May 7, 2026देवभूमि पर ‘अपनों’ का ‘दाग’ देवभूमि में संगठन-सत्ता के बीच पिस रही है कानून-व्यवस्था उत्तराखंड में महिला अपराधों ने बढ़ाया प्रदेश में सियासी पारा सूबे में बेटियों की सुरक्षा पर बड़ा विपक्षी पूछ रहे हैं सवाल भाजपा नेताओं के नाम आने से गरमाया राजनीतिक माहौल देहरादून। उत्तराखंड में सत्ता, संगठन और कानून व्यवस्था कटघरे में है। चंपावत से लेकर हरिद्वार तक ऐसी कई घटनाएं सामने आई हैं, जिन्होंने सरकार की बेटी बचाओ के नारों पर सवाल खड़े किए हैं। प्रदेश में महिलाओं के विरु( अपराध और उनमें सत्ताधारी दल से जुड़े चेहरों की संलिप्तता ने प्रदेश के राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। अंकिता भंडारी हत्याकांड के बाद जनता के भीतर जो आक्रोश पैदा हुआ था, वह अभी पूरी तरह शांत भी नहीं हुआ कि नए मामलों ने फिर बहस छेड़ दी है।सबसे ताजा और चौंकाने वाला मामला मुख्यमंत्री के निर्वाचन क्षेत्र चंपावत से सामने आया है। यहाँ एक 10वीं की छात्रा के साथ गैंगरेप के मामले में भाजपा के एक मंडल उपाध्यक्ष, एक पूर्व प्रधान और एक छात्र पर गंभीर आरोप लगे हैं। पीड़ित एक दोस्त की मेहंदी की रस्म में गई थी, जहाँ से उसे बंधक बनाकर इस घृणित कार्य को अंजाम दिया गया। इससे पूर्व हरिद्वार में एक पूर्व भाजपा महिला मोर्चा नेत्री ने अपने ही प्रेमी और उसके साथियों को अपनी नाबालिग बेटी का यौन शोषण करने की अनुमति दी। वही अल्मोड़ा के भाजपा ब्लाक प्रमुख भगवत बोरा पर एक 14 वर्षीय किशोरी के साथ दुष्कर्म का आरोप लगा था। मामला तब बढ़ा जब आरोपी ने पीड़िता के परिवार को धमकाने की कोशिश की।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले महिला सुरक्षा एक बड़ा चुनावी मुद्दा बन सकता है। खासतौर पर पहाड़ की महिलाओं और युवाओं के बीच यह भावना मजबूत हो रही है कि राजनीति में चरित्र और जवाबदेही पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए। सवाल केवल किसी एक पार्टी या नेता का नहीं, बल्कि उस भरोसे का है जो जनता लोकतंत्र और शासन व्यवस्था पर करती है। सत्ता में बैठे लोग महिलाओं की सुरक्षा और न्याय के मुद्दे पर कितने गंभीर हैं।उत्तराखंड में पिछले कुछ समय में सत्तारूढ़ भाजपा के कुछ नेताओं और उनके करीबियों पर गंभीर आरोप लगने का क्रम जारी हैं, जिससे प्रदेश की राजनीति में उबाल है। विपक्ष इन मुद्दों को कानून-व्यवस्था की विफलता बताकर सरकार को घेर रहा है। राजनैतिक विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले विधानसभा चुनाव में इन मुद्दों की आंच से भाजपा को नुकसान भी हो सकता है। इंसाफ की सबसे लंबी लड़ाईउत्तराखंड के इतिहास में सबसे ज्यादा चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में मई 2025 में कोटद्वार कोर्ट ने मुख्य आरोपी पुलकित आर्य ;पूर्व भाजपा नेता का बेटाद्ध और उसके साथियों को दोषी करार दिया। हालांकि यह मामला हत्या का था, लेकिन इसमें स्पेशल सर्विस के नाम पर यौन उत्पीड़न के दबाव की बात सामने आई थी, जिसने पूरे राज्य को हिला कर रख दिया था।
