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सांप्रदायिकता का जहर

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बीते कल देहरादून जनपद के सहसपुर थाना के अंतर्गत आने वाले गांव बैरागी वाला में मामूली विवाद को लेकर दो पक्षों के बीच हुए खूनी संघर्ष में एक व्यक्ति की हत्या कर दी गई जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। संघर्ष की यह घटना हिंदू और मुस्लिम संप्रदाय के लोगों के बीच हुई थी इसलिए इसका सांप्रदायिक संघर्ष का रूप लेना स्वाभाविक ही था और हुआ भी ठीक वैसा ही। यह संघर्ष इस हद तक न पहुंचे इसे रोकने के प्रयास पूर्व समय में न तो स्थानीय नेताओं और शासन प्रशासन द्वारा किए गए लेकिन जैसे ही हत्या की खबर फैली पूरा गांव तथा तमाम हिंदू संगठनों के नेता कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधि वहंा जमा हो गए शासन प्रशासन भी जाग गया। देखते ही देखते हालात इतने बिगड़ गए की हाईवे जाम से लेकर उग्र प्रदर्शन शुरू हो गए और मामले ने सांप्रदायिक रूप ले लिया। बड़ी मशक्कत के बाद हालात पर काबू पाया जा सका। लेकिन क्षेत्र में भारी तनाव व्याप्त है। पुलिस प्रशासन ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन तो दिया ही गया है साथ ही आरोपियों के घरों पर बुलडोजर की कार्रवाई तक हो चुकी है। इस घटना के पीछे पुरानी रंजिश की बात हुई कहीं जा रही है तथा कुछ लोग लेनदेन का मामला भी बता रहे हैं लेकिन मामला कुछ भी रहा हो अब यह विशुद्ध रूप से हिंदू मुस्लिम का रूप ले चुका है। क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि मुन्ना सिंह चौहान से लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह ने जिस तरह जिहादियों और आतंकियों से जोड़ते हुए सख्त लहजे में किसी भी सूरत में बक्शे न जाने की चेतावनी दी है और हिंदू संगठनों द्वारा अपराधियों के खिलाफ जल्द कार्रवाई न करने पर बड़े आंदोलन प्रदर्शन की बात कही गई है उससे माहौल के जल्द सुधरने की उम्मीद कम ही दिखाई देती है। हालांकि प्रशासन पूरी तरह से एक्शन मोड में है तथा दो आरोपियों की गिरफ्तारी की बात भी कहीं जा रही है। वही इस घटना को कुछ लोगों तथा सोशल मीडिया में यह कहकर भी प्रचारित किया जा रहा है कि देहरादून में भी गाजियाबाद की पुनरावृत्ति। उल्लेखनीय है कि अभी ईद वाले दिन गाजियाबाद में एक हिंदू युवक की कुछ मुस्लिम लड़कों ने घर बुलाकर उसकी हत्या कर दी थी इसके बाद पुलिस ने दो आरोपियों को एक एनकाउंटर में मार गिराया था। बैरागी वाला में खेत में काम करते समय किये इस हमले से एक बात तो सुनिश्चित है कि हमला योजनाबद्ध तरीके से ही किया गया है। कोई भी व्यक्ति किसी भी धर्म या जाति का हो उसे अपराध करने की छूट तो नहीं दी जा सकती है ऐसे लोगों के साथ शासन प्रशासन को सख्त से सख्त कार्यवाही जरूर करनी ही चाहिए तथा की भी जा रही है लेकिन किसी भी अपराध को सांप्रदायिकता बताकर उसका क्षेत्र विस्तार और आकार बढ़ाने का काम भी नहीं होना चाहिए। जो लोग किसी भी कारण से इसे सांप्रदायिक रंग दे रहे हैं और इसे सांप्रदायिक दंगों में तब्दील करने की कोशिश कर रहे हैं शासन प्रशासन को उन पर भी नजर रखनी चाहिए। प्रदेश में लंबे समय से लव जिहाद, थूक जिहाद और बायोग्राफी चेंज जैसे मुद्दों ने प्रदेश की आबो हवा को खराब कर रखा है और मोहम्मद दीपक की चर्चित कहानी भी हम आप सभी के सामने हैं सांप्रदायिकता का यह जहर किसी भी सूरत में समाज के लिए हितकर नहीं हो सकता है यह बात सभी को समझने की जरूरत है। 2027 के चुनाव आने वाले हैं ऐसे में इस तरह की घटना होने और उन्हें तूल दिए जाने की संभावनाएं हैं इसलिए सतर्कता भी जरूरी है और समझदारी भी।

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