होनी चाहिए कि वह सवाल पूछने के कारण राष्ट्रविरोधी नहीं है। सवाल पूछना नागरिक अधिकार है और सत्ता से जवाब मांगना लोकतंत्र की आत्मा। दिमागी नक्सल जैसा शब्द अगर अब राजनीतिक पहचान बन रहा है तो इसे केवल विरोधियों की चाल कहकर खारिज करने के बजाय सत्ता और विपक्ष दोनों को इससे पैदा हुए संदेश को पढ़ना चाहिए। क्योंकि लोकतंत्र में सबसे खतरनाक चीज असहमति नहीं, असहमति से डर है। तंज से राजनीति चमक सकती है, लेकिन लोकतंत्र मजबूत नहीं होता। लोकतंत्र तब मजबूत होता है जब सत्ता अपने आलोचक की आवाज सुनती है और आलोचक सत्ता के सामने तथ्य के साथ खड़ा होता है। इसलिए जरूरत किसी नए विशेषण की नहीं, एक ऐसी राजनीतिक भाषा की है जिसमें सवाल का जवाब सवाल से नहीं, तर्क से दिया जाए। यही लोकतंत्र की असली परीक्षा है।
August 18, 2026नैनीताल। वनभूलपुरा क्षेत्र में दर्दनाक हादसे ने एक परिवार की खुशियां पलभर में मातम में बदल दीं। एसी ठीक करते समय करंट की चपेट में आए 44 वर्षीय पिता को बचाने पहुंची उनकी 12 वर्षीय बेटी भी करंट की चपेट में आ गई। हादसे में पिता—पुत्री दोनों की मौत हो गई।जानकारी के अनुसार 44 वर्षीय नदीम कार के गैराज में काम करते थे। सोमवार रात वह घर की छत पर एसी में आई तकनीकी खराबी को ठीक करने पहुंचे थे। इसी दौरान वह अचानक करंट की चपेट में आ गए। नदीम की चीख सुनकर परिवार में अफरा—तफरी मच गई। पिता को करंट से जूझता देख उनकी 12 वर्षीय बेटी अलिस्बा उन्हें बचाने के लिए दौड़ी। बताया जा रहा है कि पिता को हाथ लगाते ही अलिस्बा भी बिजली की चपेट में आ गई। परिजनों और आसपास के लोगों ने तत्काल बिजली की आपूर्ति बंद कराई और दोनों को गंभीर हालत में डॉ. सुशीला तिवारी अस्पताल पहुंचाया। यहां चिकित्सकों ने जांच के बाद पिता—पुत्री दोनों को मृत घोषित कर दिया। हादसे की सूचना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी में रखवा दिया। वनभूलपुरा कोतवाल दिनेश फर्त्याल के अनुसार, पोस्टमार्टम कराया जाएगा। प्रारंभिक जानकारी में पास स्थित खुले बिजली के पोल से करंट फैलने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि हादसे की वास्तविक वजह क्या थी, इसकी जांच की जा रही है। बताया जा रहा है कि अलिस्बा तीन बहनों में सबसे बड़ी थी और गुरु तेग बहादुर स्कूल में कक्षा छह की छात्रा थी। जिस उम्र में उसके हाथों में किताबें और स्कूल बैग होने चाहिए थे, उसी उम्र में पिता को बचाने की कोशिश करते हुए उसकी भी जान चली गई।
August 18, 2026हरिद्वार। साबिर पाक के सालाना उर्स के बीच बीती रात दरगाह पहाड़ी गेट के पास अजमेरी बाजार में ज्वेलरी की दुकानों में संदिग्ध परिस्थितियों में आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया और बाजार में अफरातफरी मच गई। आग की लपटें उठती देख स्थानीय लोग मौके पर जुट गए और पुलिस के साथ मिलकर आग पर काबू पाने का प्रयास शुरू कर दिया।बताया जा रहा है कि आग लगने के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने तत्काल पुलिस को सूचना दी, लेकिन करीब 20 मिनट तक दमकल की टीम मौके पर नहीं पहुंच सकी। इस दौरान आग तेजी से फैलती रही, जिससे आसपास की दुकानों में भी आग लगने का खतरा पैदा हो गया। स्थानीय लोगों ने पानी और उपलब्ध संसाधनों के सहारे आग बुझाने का प्रयास किया। उर्स के चलते कलियर में इन दिनों जायरीनों की भारी भीड़ है। ऐसे में बाजार के बीच दुकानों में आग लगने से मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई और कुछ देर के लिए अफरातफरी का माहौल बन गया। सूचना मिलते ही कोतवाली प्रभारी निरीक्षक कमल मोहन भंडारी पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति को संभाला। करीब 20 मिनट बाद दमकल की टीम मौके पर पहुंची, जिसके बाद आग पर काबू पाने की कार्रवाई तेज की गई। आग लगने के कारणों और दुकानों में हुए नुकसान का अभी स्पष्ट पता नहीं चल सका है। आग किस वजह से लगी, यह जांच के बाद ही साफ हो सकेगा। साबिर पाक के सालाना उर्स के चलते कलियर में देशभर से बड़ी संख्या में जायरीन पहुंच रहे हैं। ऐसे संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले समय में मुख्य बाजार में आग लगने तथा दमकल की टीम के पहुंचने में देरी को लेकर सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।