जम्मू। उरी के कमलकोट सेक्टर में लाइन ऑफ कंट्रोल के पास एक कैंप में हैंड ग्रेनेड के अचानक फटने से भारतीय सेना के दो जवान शहीद हो गए हैं। यह घटना उस समय हुई जब वे अपनी ड्यूटी पर तैनात थे। ग्रेनेड फटने के बाद वो बुरी तरह जख्मी हुए थे और उन्हें आनन-फानन में अस्पताल ले जाया गया। जहां पर डॉक्टरों ने उन्हें बचाने का हर संभव प्रयास किया लेकिन जवानों ने दम तोड़ दिया। ये दोनों जवान महाराष्ट्र के रहने वाले थे। यह धमाका एलओसी के पास बेहद संवेदनशील कमलकोट सेक्टर में हुआ, जहां बारूदी सुरंगों (लैंडमाइन्स) और बिना फटे विस्फोटक पदार्थों की मौजूदगी से लगातार बड़ा खतरा बना रहता है। धमाका कैसे हुआ, इसके पीछे की क्या वजह है, इसकी जांच चल रही है। सेना के अधिकारी घटना के सभी पहलुओं की जांच करने में जुटे हुए हैं।
दोनों जवान 8 राष्ट्रीय राइफल्स के थे, जम्मू-कश्मीर में घाटी के बारामूला, कुपवाड़ा और बांदीपोरा जिलों में 740 किलोमीटर लंबी एलओसी (नियंत्रण रेखा) है, जम्मू डिवीजन में, एलओसी पुंछ, राजौरी और कुछ हद तक जम्मू जिले में है। इसके अलावा, इस केंद्र शासित प्रदेश की 240 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है, जो जम्मू डिवीजन के सांबा, जम्मू और कठुआ जिलों से होकर गुजरती है।
बता दें कि एलओसी की सुरक्षा सेना करती है, जबकि अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स करती है। सीमा पार से होने वाली घुसपैठ, बाहर निकलने की कोशिश, तस्करी और ड्रोन गतिविधियों को रोकने के लिए सेना और बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स दोनों को सीमा पर तैनात किया गया है। दुश्मन किसी भी तरह से कोई भी अराजकता न फैला पाएं इसकी निगरानी हमेशा जवान करते रहते हैं। जम्मू कश्मीर के कई जिलों में सैन्य अभियान भी चलाया जा रहा है। इसके जरिए अराजकता फैलाने वालों को दबोचा जा रहा है।




