सिसोदिया की गिरफ्तारी पर सवाल

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बाबा तुलसीदास ने रामायण में लिखा है ट्टसमरथ को नहिं दोष गुसाईं’ इसमें कोई संदेह किसी को नहीं हो सकता। जो सामर्थ्यवान है उसे कोई दोषी नहीं ठहरा सकता दोष शब्द सिर्फ कमजोर और निस्सहाय लोगों के लिए बना है। जिनके पास सत्ता बल है, बाहुबल है और धनबल है उनके लिए न कोई कानून मायने रखता है न सविधान। बीते कल आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली सरकार के वित्त मंत्री मनीष सिसोदिया को सीबीआई द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया। इस गिरफ्तारी की संभावनाएं लंबे समय से नजर आ रही थी। शराब नीति को ताक पर रखकर उनके द्वारा मनमाने तरीके से शराब बिकवाने और करोड़ों का घोटाला करने के आरोप है। सीबीआई इससे पूर्व न सिर्फ उनसे कई बार पूछताछ भी कर चुकी है बल्कि उनके घर दफ्तर पर छापेमारी के साथ उनके बैंक खाते व बैंक लॉकर तक खंगाल चुकी है लेकिन सीबीआई के हाथ कुछ नहीं लग सका अब सीबीआई ने उनकी गिरफ्तारी के लिए एक बड़े अधिकारी को मोहरा बनाया है जो मनीष सिसोदिया के खिलाफ तमाम आरोप लगा रहा है। उक्त अधिकारी के द्वारा दी गई जानकारियां कितनी सच है अथवा मनीष सिसोदिया ने कितना बड़ा भ्रष्टाचार किया है या नहीं किया है हम इसकी पुष्टि नहीं कर सकते लेकिन एक बात जरूर साफ है कि अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी ने न सिर्फ दिल्ली विधानसभा अपितु एमसीडी के चुनावों में भी जिस तरह से भाजपा को धूल चटाई है उसे लेकर भाजपा की बौखलाहट किसी से भी छिपी नहीं है। पंजाब में सत्ता पर काबिज होने के बाद जिस तरह आम आदमी पार्टी ने गुजरात तक भाजपा के सामने चुनौती पेश की है उससे यह साफ हो चुका है कि भले ही कांग्रेस कहीं भाजपा को टक्कर दे पाए या न दे पाए लेकिन आम आदमी पार्टी भाजपा के लिए बड़ी मुसीबत बनने की ओर अग्रसर है। यही नहीं भाजपा के नेता भले ही आम आदमी पार्टी पर सौ सवाल खड़े कर रहे हो। दिल्ली और पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकारों द्वारा जिस तरह से काम किया जा रहा है वह जनता के दिलों दिमाग पर छाता जा रहा है। मनीष सिसोदिया ने दिल्ली के सरकारी स्कूलों का हुलिया इस कदर बदल दिया है कि वह अब किसी अच्छे पब्लिक स्कूल से कम नहीं रह गए हैं। आम आदमी पार्टी ने थोड़े से समय में दिल्ली की स्थिति में अनेक क्षेत्रों में बड़े सुधार किए हैं यही कारण है कि दिल्ली की जनता ने आम आदमी पार्टी को एमसीडी की सत्ता भी सांप दी जिसे भाजपा और उसके नेता पचा नहीं पा रहे हैं और आपको कमजोर करने के लिए सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल कर रहे हैं। भले ही यह सर्व विदित सत्य है कि केंद्रीय जांच एजेंसिंया केंद्र के मातहत है और उसके हितों के लिए ही काम करती हैं जिसकी केंद्र में सत्ता होती है। भले ही भाजपा के नेता आज किसी भी मामले में कानून अपना काम कर रहा है जैसी बात कहें लेकिन जब केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार थी तब यही भाजपा नेता सीबीआई को केंद्र सरकार का तोता भी बताते थे। सिसोदिया की गिरफ्तारी पर आम आदमी पार्टी के नेताओं का कहना है कि वह अडानी के मामले की सीबीआई जांच क्यों नहीं कराते जो अमीरों की रैंकिंग में पलक झपकते ही 66वें स्थान से पहले नंबर पर पहुंच गए जिसने एलआईसी निवेशकों के पैसों का नाजायज तरीके से इस्तेमाल किया। भाजपा उत्तराखंड के उन भर्ती घोटालों की जांच क्यों नहीं कराती जिन्होंने लाखों लाख बेरोजगार युवाओं का जीवन तबाह कर अपने नेताओं को करोड़पति बना दिया। सिसोदिया के भ्रष्टाचार का सच तो सामने आ ही जाएगा और उनके द्वारा कुछ गलत किया गया है तो उनको भी सत्येंद्र की तरह जेल की हवा खानी ही पड़ेगी, लेकिन केंद्रीय एजेंसियों द्वारा किसी राजनीतिक दल या नेता के खिलाफ अगर एकतरफा कार्रवाई की जाती है तो उस पर सवाल उठाने भी लाजमी है। भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की बात करने वाली भाजपा अगर यह मानती है कि उसके सभी नेता दूध के धुले हैं तो फिर इससे बड़ा झूठ कुछ नहीं हो सकता है।

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