अव्यवस्थाओं का बोलबाला

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अभी चार धाम यात्रा को शुरू हुए चंद दिन ही हुए हैं लेकिन यात्रा की व्यवस्थाएं अभी से डांवाडोल हो गई है। बीते 6 दिनों में गंगोत्री—यमुनोत्री और केदारनाथ जाने वाले 20 यात्रियों की मौत हो चुकी है। अब काबीना मंत्री धनसिंह रावत कह रहे हैं कि यात्रा मार्गों पर हाईटेक मेडिकल सुविधाओं से लैस एंबुलेंस तैनात की जाएगी, वहीं डीजीपी अशोक कुमार कह रहे हैं कि यात्रियों की संख्या अधिक बढ़ने पर बिना पंजीकरण आने वाले यात्रियों को रोका जा सकता है। अकेले यमुनोत्री में अब तक 11 श्रद्धालुओं की मौत हार्ट अटैक या सांस लेने में दिक्कत के कारण हो चुकी है। इसके अलावा तीन अन्य यात्रियों की बद्रीनाथ धाम से मौत की खबर है। यह बात सभी जानते हैं कि चार धाम की यात्रा कोई आसान नहीं है पहाड़ो की चढ़ाई और ऑक्सीजन की कमी के कारण वृद्ध और सांस के मरीजों के लिए यह यात्रा और भी अधिक मुश्किल हो जाती है। हजारों फीट की ऊंचाई पर स्थित केदारनाथ और बद्रीनाथ धामों में ऑक्सीजन की कमी के कारण लोगों की सांसें फूलने लगती है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि यात्रा मार्गाे व धामों में इलाज की बेहतर व्यवस्था नहीं है खास बात यह है कि बिना किसी स्वास्थ्य परीक्षण के लोगों को चार धाम जाने की छूट होना भी जान पर भारी पड़ जाता है। अति वृद्ध व संास अथवा हृदय रोगों से पीड़ितों को यात्रा पर जाने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए। भले ही पहाड़ों के मौसम की जानकारी सहज उपलब्ध हो लेकिन इस मौसम के प्रभाव से चारधाम यात्रियों को बचा पाना आसान नहीं होता है सत्ता में बैठे लोगों के अलावा क्षेत्रीय व्यवसायी और पंडा—पुजारी चार धाम यात्रा शुरू होने से उत्साहित हैं तथा इस यात्रा के ऐतिहासिक होने की बात कर रहे हैं लेकिन इसके लिए कितने ऐतिहासिक प्रबंध किए गए हैं? यह सवाल सबसे अहम है। सभी धामों में एक दिन में एक निश्चित संख्या में ही श्रद्धालु दर्शन कर सकते हैं लेकिन सरकार द्वारा यात्रियों की सीमा निर्धारण की बाध्यता खत्म करने से अब बेहिसाब श्रद्धालु पहुंच रहे हैं ऐसे में व्यवस्थाएं तो गड़बड़ाना लाजमी है कड़ाके की सर्दी में श्रद्धालुओं को खुले आसमान के नीचे रातें गुजारनी पड़ रही है। अब तक गंगोत्री व यमुनोत्री धामों में एक लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंच चुके हैं। वहीं 6 मई को केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के बाद 4 दिन में 70 हजार से अधिक श्रद्धालु पहुंच चुके हैं। अब जब व्यवस्थाएं चरमराती दिख रही हैं तो एक बार फिर यात्रियों की संख्या सीमित करने पर विचार चल रहा है। चार धाम यात्रा के लिए सरकार वाहनों की व्यवस्था कितनी दूरस्त कर सकी है इसका अनुमान इस बात से भी लगाया जा सकता है कि सिटी बसों को चार धाम यात्रा में भिजवाया जा रहा है तथा अब स्कूलों से भी अपनी बस सेवा देने को कहा गया है। खानपान और यात्री निवास की स्थिति भी बेहतर नहीं है। अगर हाल यही रहा तो आगे आने वाले समय में समस्याएं और अधिक बढ़ेगी।

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