May 7, 2026देहरादून। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि बेटी पढाओं, बेटी बचाव व नारी शक्ति वंदन भाजपा के केवल चुनावी जुमले हैं।आज यहां उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने चम्पावत में 16 वर्षीय नाबालिग युवती के साथ हथियारों की नोक पर हुई सामूहिक बलात्कार की घटना को मानवता को शर्मसार करने वाली तथा देवभूमि उत्तराखंड की अस्मिता को कलंकित करने वाली घटना करार दिया है। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता डॉ. प्रतिमा सिंह के माध्यम से जारी बयान में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि चम्पावत में सामूहिक बलात्कार की इस घृणित एवं शर्मनाक घटना से राज्य की गिरती कानून व्यवस्था, राज्य में महिलाओं के साथ लगातार बढते अपराध तथा महिला सुरक्षा के प्रति भाजपा सरकार की नाकामी उजागर हुई है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के गृह क्षेत्र चम्पावत में सामूहिक बलात्कार की इस घटना में भाजपा के पूर्व मंडल उपाध्यक्ष पूरन सिंह रावत की संलिप्तता तथा राज्य में अब तक हुई बलात्कार एवं महिला अपराध की अधिकतर घटनाओं में सत्ताधारी दल भाजपा से जुड़े लोगों का नाम सामने आने से नारी शक्ति वंदन के नाम पर भाजपा की मातृशक्ति के प्रति झूठे दिखावे की पोल खोल कर रख दी है। मामले में सत्ताधारी दल के नेताओं की संलिप्तता के कारण राज्य पुलिस पर इस घटना में भी लीपापोती का दबाव बनाया जा रहा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि राज्य में विगत 10 वर्ष के अन्तराल में महिलाओं एवं मासूमों से बलात्कार, हत्या जैसे जघन्य अपराध की घटनाओं की बाढ जैसी आई हुई है। राज्य में लगातार घट रही सामूहिक बलात्कार की घटनाएं मानवता को शर्मसार करने वाली तथा देवभूमि की अस्मिता को कलंकित करने वाली घटनाएं हैं। महिला अपराध की घटनाओं में उत्तराखण्ड राज्य सभी हिमालयी राज्यों में पहले स्थान पर पहुंच चुका है, परन्तु राज्य की धामी सरकार एवं नारी शक्ति वंदन का ढिंढोरा पीटने वाली भाजपा महिला अपराध की इन घटनाओं को रोकने की बजाय इस प्रकार के अपराध करने वालों की संरक्षक बनी हुई है। गोदियाल ने कहा कि चाहे अंकिता भंडारी हत्याकांड में वीआईपी के रूप में भाजपा नेताओं की भूमिका हो या भाजपा नेता पुत्र पुलकित आर्य की, हरिद्वार में अपनी 13 वर्षीय नाबालिग बेटी से सामूहिक दुष्कर्म कराने का मामला भाजपा महिला मोर्चा पदाधिकारी अनामिका शर्मा से जुड़ा हुआ हो या द्वाराहाट में नाबालिग दलित युवती से बलात्कार मामले में मुख्य आरोपी भाजपा नेता प्रमोद बिष्ट, रूद्रपुर में नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म मे मुख्य आरोपी भाजपा नेता नरेन्द्र गंगवार हो या बहादराबाद में दलित युवती की बलात्कार एवं हत्या कांड में मुख्य आरोपी भाजपा नेता अमित सैनी, लालकुंआ नाबालिग बलात्कार कांड में मुख्य आरोपी भाजपा नेता, नैनीताल दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ अध्यक्ष मुकेश बोरा या अल्मोड़ा में 14 वर्षीय नाबालिग से छेड़छाड कांड में मुख्य आरोपी भाजपा मंडल अध्यक्ष भगवत सिंह बोरा तथा रूद्रपुर में नाबालिग लड़की एवं उसकी मां से छेड़छाड़ मामले में मुख्य आरोपी भाजपा पार्षद शिव कुमार गंगवार हों या अब चम्पावत में सामूहिक बलात्कार की घटना में भाजपा के पूर्व मंडल उपाध्यक्ष पूरन ंिसंह रावत की। इन सभी प्रकरणों से ऐसा प्रतीत होता है कि उत्तराखंड राज्य के सत्ताधारी दल के नेताओं की नजरों में मातृशक्ति केवल उपभोग की वस्तु मात्र है तथा नारी शक्ति वंदन और बेटी बचाओ—बेटी पढ़ाओ चुनावी जुमला। डॉ. प्रतिमा सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के गृह क्षेत्र चम्पावत में नाबालिग युवती के साथ भाजपा नेता की अगुवाई में हुई सामूहिक बलात्कार की शर्मनाक घटना के विरोध में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल के निर्देश पर प्रदेशभर के जिला एवं महानगर मुख्यालयों में 8 मई 2026 को विरोध—प्रदर्शन के साथ भाजपा सरकार का पुतला दहन किया जायेगा। उन्होंने कहा कि शीघ्र ही प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में महिला अस्मिता को लेकर बड़ा आन्दोलन किया जायेगा।
