चार धाम यात्रा पर मौसम की मार

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मई माह में मौसम किस तरह के तेवर दिखा सकता है इसके बारे में किसी को कोई पूर्वानुमान नहीं था। 3 मई को जब चार धाम यात्रा शुरू हुई थी तब प्रदेश का मौसम एकदम खुशनुमा था लेकिन अभी यात्रा को शुरू हुए एक सप्ताह भी नहीं बीता था कि मौसम ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया। मई माह में प्री मानसूनी बारिश, आंधी—तूफान और ओलावृष्टि से लेकर चार धाम क्षेत्रों में जिस तरह की बर्फबारी देखी जा रही है वैसा पहले कभी नहीं देखा गया है। चार धामों और हेमकुंड साहिब सहित तमाम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हो रही बारिश और बर्फबारी के बीच तूफानी हवाओं ने कहर बरपा रखा है। जिसके कारण चारधाम यात्रियों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। पहाड़ पर तापमान इतना नीचे आ चुका है कि यात्रियों को अलावों का सहारा लेना पड़ रहा है। हार्ट अटैक के कारण अब तक 50 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। बारिश के कारण यात्रा मार्गों पर जगह—जगह भूस्खलन की घटनाओं के कारण यात्रियों के फंसने की घटनाएं सामने आ रही हैं। कड़ाके की सर्दी और खराब रास्ते यात्रियों का कड़ा इम्तिहान ले रहे हैं। बीते 3 दिनों से खराब मौसम की मार झेल रहे यात्रियों को अब प्रशासन द्वारा मौसम साफ होने तक सुरक्षित पड़ावो पर ही रोके रहने की अपील की जा रही है। बीते कल केदारनाथ के लिए न हेली सेवा खराब मौसम के कारण संचालित की जा सकी और न पैदल यात्री आगे बढ़ सके। 10 हजार से अधिक यात्री अभी भी पड़ावोें पर मौसम साफ होने का इंतजार कर रहे हैं। लेकिन मौसम विभाग द्वारा आज भी मौसम खराब रहने की भविष्यवाणी पहले ही की जा चुकी है। अब जो मौसम का नया अपडेट आया है उसमें अब पूरे मई माह इसी तरह का मौसम रहने का पूर्वानुमान है। जून के पहले सप्ताह से पूरे देश में मानसून सक्रिय हो जाएगा ऐसी स्थिति में अब यह उम्मीद किया जाना कि चारधाम यात्रा की समस्याएं जल्द समाप्त हो जाएगी, गलत ही होगा। खास बात यह है कि इस साल चार धाम यात्रा से जो अपेक्षाएं थी उसकी राह में अब मौसम ने अड़ंगा अटका दिया है। यात्रा को लेकर भले ही श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा गया हो और कोरोना के 2 साल बाद शुरू हुई यात्रा में भारी भीड़ उमड़ रही हो लेकिन यात्रियों को खराब मौसम के कारण समस्याएं भी अधिक झेलनी पड़ रही है। अभी यात्रा शुरू हुए 20 दिन हुए हैं लेकिन 20 दिनों में नौ लाख से अधिक श्रद्धालु चार धाम की यात्रा कर चुके हैं। तमाम अव्यवस्थाओं और मौसम की विसंगतियों के बावजूद भी श्रद्धा का सैलाब थमता नहीं दिख रहा है लेकिन यह खराब मौसम अगर ऐसा ही बना रहता है तो उससे यात्रा पर प्रभाव पढ़ना भी तय है। क्योंकि यात्रियों की सुरक्षा का सवाल सबसे सर्वाेपरि है, शासन—प्रशासन को भी इसे लेकर अलर्ट रहने की जरूरत है।

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