May 21, 202664 हजार का ऋण चुकाया; 25 हजार आर्थिक सहायता प्रदान कीदेहरादून। मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन ने एक बार फिर संवेदनशील एवं मानवीय प्रशासन का परिचय देते हुए ईस्ट पटेल नगर निवासी शत-प्रतिशत दिव्यांग संजीव कुमार को बड़ी राहत प्रदान की है। जिलाधिकारी सविन बंसल ने आर्थिक तंगी और सामाजिक संकट से जूझ रहे दिव्यांग की फरियाद सुनते ही त्वरित कार्रवाई करते हुए 64 हजार 915 रुपये की बकाया ऋण राशि सीएसआर फंड से जमा कराने के निर्देश दिए। 03 नौनिहाल बालिकाओं के 100 दिव्यांग पिता व 65 प्रतिशत् दिव्यांग माता के उपर से 64 हजार का बोझिल ऋण से जीविका उपार्जन के अति कठिन साधन व लाचारी में जिला प्रशासन देहरादून द्वारा मदद का हाथ बढाते हुए ऋण माफी के साथ ही रोजगार हेतु रायफल क्लब फंड से 25 हजार आर्थिक सहायता प्रदान की गई। संजीव कुमार ने वर्ष 2018 में उत्तराखण्ड बहुउद्देशीय वित्त एवं विकास निगम, देहरादून से मोबाइल रिपेयरिंग की दुकान खोलने हेतु 50 हजार रुपये का ऋण लिया था। प्रारम्भिक अवधि में उन्होंने लगभग 15 से 20 किश्तों का भुगतान भी किया, किन्तु वर्ष 2020 में कोरोना महामारी और लॉकडाउन के कारण उनका व्यवसाय पूरी तरह बंद हो गया। आर्थिक संकट गहराने पर वे शेष किश्तें जमा नहीं कर सके।ऋण अदायगी न होने पर निगम द्वारा 64,915 रुपये की आरसी तहसील देहरादून भेज दी गई। दिव्यांग दंपति केवल 3000 रुपये की पेंशन पर परिवार का पालन-पोषण कर रहे थे। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी दयनीय हो चुकी थी कि बेटियों की शिक्षा तक प्रभावित होने लगी थी। प्रार्थी ने जिलाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत होकर अवगत कराया कि अमीन द्वारा तहसील जेल भेजने की धमकी दी जा रही है, जिससे पूरा परिवार भय और मानसिक तनाव में जी रहा था। मामले की गंभीरता और मानवीय पक्ष को देखते हुए जिलाधिकारी ने तत्काल संज्ञान लिया तथा प्रभारी अधिकारी शस्त्र को निर्देशित किया कि दिव्यांग संजीव कुमार की बकाया ऋण राशि राइफल क्लब फंड से जमा कराई जाए, ताकि परिवार को राहत मिल सके और आरसी की कार्रवाई समाप्त हो सके।जिलाधिकारी ने केवल आर्थिक राहत तक ही स्वयं को सीमित नहीं रखा, बल्कि परिवार के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में भी पहल की। उन्होंने जिला कार्यक्रम अधिकारी, बाल विकास को निर्देशित किया कि संजीव कुमार की 3 बेटियों को प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा के अंतर्गत शिक्षा सहायता प्रदान करने हेतु प्रकरण की जांच कर शीघ्र आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए, जिससे उनकी शिक्षा निर्बाध रूप से जारी रह सके। जिला प्रशासन की इस त्वरित और संवेदनशील कार्रवाई से एक जरूरतमंद परिवार को नया संबल मिला है। जिला प्रशासन केवल प्रशासनिक दायित्वों तक सीमित नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक राहत पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जनसुनवाई में प्राप्त होने वाले ऐसे मामलों में संवेदनशीलता के साथ प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति सहायता से वंचित न रहे।
May 21, 2026देहरादून। भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत सतर्कता अधिष्ठान की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए ऋषिकेश से एक जूनियर इंजीनियर को 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। आरोपी पर टेंडर कार्य के भुगतान के बदले अवैध धन उगाही करने का आरोप है।जानकारी के अनुसार शिकायतकर्ता ने सतर्कता अधिष्ठान के टोल फ्री नंबर 1064 पर शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता ने बताया कि वह सरकारी विभागों में टेंडर का काम करता है और उसने पशुलोक बैराज, ऋषिकेश में एक कार्य का टेंडर लिया था। आरोप है कि संबंधित कार्य के भुगतान को जारी करने के बदले यूजेवीएनए लि. में तैनात जूनियर इंजीनियर फैसल खान लगातार रिश्वत की मांग कर रहा था। शिकायत मिलने के बाद सतर्कता अधिष्ठान ने मामले की गोपनीय जांच कराई। जांच में शिकायत प्रथम दृष्टया सही पाए जाने पर देहरादून स्थित थाना सतर्कता अधिष्ठान में मुकदमा दर्ज किया गया।विजिलेंस टीम ने योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई करते हुए आरोपी फैसल खान को शिकायतकर्ता से 50 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। आरोपी की पहचान फैसल खान पुत्र लियाकत हुसैन निवासी कटोराताल, थाना काशीपुर, जनपद ऊधमसिंह नगर के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि ट्रैप टीम काफी समय से आरोपी की गतिविधियों पर नजर रखे हुए थी। जैसे ही रिश्वत की रकम का लेनदेन हुआ, टीम ने मौके पर ही दबिश देकर आरोपी को पकड़ लिया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी से पूछताछ की जा रही है और उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आगे की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
