देवभूमि को शर्मसार करती खाकी

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देवभूमि की मित्र पुलिस खाकी पहनकर महिलाओं के साथ क्या—क्या कारनामे कर रही है, आए दिन प्रकाश में आने वाली खबरें इसकी पुष्टि और प्रमाण के लिए काफी है। अभी दो दिन पहले ही डीजीपी अभिनव कुमार ने महिलाओं की सुरक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता बताते हुए कहा था कि इससे पुलिस की छवि खराब हो रही है तथा ऐसे पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाएगी। अपने 3 साल के कार्यकाल पूरा होने पर मुख्यमंत्री धामी ने महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण को अपनी सर्वाेच्च प्राथमिकता बताया लेकिन इसके बाद भी न तो महिलाओं पर होने वाले अत्याचार, हिंसा और उनके यौन उत्पीड़न के मामले थम रहे हैं और न ही उसमें कोई कमी आ रही है। खास बात यह है कि खुद पुलिसकर्मी जिन पर महिलाओं को सुरक्षा देने की जिम्मेदारी है वह इस तरह के अपराधों को अंजाम देने से बाज नहीं आ रहे हैं। ऐसी स्थिति में जब रक्षक ही भक्षक बन जाएंगे तो फिर महिलाओं की सुरक्षा की बात या सर्वाेच्च प्राथमिकता की बात एक बेमानी से ज्यादा कुछ नहीं है। केदारनाथ में एक महिला को सहायता देने के नाम पर पुलिस कैंप में ठहराया जाना और उसके साथ छेड़छाड़ किए जाने का जो मामला प्रकाश में आया है वह अत्यंत ही चिंताजनक है। भले ही इस मामले में महिला द्वारा सीएम हेल्पलाइन पर और पुलिस हेल्पलाइन पर ऑनलाइन शिकायत के बाद दो दरोगाओं को सस्पेंड कर दिया गया हो लेकिन सवाल यह है कि धार्मिक यात्रा पर आने वाली महिला श्रद्धालुओं की सुरक्षा में तैनात किए गए पुलिस कर्मियों की अगर मानसिकता इस तरह की है तो इस प्रदेश के मानसिक रूप से बीमार पुलिस वालों का सख्त इलाज करने की जरूरत है। देवभूमि की सभ्यता और संस्कृति को कलंकित करने वाले पुलिस कर्मियों की पुलिस में कोई जगह नहीं होनी चाहिए। उत्तराखंड में चार धाम यात्रा पर लाखों महिला श्रद्धालु देश—विदेश से आती है अगर एक भी ऐसी घटना सामने आती है तो उससे उत्तराखंड की छवि को ऐसा नुकसान होता है जिसकी भरपाई संभव नहीं है। अभी उधमसिंहनगर का एक आडियो वायरल हुआ था। जिसमें एक पुलिस इंस्पेक्टर महिला से अश्लील बातचीत कर रहा था। जिसके खिलाफ कार्रवाई करने पर पुलिस को विवश होना पड़ा। ऐसे एक नहीं अनेक मामले अब तक समय—समय पर प्रकाश में आते रहे हैं जो अब एक इतिहास बनता जा रहा है। जहां तक राज्य में महिला अपराधों की बात है तो अंकिता भंडारी हत्याकांड से लेकर अभी हरिद्वार में एक नाबालिक लड़की से गैंगरेप और हत्या के मामले में सत्तारूढ़ भाजपा दल के नेताओं की संलिप्ता यह बताती है कि शासन—प्रशासन में बैठे चाहे नेता हो या फिर अधिकारी वह भले ही महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान पर कितनी भी बड़ी—बड़ी बातें करते हो लेकिन जमीनी सच्चाई यही है कि वह इन्हें लेकर कतई भी फिक्रमंद नहीं है। जब भी इस तरह की कोई घटना सामने आ जाती है तो उस पर कार्यवाही करके या फिर उसे रफा दफा कर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली जाती है। जो अत्यंत ही चिंतनीय मुद्दा है शासन—प्रशासन में बैठे लोगों को इस पर और अधिक गंभीर होने की जरूरत है।

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