May 7, 2026राजस्थान में लूट की वारदात करके पिछले 12 वर्षो से था फरार देहरादून में कर रहा था सिक्यूरिटी गार्ड की नौकरी देहरादून। राजस्थान में लूट की वारदात को अंजाम देकर पिछले 12 वर्षो से फरार चल रहे एक शातिर को एसटीएफ ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी पर 20 हजार का ईनाम है जो देहरादून में सिक्यूरिटी गार्ड की नौकरी कर रहा था।वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एसटीएफ अजय सिंह ने बताया कि बीते दिनों एसटीएफ टीम को सूचना मिली कि सिक्योरिटी एजेंसी में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करने वाला देवेश मोर्या पुत्र नन्द लाल मोर्या, निवासी 16/18 न्यू वसंत विहार, देहरादून, पर राजस्थान राज्य के बांसवाड़ा में अपहरण और लूट का मुकदमा दर्ज है। जिस पर एसटीएफ द्वारा अन्य जानकारी करने पर ज्ञात हुआ कि उक्त आरोपी घटना के बाद ही वर्ष 2014 से फरार चल रहा है एवं उस पर राजस्थान पुलिस द्वारा 20 हजार रुपये की धनराशि का इनाम घोषित किया गया है। जिसकी तलाश हेतु राजस्थान पुलिस द्वारा विगत कई वर्षों से लगातार दबिशे दी जा रही थी, परंतु उसकी गिरफ्तारी नहीं हो पा रही थी। एसटीएफ द्वारा गोपनीय इनपुट विकसित कर त्वरित कार्रवाई करते हुए बीती रात थाना कैंट क्षेत्रांतर्गत आरोपी को पकड़कर आवश्यक वैधानिक कार्यवाही के उपरांत उसे राजस्थान पुलिस के सुपुर्द किया गया।एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने बताया कि वर्ष 2014 में आरोपी देवेश मोर्या ने अपने साथी के साथ मिलकर बांसवाड़ा, राजस्थान में एक व्यक्ति को एलआईसी एजेंट के नाम से फोन कर बुलाया। इसके पश्चात रिवॉल्वर दिखाकर उसे उसी के वाहन में अपहरण कर लूट की घटना को अंजाम दिया और फरार हो गए। उक्त प्रकरण में आरोपी पर राजस्थान पुलिस द्वारा 20 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था।
May 7, 2026देहरादून। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने कहा कि टिहरी क्षेत्र को ग्लोबल डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जाये।आज यहां मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में टिहरी झील क्षेत्र को ग्लोबल डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किए जाने हेतु संबंधित विभागों के साथ बैठक ली। मुख्य सचिव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के एक राज्य एक ग्लोबल डेस्टिनेशन के तहत् टिहरी झील रिंग रोड एवं आसपास के क्षेत्र को ग्लोबल डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किए जाने के लिए एक कोम्प्रेहेंसिवे प्लान तैयार किया जाए। मुख्य सचिव ने कहा कि टिहरी स्पेशल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी पूरे क्षेत्र को ग्लोबल डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने के लिए डेस्टिनेशन मैनेजमेंट ऑर्गेनाइजेशन (डीएमओ) के रूप में काम करेगा। उन्होंने कहा कि टिहरी झील क्षेत्र को ग्लोबल डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने के लिए एक व्यापक एवं सम्पूर्ण कार्ययोजना तैयार की जाए। जिसमें टिहरी झील रिंग रोड का निर्माण, आईकोनिक ब्रिज और हरे—भरे पैदल मार्ग शामिल हों। जहां एक ओर एडवेंचर टूरिस्ट के साथ—साथ वेलनेस सेंटर्स हों तो दूसरी ओर ईको पार्क और प्राकृतिक व्यू पॉइन्ट्स हों। उन्होंने कहा कि इसमें फेजवाइज काम किया जा सकता है, परन्तु योजना एक बार में सर्म्पूण रूप से तैयार की जाए। मुख्य सचिव ने टिहरी पहुँचने के लिए एंड टू एंड कनेक्टिविटी पर भी फोकस किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने मार्गों को चौड़ीकरण एवं सौन्दर्यीकरण किए जाने की भी बात कही। उन्होंने कहा कि नए रूट्स की सम्भावनाएं भी तलाशी जाएं। उन्होंने साईट स्पेसिफिक कंस्ट्रक्शन पर जोर देते हुए पूरे क्षेत्र में ग्रीन एरिया एवं प्राकृतिक सौन्दर्यता को बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव ने परियोजना में वॉटरड्रोम और वॉटरपोर्ट को भी शामिल किए जाने की बात कही। कहा कि आइकोनिक पुलों का निर्माण एवं डिजाईन में सी—प्लेन के परियोजना को ध्यान में रखते हुए किया जाए। उन्होंने डोबराचांटी पुल के पास स्थित हेलीपैड को हेलीपोर्ट के रूप में विकसित किए जाने के भी निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव ने कहा कि इस परियोजना में कार्य करने वाली सभी संस्थाएं आपनी तालमेल के साथ कार्य करें। इस अवसर पर सचिव सचिन कुर्वे, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, धीराज गर्ब्याल, अपर सचिव विनीत कुमार एवं अभिषेक रोहिला सहित सम्बन्धित विभागों के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
May 7, 2026नैनीताल। रेलवे स्टेशन की पार्किग में खड़ी एक कार में आज सुबह एक शव मिलने पर सनसनी फैल गयी। सूचना मिलने पर पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर अग्रिम कार्यवाही शुरू कर दी है।मामला लालकुआं रेलवे स्टेशन परिसर का है। जानकारी के अनुसार यहंा पार्किग में खड़ी एक कार में आज सुबह एक युवक संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाया गया। रेलवे स्टेशन की पार्किंग मेंं शव मिलने की सूचना से यात्रियों और स्थानीय व्यापारियों में सनसनी फैल गई। सूचना मिलने पर पुलिस, राजकीय रेलवे पुलिस व रेलवे सुरक्षा बल की टीमें मौके पर पहुंचीं और मामले की छानबीन शुरू कर दी गयी। पुलिस द्वारा की गई प्रारंभिक जांच में मृतक की शिनाख्त मदन राम (आयु 42 वर्ष) निवासी ग्राम आरे जिला बागेश्वर के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि मदन राम वर्तमान में हल्द्वानी के दमुवाढूंगा क्षेत्र में निवास कर रहा था और पेशे से टैक्सी चालक था। मृतक के परिवार में दो पुत्रियां और एक पुत्र हैं, जो इस घटना के बाद से गहरे दुःख में और स्तब्ध हैं।
May 7, 2026उत्तराखंड के पहाड़ों की परंपरा का अनोखा और अटूट रिश्ता बेटी ससुराल जाती है ‘ध्याण’ बनकर जोड़ती है दो रिश्तों को दो परिवारों, दो गांवों और दो संस्कृतियों का है आपसी मिलन पहाड़ के गांवों में ध्याण का मायके से रिश्ता होता है बेहद खास देहरादून। पहाड़ के लोक-जीवन में ‘ध्याण’ मात्र एक शब्द नहीं, बल्कि एक संपूर्ण संस्कृति और सम्मान का प्रतीक है। हिमालय की गोद में बसे उत्तराखंड के गांवों में जब कोई बेटी ब्याह कर ससुराल की देहरी लांघती है, तो वह केवल एक ‘वधू’ की नई पहचान नहीं पाती, बल्कि अपने मायके के लिए वह ‘ध्याण’ के एक पूजनीय और भावनात्मक रिश्ते में बंध जाती है।