- दुष्यंत की राज्यपाल नियुक्ति रोकने की मांग पर इंडिया गेट पर रातभर धरना
- राहुल और प्रियंका गांधी ने की मुलाकात, हिरासत के बाद किया गया रिहा
- 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए दुष्यंत गौतम की नियुक्ति रद्द करने की मांग
नई दिल्ली। उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय और कथित वीआईपी भूमिका की जांच की मांग को लेकर दिल्ली पहुंचे अंकिता के माता-पिता को गुरुवार तड़के दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इंडिया गेट पर रातभर चले धरने के बाद सुबह करीब चार बजे पुलिस ने कार्रवाई की। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस के कई नेता और अन्य प्रदर्शनकारी भी हिरासत में लिए गए। बाद में अंकिता के माता-पिता समेत हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा कर दिया गया।
इस घटनाक्रम ने उत्तराखंड के बहुचर्चित हत्याकांड को एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में ला दिया है। अपनी बेटी को न्याय दिलाने की मांग को लेकर चार साल से संघर्ष कर रहे माता-पिता अब दिल्ली में भी सरकार से जवाब मांग रहे हैं। परिवार का विरोध भारतीय जनता पार्टी के नेता दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने के खिलाफ है। माता-पिता की मांग है कि मामले में कथित वीआईपी कोण की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो की जांच पूरी होने तक उनकी नियुक्ति रोकी जाए।
इंडिया गेट पर धरने पर बैठे अंकिता के माता-पिता से लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने मुलाकात की। उनके साथ कांग्रेस नेता पवन खेड़ा समेत अन्य नेता भी मौजूद थे। राहुल गांधी ने इस मामले में सीबीआई जांच पूरी होने तक दुष्यंत गौतम की राज्यपाल के रूप में नियुक्ति पर रोक लगाने की मांग उठाई। इस मुलाकात के बाद धरने ने राजनीतिक रूप से और व्यापक रूप ले लिया। हिरासत में लिए जाने से पहले अंकिता के पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी ने सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए दुष्यंत गौतम की नियुक्ति रद्द करने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि मांग पूरी नहीं होने पर देशभर में विरोध प्रदर्शन हो सकते हैं। अंकिता की मां सोनी देवी ने भी कहा कि नियुक्ति रद्द होने तक उनका विरोध जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि यदि उन्हें सार्वजनिक स्थान पर धरना देने की अनुमति नहीं मिलती, तो वह अपने घर पर भूख हड़ताल करेंगी।
कांग्रेस नेताओं ने पुलिस की कार्रवाई की आलोचना की। पवन खेड़ा, सुप्रिया श्रीनेत और काजी निजामुद्दीन ने सवाल उठाया कि न्याय की मांग कर रहे परिवार के साथ इस तरह की कार्रवाई क्यों की गई। कांग्रेस नेताओं ने पुलिस पर प्रदर्शनकारियों के साथ सख्ती करने के आरोप भी लगाए। हालांकि, इन आरोपों पर पुलिस का विस्तृत आधिकारिक पक्ष सामने आने की पुष्टि नहीं हुई है। 19 वर्षीय अंकिता भंडारी ऋषिकेश के निकट वनंत्रा रिजार्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थीं। सितंबर 2022 में उनकी हत्या कर दी गई थी। 24 सितंबर 2022 को उनका शव चिल्ला नहर से बरामद हुआ। मामले में रिजार्ट संचालक पुलकित आर्य और उसके दो कर्मचारियों सौरभ भास्कर तथा अंकित गुप्ता को गिरफ्तार किया गया था। कोटद्वार की अदालत ने 30 मई 2025 को तीनों को हत्या और अन्य अपराधों में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
मामले में कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। पिछले वर्ष सामने आए कुछ कथित ऑडियो के बाद यह मुद्दा फिर चर्चा में आया। अंकिता के माता-पिता का आरोप है कि इस पहलू की पूरी जांच होनी चाहिए। परिवार की ओर से दुष्यंत गौतम का नाम भी इस संदर्भ में लिया गया है, लेकिन यह आरोप अपने आप में किसी अपराध में उनकी संलिप्तता का प्रमाण नहीं है। उनकी ओर से इन आरोपों पर ताजा प्रतिक्रिया की पुष्टि नहीं हुई है। अंकिता के माता-पिता का इंडिया गेट पर धरना इस सवाल को फिर सामने लाता है कि अदालत से दोषियों को सजा मिलने के बाद भी परिवार किन पहलुओं पर जांच की मांग कर रहा है। उनकी वर्तमान मांग कथित वीआईपी कोण की जांच पूरी करने और दुष्यंत गौतम की नियुक्ति रोकने की है। हिरासत, रिहाई और 24 घंटे के अल्टीमेटम के बाद अब निगाहें सरकार की प्रतिक्रिया पर हैं। उत्तराखंड में यह मामला केवल एक आपराधिक घटना तक सीमित नहीं रहा है। यह महिला सुरक्षा, सत्ता की जवाबदेही और निष्पक्ष जांच की मांग से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा बन चुका है। दिल्ली में माता-पिता की हिरासत ने इस बहस को और तेज कर दिया है।





