जब देश की जनता अच्छे दिन आने की उम्मीद में मोदी की सरकार लेकर आई तो उसने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि उसने अपने इतने बुरे दिन लाने का इंतजाम कर लिया है जहां भूखा मरने पर मजबूर होना पड़ेगा। अगर वर्ल्ड बैंक की ताजा रिपोर्ट पर गौर करें तो आने वाले समय में 4.5 करोड़ लोग भुखमरी की लाइन में शामिल होने वाले हैं इसका भारत पर व्यापक असर इसलिए पड़ेगा क्योंकि इनमें हर छठा आदमी भारत का है। अभी खाड़ी युद्ध के बीच राहुल गांधी ने कहा था कि 29 अप्रैल को वोटिंग समाप्त होते ही तेल और गैस की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि होगी जिसे सरकार नकार रही थी और पर्याप्त उपलब्धता की बात कर रही थी लेकिन बीते कल कमर्शियल गैस सिलेंडर के दामों में 900 रूपये की वृद्धि कर दी गई जो अब तक की सबसे बड़ी वृद्धि है। कमर्शियल गैस सिलेंडर पर बीते 4 महीनो में 81 फीसदी बढ़ोतरी हो चुकी है इससे खाने—पीने की वस्तुओं पर चलने वाले व्यवसाय पर क्या असर पड़ेगा और जो बाजार के खाने पर निर्भर है उनकी जेब पर क्या असर पड़ेगा? इसे कोई समझने को तैयार नहीं है। आने वाले समय में रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में भारी वृद्धि की संभावना है तथा पेट्रोल—डीजल 25 से 30 रुपए अधिक महंगा हो सकता है। भारत अपनी जरूरत का 50 फीसदी एलपीजी आयात करता है अगर र्हाेंमुज का दरवाजा बंद रहता है तो आने वाला समय किस हद तक संकट को लेकर आएगा? इसका अंदाजा सहज लगाया जा सकता है। भले ही सरकार के द्वारा पेश किए जाने वाले दावों में देश की विकास दर सरपट दौड़ रही हो लेकिन इसकी जो हकीकत है उसको सिर्फ वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट ही नहीं बता रही है डॉलर के मुकाबले रुपए की गिरती कीमत जो 95 तक पहुंच रही है तथा देश का शेयर बाजार जिसमें घरेलू निवेश का लाखों करोड़ हर सप्ताह डूब रहा है और रिकॉर्ड विदेशी निवेश अपना पैसा निकाल कर हर रोज भाग रहे हैं। देश की पांच ट्रिलियन वाली अर्थव्यवस्था की सच्चाई बताने के लिए काफी है। बीते साल विदेशी निवेशको 1.66 करोड़ की निकासी की थी लेकिन इस साल के बीते 4 माह में 1.19 की निकासी की जा चुकी है। भारत की विकास दर का आंकड़ा अभी भी 4 से 5 फीसदी पर अटका हुआ है। सरकार भले ही अपने आंकड़ों में इस विकास दर को कुछ भी बताएं और देश के लोगों को विकसित भारत का सपना दिखाएं, बीते 11 सालों से देश में यही सब हो रहा है लेकिन देश का गोदी मीडिया आज तक भी मोदी नोटिस कांड का बाजा बजा रहा है। मोदी कांग्रेस के समय में रुपए की कीमत 56 रूपये आने पर अपनी छाती पीटा करते थे वह अब डॉलर के मुकाबले 95 रुपए पर पहुंचने पर अपनी मजबूत अर्थव्यवस्था का ढंोल पीट रहे हैं। न तो विदेशी निवेश आगे बढ़ता दिख रहा है और न निर्यात का आंकड़ा मगर विकास दर छलांगे मार रही है। सत्ता में बैठे लोग न तो सच को सुनना चाहते हैं न समझना और देखना उनका एकमात्र उद्देश्य सिर्फ और सिर्फ चुनावी जीत तक ही सीमित भर रह गया है। इन दिनों सरकार और पूरी सरकार सिर्फ पश्चिम बंगाल का चुनाव जीतने में जुटी हुई है अगर देश के 80 90 लाख लोग भुखमरी वाली स्थिति पर पहुंच भी जाते हैं तो इससे उन्हें क्या फर्क पढ़ना है। सरकार चुनाव में मस्त है तथा देश की जनता महंगाई से त्रस्त है। लोगों की जमा पूंजी ठिकाने लग रही है बैंकों के बचत खातों में पैसा आ नहीं रहा है। लोग और अधिक गरीब होते जा रहे हैं उनकी समझ नहीं आ रहा है कि यह कैसा विकास है।




