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भविष्य से इतनी भयभीत क्यों भाजपा

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राजनीति के अखाड़े में भले ही प्रत्यक्ष रूप में चुनावी हार की कसौटी पर किसी भी राजनीतिक दल और नेता को सफल और असफल समझा जाता हो लेकिन इसके अतिरिक्त भी दलों और नेताओं के बीच साख और सम्मान के आधार पर उनकी सफलता और असफलताओं का आकलन किया जाता है? उनके चाल चरित्र और विचार धारा के अलावा उनके कामकाज को भी परखा जाता है। कौन राष्ट्रीय तथा समाज हितों को सर्वाेच्च प्राथमिकता देता है और राजहित को ही राजनीतिक सफलता मानता है देर सवेर यह बात देश के हर आदमी के समझ में आ ही जाती है। एक दशक पूर्व जब प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने देश की सत्ता संभाली थी उससे पहले से ही कांग्रेस और राहुल गांधी के साथ उनकी अदावत की राजनीतिक जंग जग जाहिर है। राहुल गांधी और उनके परिवार की हर मोर्चे पर घेराबंदी और उनकी छवि खराब करने से लेकर उनका राजनीतिक करियर खत्म करने तक का कोई भी एक ऐसा प्रयास नहीं है जो नहीं किया गया हो। उनके कांग्रेस मुक्त भारत बनाने के नारे से लेकर उनकी राष्ट्रीयता पर सवाल उठाने से लेकर उनकी संसद सदस्यता समाप्त करने और सरकारी आवास छीनने तथा उन्हें पप्पू साबित करने तक ऐसा कुछ भी नहीं छोड़ा गया जो न किया गया हो। लेकिन लगातार अपमानित किए जाने व जेल भेजने की कोशिशोंं के बीच भी राहुल गांधी न झुके न रुके। और आज नेता विपक्ष की हैसियत से संसद में प्रधानमंत्री मोदी के सामने बैठकर उनसे सवाल जवाब कर रहे हैं यह दीगर बात है कि उनके नेतृत्व में कांग्रेस कोई चुनाव जीतकर सत्ता तक पहुंचने में अब तक नाकाम रही है लेकिन आज कांग्रेस और राहुल गांधी भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए एक ऐसी चुनौती बन चुके हैं कि उनके सामने प्रधानमंत्री और उनकी सरकार को घुटने टेकने पर मजबूर होना पड़ रहा है। यही नहीं अब सरकार को वह किसी तरह की मनमानी से रोकने में भी सक्षम हो गए हैं। सरकार द्वारा 3 दिन का विशेष सत्र बुलाकर परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े इन बिलों पर संसद में सरकार को मिली पराजय इसका ताजा उदाहरण है यही नहीं अब लोकप्रियता के मापदडों में भी राहुल गांधी प्रधानमंत्री से पीछे नहीं रहे हैं। देश की सियासत में सिर्फ दो ही शख्सियत ऐसी हैं जो भाजपा और प्रधानमंत्री से लोहा लेने का साहस दिखा सकती है एक राहुल गांधी दूसरी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी। जो सरकार के सामने अब तक नहीं झुकी है। संसदीय सदस्यता छीने जाने व 2 महीने की सजा सुनाए जाने के बाद भी भाजपा खेमे के लोगों ने राहुल गांधी को यह समझाया था कि वह कोर्ट में अपनी गलती मानते हुए माफी मांग ले लेकिन राहुल ने साफ कहा था कि उन्हें जेल जाना स्वीकार है लेकिन माफी नहीं मांगेंगे। भाजपा की वर्तमान सरकार द्वारा अपने राजनीतिक प्रतिद्वंदियों को डराने धमकाने तथा झूठे केसों में उन्हें जेल की सलाखों के पीछे भेजने का काम किया जाता रहा है उसने उसकी छवि को बुरी तरह खराब कर दिया है। सीबीआई और ईडी जैसी संस्थाओं के दुरुपयोग का नया इतिहास ही वर्तमान सरकार ने नहीं लिखा है बल्कि संवैधानिक व्यवस्थाओं को अपने अनुकूल बनाने के प्रयास में वह सब कुछ किया है जो नहीं किया जाना चाहिए था यही कारण है कि अब भाजपा को सत्ता जाने का डर इतना सता रहा है कि वह अपने और पार्टी के भविष्य को लेकर हैरान परेशान है।

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