भाजपा पर भारी पड़ रहे हैं भर्ती घोटाले और लाठीचार्ज

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युवाओं पर लाठीचार्ज की जांच होनी चाहिएः तीरथ

नकल विरोधी कानून का प्रचार भी बेअसर
खुद भाजपा नेता भी सरकार से सहमत नहीं
धन्यवाद, आभार व संवाद रैलियां प्रायोजित

देहरादून। भर्ती घोटालों के भंवरजाल में फंसी सूबे की भाजपा सरकार ने भले ही इन दिनों अपनी पूरी ताकत इस मामले को रफा—दफा करने और युवाओं तथा छात्रों का विश्वास जीतने में झोंक रखी हो लेकिन छात्रों पर हुए लाठीचार्ज और अपनी ही पार्टी के नेताओं की बयानबाजी ने सरकार को संासत में डाला हुआ है। जिसके कारण सरकार की छवि दिनों दिन खराब होती जा रही है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इन दिनों ताबड़तोड़ प्रदेश के दौरे कर रहे हैं आज धामी ऋषिकेश में हैं जहां वह भाजपा युवा मोर्चा की नकल विरोधी कानून के समर्थन में निकाली गई धन्यवाद रैली को हरी झंडी दिखाते हुए देखे गए। अभी उनके चंपावत दौरे के दौरान भी ऐसी एक आभार रैली का आयोजन भाजपाइयों ने किया था। आगामी 1 मार्च को पौड़ी में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी युवा संवाद रैली में भाग लेने वाले हैं। मुख्यमंत्री प्रदेश भर में घूम—घूम कर यह प्रचार करने में जुटे हैं कि वह नकल माफिया पर कार्रवाई तो कर रही रहे हैं साथ ही नकल विरोधी कानून बनाकर युवाओं का भविष्य सुधारने में लगे हुए हैं।
वहीं दूसरी तरफ भर्ती घोटाले की सीबीआई जांच की मांग कर रहे छात्रों पर किया गया पुलिस लाठी चार्ज और उसके बाद भाजपा के शीर्ष नेताओं की प्रतिक्रियाओं ने उनका सारा खेल बिगाड़ कर रख दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने कल पौड़ी में जो कहा उससे भाजपा के नेताओं का असहज होना स्वाभाविक है। तीरथ रावत का कहना है कि छात्रों पर हुए लाठीचार्ज की जांच होनी चाहिए। पूर्व सीएम का यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अब तक शासन—प्रशासन में बैठे लोगों द्वारा जितनी भी बातें कही गई है वह कतई भी तर्कसंगत नहीं है। अगर शासन प्रशासन में बैठे लोग यह कहते हैं कि पुलिस पर पत्थरबाजी करने वाले छात्र नहीं थे अराजक तत्व थे तब फिर पुलिस द्वारा छात्रों पर मुकदमे क्यों किए गए क्यों उन्हें जेल भेजा गया। पुलिस अगर यह मानती है पत्थरबाजी अराजक तत्वों द्वारा की गई है तो फिर आज तक पुलिस उन अराजक तत्वों की पहचान क्यों नहीं कर सकी है और क्यों यह अराजक तत्व अब तक पुलिस द्वारा गिरफ्तार नहीं किए जा सके हैं। यही नहीं पत्थरबाज कहे या छात्र कहे उन्हें बाहर से फंडिंग होने की बात तो कही जाती है लेकिन इसके सबूत किसी के पास नहीं है। ऐसे में अगर पूर्व सीएम तीरथ सिंह रावत इस पूरे घटनाक्रम की जांच की मांग करते हैं तो इससे सत्ता में बैठे लोग परेशान क्यों हैं? पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत तो पहले ही इस लाठीचार्ज की घटना की निंदा कर चुके हैं और माफी मांग चुके हैं।
भाजपा के नेताओं को इस बात का पता है कि भर्ती घोटालों और लाठीचार्ज की घटना को लेकर सूबे के युवाओं की नाराजगी आने वाले समय में भाजपा पर कितनी भारी पड़ सकती है। धामी के प्रयासों का भी युवाओं पर कोई असर होता नहीं दिख रहा है वह इन आभार रैलियों और धन्यवाद तथा संवाद रैलियों को भी भाजपा के प्रायोजित कार्यक्रम ही मान रहे हैं।

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