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25 साल में क्या मिला?

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उत्तराखंड अपनी राज्य स्थापना की रजत जयंती मना रहा है। पूरे 11 दिन चलने वाले तमाम कार्यक्रमों का आयोजन प्रदेश भर में किया जा रहा है। सरकार और अधिकारी सभी इन कार्यक्रमों में व्यस्त है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इस इवेंट को भव्य व दिव्य बनाने की घोषणा पहले ही कर चुके हैं। उत्तराखंड राज्य जो अब 25 साल की उम्र का सफर तय कर चुका है। ऐसे में इस राज्य के आम लोग भी इस बात पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं कि जिस राज्य के गठन के लिए उन्होंने सालों—साल संघर्ष किया और तमाम तरह की कुर्बानियां दी क्या इन 25 सालों में वह तथा उनकी चुनी हुई सरकारों ने उनके सपनों का उत्तराखंड बनाया या फिर प्रदेश के नेता शहीद आंदोलनकारियों के चित्रों पर फूल मालाएं पहनाकर सिर्फ उनके सपनों का राज्य बनाने की बात ही करते रहे हैं। उत्तराखंड राज्य की इन 5 वर्षीय पांच योजनाओं के कालखंड में राज्य में पांच मुख्यमंत्री और 60 मंत्री बनने चाहिए थे लेकिन पांच की जगह 10 मुख्यमंत्री और 60 की जगह 120 मंत्री बन चुके हैं और आज के वर्तमान के हालत यह है कि धामी के नेतृत्व वाली सरकार को बने चार साल का समय हो चुका है लेकिन पांच मंत्री पद जो खाली पड़े हैं उन्हें उनके शपथ ग्रहण से लेकर आज तक नहीं भरा जा सका है। मंत्रिमंडल का विस्तार 4 सालों में भी क्यों नहीं किया जा सका? इसका कोई जवाब किसी के भी पास नहीं है। 4 साल से लगातार सत्ता में बैठे नेता यही कहते आ रहे हैं कि तैयारी पूरी कर ली गई है बस होने ही वाला है? सवाल यह है कि मुख्यमंत्री धामी जो दर्जन भर से ज्यादा विभागों की जिम्मेदारी ढो रहे हैं क्या वह सभी विभागों के काम सुचारू रूप से चला पा रहे हैं। एक अन्य सवाल यह है कि चुनाव से पूर्व अगर किसी विधायक को कुछ महीनो के लिए मंत्री बना भी दिया गया तो इतने कम समय में काम के तौर पर वह कौन सा तीर मार देगा। जबकि 8 साल से मंत्री की कुर्सी तोड़ने वाले मंत्री कुछ नहीं कर रहे हैं और उनकी परफॉर्मेंस को लेकर उन्हें बदलने की चर्चाएं लंबे समय से हो रही है। पूर्व सीएम हरीश रावत अगर वर्तमान सरकार को जन्म से ही विकलांग सरकार बता रहे हैं तो इसमें आश्चर्य की कौन सी बात है। राज्य की स्वास्थ्य सेवाएं और कानून व्यवस्था में कितना सुधार इन 25 सालों में हुआ है, इसका सच डोली कंडी पर मरीजों को ढोने वाली तस्वीरे और इलाज के अभाव में दम तोड़ने वाली प्रसूताओं के जरिए समझा जा सकता है। राज्य में महिला अपराधों का बढ़ता ग्राफ तथा यौन शोषण की घटनाएं स्तब्ध करने वाली हैं। बीते कल ही हल्द्वानी में एक महिला जो अपने परिवार सहित घर जा रही थी स्कार्पियो सवार लोगों की छेड़छाड़ और रेप की कोशिश का शिकार हो जाती है। इस घटना के आरोपी जो अब पुलिस गिरफ्त में है यह घटना महिला सुरक्षा की कलई खोलने के लिए काफी है। राज्य गठन से लेकर अब तक 25 सालो से राज्य में भ्रष्टाचार की जो निर्बाध गंगा बह रही है उससे हर कोई वाकिफ हैं। युवाओं की बेरोजगारी और पेपर लीक की घटनाएं इस बात का सबूत है कि राज्य में क्या कुछ बदला है? राज्य की राजधानी में बनाए गए सैन्य धाम के निर्माण में भी घोटाले की बात इन दिनों चर्चाओं में है। राज्य के पलायन में भी रत्ती भर की कमी नहीं आई है। गांव खाली हो रहे हैं और स्कूलों पर ताले पड़ते जा रहे हैं। आंकड़ों में राज्य विकसित और आदर्श राज्य बनता जा रहा है जबकि जमीनी हकीकत की तस्वीर कुछ अलग ही बताती हैं। 25 सालों में क्या हुआ और क्या नहीं हो सका? रजत जयंती का ढोल पीटने वालों को इस पर चिंतन करने की जरूरत है।

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