पहाड़ की परंपराओं के अनुसार विवाहित बेटी को ध्याण कहा जाता है। वह एक ऐसा जीवंत सेतु है जो दो परिवारों, दो गांवों और दो संस्कृतियों को आपस में जोड़ती है। बुजुर्ग कहते हैं कि जिस घर की ध्याण खुशहाल होती है, उस घर की सात पीढ़ियां तर जाती हैं। मैत के लिए वह आज भी वही छोटी बच्ची है जो कभी गांव की पगडंडियों पर दौड़ती थी, जबकि ससुराल के लिए वह घर की मर्यादा और लक्ष्मी का रूप है।उत्तराखंड के पहाड़ों में बोली जाने वाली भाषा सिर्फ संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि भावनाओं की गहराई को व्यक्त करने का जरिया भी है। यहां के शब्दों में रिश्तों की गर्माहट और जीवन की सादगी साफ झलकती है। पहाड़ी समाज में ‘ध्याण’ का अर्थ केवल एक विवाहित बेटी नहीं, बल्कि वह भावनात्मक पहचान है, जिसमें बेटी दूर रहकर भी अपने घर की आत्मा बनी रहती है। विवाह के बाद उसका घर बदल जाता है, जिम्मेदारियां बदल जाती हैं, लेकिन मायके के प्रति उसका स्नेह और अधिकार वैसा ही बना रहता है।पहाड़ के गांवों में ध्याण का मायके से रिश्ता बेहद खास होता है। साल भर में जब भी वह मायके आती है, तो घर का माहौल बदल जाता है। उसके आने से आंगन में फिर से रौनक लौट आती है। मां-बाप के चेहरे पर संतोष और खुशी दिखाई देती है, जबकि भाई-बहनों के लिए यह मिलन पुराने दिनों की यादों को ताजा कर देता है। पहाड़ में त्योहार, मेलों और विशेष अवसरों पर ध्याण को मायके बुलाने की परंपरा रही है। यह सिर्फ एक सामाजिक रिवाज नहीं, बल्कि उस भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक है, जो समय और दूरी के बावजूद कायम रहता है।पहाड़ी समाज में बेटी की विदाई हमेशा भावुक क्षण होता है। ध्याण के रूप में उसकी पहचान उस दर्द को भी समेटे होती है, जो उसे मायके से दूर होने पर महसूस होता है। लेकिन यही दूरी हर मुलाकात को और भी खास बना देती है। जब ध्याण मायके लौटती है, तो वह सिर्फ एक बेटी नहीं, बल्कि खुशियों का पूरा संसार लेकर आती है। उसकी उपस्थिति घर के हर कोने को जीवंत कर देती है।‘ध्याण’ का आधुनिकता के इस दौर में भी अपनी जड़ों के प्रति उसका लगाव कम नहीं हुआ है। वह आज भी अपनी लोक-संस्कृति की सबसे बड़ी संवाहक है। ‘ध्याण’ आज भी पहाड़ की संस्कृति और संवेदना यह उस अटूट रिश्ते की पहचान है, जो बेटी के ससुराल जाने के बाद भी मायके से कभी नहीं टूटता। आज बेटियां शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं और आत्मनिर्भर बन रही हैं। इसके बावजूद ध्याण की परंपरा और उससे जुड़ी भावनाएं आज भी पहाड़ों में उतनी ही मजबूत हैं। लोक गीतों में ध्याण की गूंजपहाड़ की अस्मिता और ध्याण का रिश्ता इतना गहरा है कि हमारे लोक गीत इसके बिना अधूरे हैं। उंची डांडियों मा बांज-बुरांश फूलिगे, पर मेरो भाई भिटौली ले के नी औई…। यह पंक्तियां उस ध्याण की पीड़ा और प्रतीक्षा को दर्शाती हैं, जो ससुराल के कठिन श्रम के बीच अपने मायके की यादों में डूबी रहती है। नंदा है देवभूमि की सबसे बड़ी ध्याणउत्तराखंड की आराध्य देवी मां नंदा को भी राज्य की ध्याण माना जाता है। नंदा राजजात यात्रा दरअसल एक ध्याण की अपने ससुराल जाने की ही विदाई यात्रा है। जब मां नंदा को विदा किया जाता है, तो हर पहाड़ी की आंख इसलिए नम होती है क्योंकि वह अपनी ही घर की बेटी यानी ध्याण को विदा कर रहा होता है।