आरटीआई लाने का उद्देश्य सरकारी कार्यालयों में पार्दशिता लाना था:पुनेठा

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देहरादून। मुख्य सूचना आयुक्त उत्तराखण्ड अनिल चन्द्र पुनेठा ने कहा कि सूचना अधिकार अधिनियम को लाने के लिए बहुत संघर्ष हुआ है सूचना अधिकार अधिनियम को लाने का उद्देशीय शासकीय कार्यालयों में पार्दशिता लाना है।
आज यहां डा. आर.एस. टोलिया, उत्तराखण्ड, प्रशासन अकादमी, नैनीताल के सौजन्य से जनपद देहरादून के दून लाइब्रेरी सभागार हॉल में जनपद के विभिन्न विभागीय अधिकारियों को विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। प्रशिक्षण कार्यक्रम के तीसरे दिवस में सूचना अधिकार अधिनियम 2005 के संदर्भ में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में सुबह के सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग कर रहे मुख्य सूचना आयुक्त उत्तराखण्ड अनिल चन्द्र पुनेठा ने दीप प्रज्वलित कर प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। उन्होंने अपने सम्बोधन में सूचना अधिकार अधिनियम के अन्तर्गत कार्मिकों एवं लोक सूचना अधिकारियों/प्रथम अपीलीय अधिकारियों की भूमिका/दायित्वों पर विशेष प्रकाश डाला। मुख्य सूचना आयुक्त उत्तराखण्ड अनिल चन्द्र पुनेठा ने कहा कि सूचना अधिकार अधिनियम को लाने के लिए बहुत संघर्ष हुआ है सूचना अधिकार अधिनियम को लाने का उद्देशीय शासकीय कार्यालयों में पार्दशिता लाना है उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था को लाने के लिए वर्ष 1980—90 से संघर्ष/आन्दोलन हुए इसमें सेवानिवृत्त अधिकारियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अपनी अहम भूमिका निभाई, जिसके फलस्वरूप वर्ष 2005 में यह अधिनियम लागू हुआ है। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि विश्व के लगभग 50 से अधिक देशों में इस प्रकार की व्यवस्था है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों/कार्मिकों से अवार्ड—रिवार्ड के लिए नहीं बल्कि निर्भीक होकर पारदर्शी व्यवस्था बनाने हेतु कार्य करने का आह्वाहन किया जिससे आम जनमानस को लाभ मिल सकें। उन्होंने कहा कि शासकीय कार्यालयों में इस प्रकार की व्यवस्था बनें जिससे अभिलेखों में छेड़छाड़ की संभावना न रहे। उन्होंने कहा कि सूचना अधिकार अधिनियम के अन्तर्गत प्राप्त हो रहे आवेदनों को ध्यान से पढ़कर बिन्दुवार स्पष्ट उत्तर देने पर अधिकतर प्रकरण लोक सूचना अधिकारी स्तर पर ही निस्तारित हो जाते है। उन्होंने डॉ. आर.एस. टोलिया, उत्तराखण्ड, प्रशासन अकादमी, नैनीताल का इस प्रकार के प्रशिक्षण आयोजित करने हेतु आभार व्यत्तQ किया। उन्होंने बताया कि कोरोना काल में सुनवाई बाधित रहने तथा ऑनलाईन सुनवाई में शिकायतकर्ता के न जुड़ पाने के कारण कुछ प्रकरण लम्बित हुए। वर्तमान में लगातार सुनवाई की जा रही है। 4000 लम्बित प्रकरणों में से 2200 प्रकरण निस्तारित किये गए हैं, तथा शेष पर निरन्तर सुनवाई गतिमान है। कार्यक्रम में उत्तराखण्ड, प्रशासन अकादमी, नैनीताल से प्रशिक्षक के रूप में डॉ0 मंजु ढांैडियाल, विशेष कार्याधिकारी व सुश्री पूनम पाठक, उप निदेशक, द्वारा प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षण के दौरान विभागीय अधिकारियों को कार्यस्थल में महिलाओं की सुरक्षा एवं अधिनियम के अन्तर्गत गठित विभिन्न समितियों के गठन कार्यकरण के विषय में विस्तार से जानकारी दी गयी।

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