- डा. बैजनाथ की याचिका पर हुई सुनवाई
- विषम परिस्थितियों में चुनाव कैसे होगा
- मताधिकार के संवैधानिक अधिकार का मुद्दा
देहरादून। पंचायत चुनाव में मतदाताओं के मताधिकार को सुनिश्चित करने और निर्विघ्नम चुनाव संपन्न कराने को लेकर नैनीताल हाई कोर्ट द्वारा सचिव पंचायती राज और डीजीपी उत्तराखंड ने क्या व्यवस्थाएं की है इसकी जानकारी देने के लिए कोर्ट में उपस्थित होने या वर्चुअली उपस्थिति के आदेश दिए गए हैं। इस मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई को होगी।
देहरादून निवासी डा. बैजनाथ की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सचिव पंचायती राज और डीजीपी उत्तराखंड को निर्देश दिए गए हैं कि वह 15 जुलाई को इस बाबत पूर्ण विवरण के साथ कोर्ट के सामने अपना पक्ष रखें। डा. बैजनाथ द्वारा राज्य में जारी भारी मानसूनी बरसात के कारण बंद पड़ी सड़कों और रास्तों के साथ—साथ कांवड़ यात्रा के कारण रूट डायवर्ट तथा पुलिस प्रशासन की व्यस्तता का हवाला देकर इस बात की आशंका जताई गई थी कि इन परिस्थितियों में मतदाताओं को अपने वोट के अधिकार से वंचित होना पड़ सकता है। इसलिए फिलहाल इन चुनावों को स्थगित कर दिया जाए।
उत्तराखंड की स्टैंडिंग काउंसलिंग द्वारा दलील दी गई कि राज्य में नामांकन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है ऐसे में अब चुनाव टालना ठीक नहीं होगा। इस पर कोर्ट ने पूछा कि याचिका कर्ता कह रहे हैं कि आपने मतदान सुनिश्चित कराने तथा बिना रुकावट सुरक्षित चुनाव संपन्न कराने के लिए क्या किया है? कोर्ट ने कहा कि पंचायती राज सचिव व डीजीपी 15 जुलाई को वर्चुअली या फिर खुद उपस्थित होकर अपनी तैयारियों की जानकारी दें कि इन विषम परिस्थितियों में जब मानसूनी आपदा के कारण सड़के व रास्ते बंद हैं तथा राज्य में ंचार धाम यात्रा व कावड़ यात्रा के सुरक्षा प्रबंधों में प्रशासन लगा हुआ है वह किस तरह से बिना किसी रूकावट के चुनाव संपन्न करा सकते हैं? उल्लेखनीय है कि राज्य में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए 24 व 28 जुलाई को मतदान होना है।



