केंद्र की भाजपा सरकार ने अभी—अभी जो संसद का विशेष सत्र बुलाया था जिसमें उसके द्वारा महिलाओं को राज्यों की विधानसभाओं वी लोकसभा में 33 फीसदी आरक्षण के लिए 3 साल पहले पारित हुए नारी वंदन बिल में संशोधन के साथ दो और बिल शामिल किए गए थे जो पास नहीं हो सके तथा इन्हें लेकर सरकार की भारी फजीहत हो रही है। और भाजपा तथा कांग्रेस इस मुद्दे पर एक दूसरे के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं इसका असर अब उत्तराखंड की राजनीति पर भी साफ दिखने लगा है। धामी सरकार द्वारा 28 अप्रैल को विशेष सत्र बुलाया जाना और इससे पूर्व कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेश का देहरादून आना तथा विधानसभा भवन के बाहर कांग्रेसियों का विरोध प्रदर्शन किया जाना इस बात के साथ संकेत है कि इस मुद्दे पर न सिर्फ इस विशेष सत्र में पक्ष विपक्ष के बीच सीधेंं सीधे दो—दो हाथ होने वाले हैं अपितु अब महिलाओं के आरक्षण और महिलाओं के सम्मान का यह मुद्दा 2027 के विधानसभा चुनाव में भी सबसे अधिक प्रभावी मुद्दा होने जा रहा है। कांग्रेस के नेताओं के तेवर इस मुद्दे को लेकर कितने तल्ख है इसका अंदाजा श्रीनेत्र के आरोपों से तो लगया ही जा सकता है लेकिन इस प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस की महिला नेत्रियों द्वारा अंकिता भंडारी हत्याकांड से लेकर हरिद्वार की उसे भाजपा नेत्री जिसके द्वारा अपनी ही नाबालिक बेटी को अपने राजनीतिक फायदे के लिए नेताओं को परोसे जाने का मुद्दा उठाते हुए भाजपा नेताओं के चाल चरित्र की धज्जियां उड़ा दी गई। उनका कहना है कि भाजपा के नेता किस मुंह से महिलाओं के सम्मान की बात करते हैं। दुष्यंत गौतम जैसे लोगों को मालाये पहनाकर उनका स्वागत करने वाले भाजपा नेताओं को शर्म आनी चाहिए। जहां तक बात महिलाओं को33 फीसदी आरक्षण की बात है तो अब प्रदेश कांग्रेस के नेता सहकारिता में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने की तरह सरकार से मांग कर रहे हैं कि उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव से पूर्व महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने की व्यवस्था लागू करें। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि वह विशेष सत्र में इसकी मांग करेंगे। उधर अभी तक भाजपा ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि उसके द्वारा इस विशेष सत्र को बुलाये जाने का प्रयोजन क्या है? लेकिन भाजपा नेताओं की बयान बजियो से यह साफ जाहिर हो रहा है कि प्रदेश की सरकार केंद्रीय नेताओं के एजेंडें को ही आगे बढ़ाने के लिए विशेष सत्र बुला रही है। माना जा रहा है कि विपक्ष द्वारा संसद में गिराए गए मोदी सरकार के बिलों पर वह विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाना चाहती हैा हो और केंद्रीय नेताओं की तरह हीं कांग्रेस को इसके लिए जिम्मेदार ठहराने का प्रयास करने वाली हो भाजपा ने केंद्र के निर्देश पर देश भर में जो विरोध प्रदर्शन का अभियान छेड़ा हुआ है उससे तो यही आभास हो रहा है कि भाजपा की धामी सरकार से इस बात की उम्मीद तो की नहीं जा सकती है कि वह वैसा कुछ कर सकती है जैसा कि कांग्रेस नेताओं द्वारा मांग की जा रही है लेकिन कांग्रेस और भाजपा के नेता इस मुद्दे पर एक दूसरे को कटघरे में खड़ा करने के लिए तमाम दांव पेच आजमा रहे हैं। श्रीनेत्र ने साफ कहा है कि हमारी मांग है कि अगर भाजपा की नियत में कोई खोट नहीं है तो तत्काल संसद में 181 सीटों पर महिलाओं को आरक्षण देने की व्यवस्था लागू करें क्योंकि वर्तमान में लोकसभा की कुल 543 सीटे हैं। हम उसका समर्थन करेंगे लेकिन भाजपा की मशंा आरक्षण देने की है ही नहीं वह तो परिसीमन की आड़ में अपने राजनीतिक लाभ के लिए आरक्षण को लटकाए रखना चाहती है। हम सबको यही सच देश की महिलाओं को बताना है।




