- पूर्व सीएम ने सांसद के बयान को बताया सुप्रीम कोर्ट की अवमानना व संविधान पर हमला
देहरादून। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ द्वारा सुप्रीम कोर्ट और मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना को लेकर दिए गए बयानों से पहले ही सियासत में भूचाल आया हुआ था उसके बाद अब भाजपा सांसद निशिकांत दुबे और यूपी के उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा द्वारा दिए गए बयानों ने हड़कंप मचा दिया है। जिसमें उन्होंने सीधे चीफ जस्टिस पर देश में युद्ध भड़काने और अपनी सीमाएं लांघने का आरोप लगाते हुए कहा है कि राष्ट्रपति और संसद के फैसलों में दखल देने का सुप्रीम कोर्ट को कोई अधिकार नहीं है। इस अति गंभीर मुद्दे पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व सीएम हरीश रावत ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे सुप्रीम कोर्ट की अवमानना तथा संविधान पर हमला करार दिया है।
हरीश रावत का कहना है कि भाजपा का असली चेहरा यही है वह न संविधान को मानती है न न्यायपालिका का कोई अस्तित्व उनकी नजर में है। न संविधान के प्रति प्रतिबद्धता है और न भाजपा के नेता किसी का सम्मान करते है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका पर अपने फैसले थोपने के लिए वह सारी सीमाएं पार कर रहे हैं, सुप्रीम कोर्ट की अवमानना कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने अपने बयान में कहा है कि इस देश में धर्म युद्ध भड़काने के लिए केवल और केवल सुप्रीम कोर्ट जिम्मेदार है। उनका कहना है कि मुख्य न्यायाधीश ने सारी सीमाएं पार कर ली है। वही दिनेश शर्मा का कहना है कि राष्ट्रपति व सांसद जिस सुप्रीम कोर्ट की नियुक्ति करते है उन पर टीका टिप्पणी करने का सुप्रीम कोर्ट और न्यायाधीश को क्या हक है।
उधर इस मामले पर बढ़ते भारी विरोध को देखते हुए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने एक्स पर इन दोनों नेताओं के बयानों से पल्ला झाडतें हुए कहा है कि उनके बयानों से भाजपा का कोई सरोकार नहीं है। उन्होंने भाजपा नेताओं को ऐसा न करने की हिदायत दी है। इस पर हरीश रावत का कहना है कि उन्हें पता है कि इसे लेकर जनता उन्हें जेल पहुंचा देगी इसलिए अब नड्डा भी लीपा पोती में लगे हुए हैं।




