जो राम भक्त सड़कों पर ढोल पीट—पीट कर गाया करते थे कि जो राम को लाए हैं हम उनको लायेंगे? वह आज अयोध्या के राम मंदिर निर्माण में जमीनों की खरीद फरोख्त से लेकर दान और चंदे की करोड़ों करोड़ की चोरी की खबरों से हैरान परेशान हैं। उन्हें भरोसा ही नहीं हो रहा है कि उनकी आस्था के साथ कोई ऐसा खिलवाड़ भी कर सकता है। राम मंदिर निर्माण के आंदोलन में अपनी जान तक कुर्बान करने वाले उन कार सेवकों की आत्मा पर यह सब होते देखकर क्या गुजर रही होगी? हैरानी की बात यह है कि इस महा घोटाले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिन्होंने श्री राम मंदिर निर्माण के बाद प्राण प्रतिष्ठा की तथा मंदिर पर धर्म ध्वज भी खुद फहराने का काम किया वह अब एक शब्द भी बोलने को तैयार नहीं है। श्री राम जन्मभूमि मंदिर अयोध्या क्षेत्र ट्रस्ट की जब सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जब सरकार ने ट्रस्ट गठन की घोषणा लोकसभा में प्रधानमंत्री मोदी ने 6 साल पहले की थी तो भाजपा के नेताओं ने मेज थपथपा कर खूब खुशियों का इजहार किया था लेकिन अब इन भाजपा नेताओं में से कोई भी इस पर बोलने को तैयार नहीं है। इस ट्रस्ट का गठन पीएमओ द्वारा किया ही नहीं गया था बल्कि इसकी संपूर्ण सुरक्षा की जिम्मेवारी भी पीएमओ के अधिकारियों को ही सौंपी गई थी। जिनके नाम अब इस महा घोटाले के आरोपियों में शामिल हैं। खास बात यह है कि बात चाहे ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और मिश्रा के इस्तीफे की हो या फिर आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की अथवा गिरफ्तारी की सभी जानकारियां सूत्रों के आधार पर बाहर आ रही है। भाजपा का कोई नेता या ट्रस्ट का कोई पदाधिकारी मीडिया को अपनी बात बताने का साहस तक नहीं जुटा पा रहा है। राम मंदिर के प्रति आस्था को अपनी राजनीति का आधार बनाकर सफलता की सीढ़ियां चढ़ने वाली भाजपा और उसके नेताओं को इस बात का बखूबी एहसास है कि यह मामला कितना संवेदनशील है और इसका कितना गंभीर प्रभाव या कहा जाए नुकसान भाजपा को होने वाला है। इन राम भक्तों को अब इस मुद्दे पर कड़ा इम्तिहान भी देना होगा कि उनके लिए मोदी भक्ति ज्यादा मायने रखती है या राम भक्ति। चौतरफा विवादों में गिरी भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अब यह समझ ही नहीं आ रहा है कि इस मामले से कैसे निपटा जाए। भाजपा के साथ—साथ संघ भी अब इस घोटाले की लपेट में आ गया है। इम्तिहान तो मीडिया का भी हो रहा है जो इस महा घोटाले का सच आम आदमी तक न पहुंचे या कम से कम पहुंचे, के प्रयास में जुटा है। जिस हिंदुत्व और सनातन के कंधे पर सवार होकर सत्ता में हमेशा बने रहने का सपना देखने वालों के चेहरे आज उतरे हुए हैं। अब लोग कह रहे हैं कि जिन्होंने राम को भी नहीं छोड़ा वह भला किसको छोड़ेंगे। 12 साल बेदाग का दम्भ भरने वाले अब आए दिन होने वाले नए—नए घोटालोंं के खुलासों पर क्या कहेंगे? उन्हें भी समझ नहीं आ रहा है एक समय जो बात चौकीदार चोर है शुरू हुई थी वह वोट चोर और चुनाव चोर या सीट चोर से आगे बढ़ते हुए चंदा चोर और आस्था चोरी तक जा पहुंची है। इस राम मंदिर चोरी के मामले में आरोपियों का क्या होगा और धर्म को धंधा बनाने वाले तथा उस पर राजनीति करने वालों का क्या होगा? इसका जवाब समय ही देगा क्योंकि सत्ता तो मौन है।




