Home संपादकीय भाजपा के पीछे अंकिता का भूत

भाजपा के पीछे अंकिता का भूत

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उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी कांड के दोषी तथाकथित वह वीआईपी जो उसकी हत्या के मुख्य कारक हैं उन्हें कोई सजा हो न हो लेकिन भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौड़ को तो जेल की सलाखों के पीछे भिजवा ही दिया है। यह अलग बात है कि अंकिता की हत्या से उनका और उनकी प्रेमिका अथवा पत्नी उर्मिला सनावर का दूर—दूर तक भी कोई सरोकार नहीं है। उनके आपसी झगड़े के बाद सनावर ने जिन ऑडियो वीडियो को सार्वजनिक कर सुरेश राठौड़ को बड़ी मुसीबत में फंसा ही दिया है भाजपा को अपना बचाव करने का भी एक हथियार दे दिया है। राठौर ने सनावर से वह सारी बातें जो कही गई थी जिनके सार्वजनिक होने पर प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम जिन्हें गटृू कहा गया था के साथ अन्य कई लोग भी इसकी जांच के दायरे में शामिल हुए और भाजपा के लिए इस पूरे मामले में मुश्किलों को बढ़ाते रहे उस पर कार्रवाई का एक बड़ा कारण बने हैं। 2027 का विधानसभा चुनाव अब दूर नहीं है भाजपा को अच्छी तरह से मालूम है कि विपक्ष इस मुद्दे पर उसे छोड़ने वाला नहीं है। इस मामले में तीन आरोपियों को सजा हो चुकी है और वह जेल से बाहर नहीं आ सके हैं। भाजपा नेता अपने बचाव में अब तक यही कहते रहे हैं कि किसी को भी बक्शा नहीं जाएगा वह चाहे अपने हो या अन्य कोई भी। अब सुरेश राठौड़ को जेल भिजवाकर उसने अपने तर्क को और भी मजबूत कर लिया है लेकिन इसके बाद भी वह एक सवाल कि उस वीआईपी पर कार्यवाही कब होगी जो उत्तराखंड की देवभूमि संस्कृति को कलंकित कर रहे थे। इस पर भाजपा अब तक लीपापोती ही करती रही है। अभी बीते दिनों जब दुष्यंत गौतम की उत्तराखंड में लंबे समय के ब्रेक के बाद वापसी का प्रयास किया गया और उस पर विपक्ष के हंगामें के बाद फिर उन्हें दूर रखने पर मजबूर होना पड़ा था उससे यह समझा जा सकता है कि भाजपा इस मामले को किसी भी तरह निपटाना चाहती है लेकिन इसके जितने भी प्रयास किये जा रहे हैं स्थिति उतनी ही बिगड़ती जा रही है। राठौर के खिलाफ की गई कार्रवाई उनकी गिरफ्तारी और जेल भेजे जाने से भी यह मामला शांत होने वाला नहीं है। इस मामले की सीबीआई जांच की मांग लंबे समय से की जा रही है। यह मुद्दा भाजपा के लिए 2027 के चुनाव में सबसे बड़ा सरदर्द बनता जा रहा है। इसके साथ ही अपने आप को चाल चरित्र वाली पार्टी और राज्य के डेमोग्राफी चेंज मामले में सख्त रुख अपनाने वाली वर्तमान सरकार अंकिता भंडारी जैसे हत्याकांड तथा राज्य में होने वाली हिंदू मुस्लिम की राजनीति के कारण सही मायने में कहां खड़ी है? यह सवाल अत्यंत ही महत्वपूर्ण हो चला है। अंकिता भंडारी कांड राज्य के डेमोग्राफी चेंज से तो कहीं नहीं जुड़ता है लेकिन इस एक हत्याकांड ने देवभूमि की संस्कृति में आने वाली विकृतियों को जरूर सामने लाकर खड़ा कर दिया है। राज्य को दूसरा गोवा और स्विट्जरलैंड बनाने की बात अब प्रदेश के आम लोग तक करते देखे जा सकते हैं। राज्य में जो बात धार्मिक पर्यटन से शुरू हुई थी वह मौज मस्ती वाले पर्यटन तक पहुंचती दिख रही है लेकिन इस पर गौर करने को कोई तैयार नहीं है।

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