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सफेद झूठ के सहारे सरकार

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वर्तमान केंद्र सरकार ने अपने राजनीतिक उद्देश्यों को पूरा करने के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने और महिला आरक्षण बिल की आड़ में परिसीमन बिल को पारित करने की कोशिश की गई भाजपा की सरकार ने खुद ही अपने चेहरे से नकाब को नोच कर फेंकने जैसा काम किया है। हास्यास्पद बात यह है कि अपनी झूठ फरेब की राजनीति को सही साबित करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रीय संबोधन और विपक्ष के खिलाफ अपनी पार्टी की महिलाओं को प्रदर्शन के लिए मैदान में उतारने जैसी गलतियां करते जा रहे हैं। भाजपा की सरकार और नेताओं को यह समझ नहीं आ रहा है कि वह अपनी एक गलती को सुधारने के लिए एक के बाद एक बड़ी गलती करते जा रहे हैं। जो अभिनंदन बिल 2023 में संसद के दोनों सदनों में सर्वसम्मति से पारित हो चुका था भले ही सरकार द्वारा उसे लागू नहीं किया गया और लटकाए रखा गया था लेकिन 2024 के चुनाव में उसका लाभ भी वह ले चुके हैं उस बिल कों लागू करने से पहले ही संशोधन बिल लाने और उसके लिए विशेष सत्र बुलाने की भाजपा को क्या जरूरत थी? इस सवाल ने ही भाजपा को मुश्किलों में फंसा दिया है भले ही सरकार ने 3 साल बाद रात के 10 बजे इसका नोटिफिकेशन जारी कर नारी अभिनंदन बिल को अमली जामा पहना दिया गया हो लेकिन इसके पीछे सरकार व भाजपा के उद्देश्य को वह नहीं छुपा सारी। अपने राजनीतिक फायदे के लिए पर्याप्त संख्या बल न होने के बावजूद भी संसद का विशेष सत्र बुलाने और बिल पारित न होने पर विपक्ष को यह कहकर कि उसने महिला आरक्षण बिल को रोकने का पाप किया है। और देश की महिलाओं का अपमान किया क्योंकि यह महिला आरक्षण बिल तो कानून बन चुका है। उसे भला कोई कैसे रोक सकता है। देश में चुनाव आचार संहिता लागू होने के बावजूद भी पीएम मोदी का राष्ट्र को संबोधित करना आचार संहिता का खुला उल्लंघन है। अपने राष्ट्रीय संबोधन में पीएम मोदी का वह सफेद झूठ जिसमें वह महिला आरक्षण बिल को रोकने की बात कह रहे हैं और घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं वह देश की महिलाओं के साथ बड़ा धोखा है और उनका अपमान है इस पूरे प्रकरण में सिर्फ सरकार ही बेनकाब नहीं हुई जिसने तमाम मर्यादाओं की सीमाएं तोड़कर संसद और संवैधानिक मर्यादाओं को तार—तार किया है वह मीडिया भी बेनकाब हो गया है जिसने सरकार के सुर में सुर मिलाते हुए इसका प्रचार किया कि विपक्ष ने महिला आरक्षण बिल को गिरा दिया। इससे बड़ा झूठ क्या हो सकता है कि सरकार की हठधर्मिता देखिए कि वह इस झूठ को सच साबित करने के लिए भाजपा की महिला नेताओं द्वारा विपक्षी नेताओं के आवासों पर प्रदर्शन किया जा रहे हैं। पीएम मोदी अपने राष्ट्रीय संबोधन का मजाक उड़वा रहे हैं। देश के इतिहास में सरकार के किसी बिल को गिरने की यह दूसरी घटना है। 70 के दशक में कांग्रेस की सरकार का बिल गिरने पर तत्कालीन प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी ने लोकसभा भंग कर मध्यवती चुनाव में जाने का फैसला लेकर जनमत को प्राथमिकता देने का साहस किया गया था अगर पीएम मोदी में साहस होता तो वह भी वैसा ही कर सकते थे लेकिन उन्होंने ऐसा न करके यह साबित कर दिया है कि अब जनता का सामना करने का साहस उनमें या उनकी सरकार में नहीं रहा है झूठ फरेब के सहारे वह जितने दिन सत्ता में बने रह सकते हैं उसी में वह अपनी भलाई समझ रहे हैं।

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