May 21, 2026उत्तराखंड में भीषण गर्मी से मचा मैदान से लेकर पहाड़ तक हाहाकार प्रदेश के मैदानी जिलोंकृमें तापमान 40 से 42 डिग्री सेल्सियस के पार पहाड़ में जंगलों में लगी आग ने कर दिया है लोगों का जीना मुहाल देहरादून। उत्तराखंड के मैदानी जिलोंकृदेहरादून, हरिद्वार, और उधमसिंह नगर में तापमान 40 से 42 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा पसर जाता है और गर्म हवाओं के थपेड़ों ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है।चौंकाने वाली बात यह है कि मुक्तेश्वर, मसूरी, अल्मोड़ा और नैनीताल जैसे पहाड़ी हिल स्टेशनों पर भी तापमान सामान्य से 4 से 6 डिग्री अधिक दर्ज किया जा रहा है, जिन पहाड़ों में लोग कड़ाके की ठंड से बचने के लिए गर्म कपड़ों का सहारा लेते थे, वहां अब दोपहर के समय पंखे और कूलर चलाने की नौबत आ गई है।दिल्ली, एनसीआर, यूपी और पंजाब की तपती गर्मी से राहत पाने के लिए जो पर्यटक भारी संख्या में मसूरी, नैनीताल या )षिकेश पहुंच रहे हैं, उन्हें भी यहां आकर पूरी राहत नहीं मिल पा रही है। हिल स्टेशनों पर भी दोपहर की चटक धूप सैलानियों को होटलों के कमरों में कैद रहने को मजबूर कर रही है। हालांकि, शाम के समय हल्की ठंडी हवाएं जरूर थोड़ी राहत दे रही हैं।गर्मी बढ़ने के साथ जंगलों में आग की घटनाएं भी तेजी से बढ़ी हैं। चीड़ के जंगलों से उठती लपटें और धुआं पहाड़ की हवा को और जहरीला बना रहे हैं। कई इलाकों में दिनभर धुंध और धुएं जैसा माहौल बना हुआ है। पर्यावरण विशेषज्ञ इसे जलवायु परिवर्तन का बड़ा संकेत मान रहे हैं। शहरों में भी हालात आसान नहीं हैं। देहरादून, हल्द्वानी और )षिकेश जैसे शहरों में बढ़ती आबादी, कंक्रीट और वाहनों की संख्या ने गर्मी को और तीखा बना दिया है।मौसम विभाग के अनुसार फिलहाल अगले कुछ दिनों तक गर्मी से राहत मिलने के आसार कम ही हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में कहीं-कहीं आंशिक बादल छाने या तेज हवाएं चलने की संभावना जरूर है, लेकिन मैदानी इलाकों को अभी तपिश और लू का सामना करना पड़ेगा।
May 21, 2026नैनीताल। सड़क हादसे में आज दोपहर एक कार के खाई में गिर जाने से एक ही परिवार के चार लोगों सहित पांच की मौत हो गयी। सूचना मिलने पर पुलिस व एसडीआरएफ ने मौके पर पहुंच कर रेस्क्यू अभियान चलाकर सभी को बाहर निकालकर अग्रिम कार्यवाही शुरू कर दी है।प्राप्त जानकारी के अनुसार आज दोपहर करीब दो बजे सेनेटोरियम— रातीघाट बायपास रोड, भवाली स्थित ढैला गांव से लगभग 500 मीटर पूर्व एक महिंद्रा कार अनियंत्रित होकर गहरी खाई में गिर गई। वाहन में एक ही परिवार के चार लोगों सहित पांच लोग सवार थे। दुर्घटना की सूचना प्राप्त होते ही वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नैनीताल डॉ. मंजूनाथ टीसी द्वारा तत्काल पुलिस बल को मौके पर रवाना किया गया। स्थानीय पुलिस एसडीआरएफ तथा स्थानीय नागरिकों द्वारा संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव अभियान चलाया गया। दुर्घटना में 5 व्यक्तियों (2 पुरुष, 2 महिलाएं एवं 1 बच्चा)’ की मृत्यु होना प्रकाश में आया है, सभी के सम्बंध में आवश्यक जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस एवं एसडीआरएफ टीम द्वारा सभी 5 शवों को खाई से निकालकर सड़क तक पहुंचाया गया है।मौके पर एसपी क्राइम डॉ. जगदीश चन्द्र, क्षेत्राधिकारी रविकांत सेमवाल, प्रभारी निरीक्षक प्रकाश मेहरा’, एसडीआरएफ एवं पुलिस बल मौजूद रहकर राहत एवं बचाव कार्य कर रहे हैं। मृतकों की शिनाख्त एवं विस्तृत विवरण प्राप्त किए जाने की कार्यवाही प्रचलित है। घटना के संबंध में आवश्यक वैधानिक कार्यवाही की जा रही है। पुलिस प्रशासन द्वारा राहत एवं बचाव कार्य निरंतर जारी है तथा दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है। मृतकों के नाम भूपेंद्र सिंह चुफाल निवासी खटीमा, सीमा कैड़ा चुफाल पत्नी भूपेंद्र सिंह चुफाल, वासु चुफाल पुत्र भूपेंद्र सिंह चुफाल, रवी पुत्री भूपेंद्र सिंह चुफाल व चालक अनुज कुमार मिश्रा पुत्र दया सागर मिश्रा निवासी अफसर नगर एलपीजी गोदाम आलम नगर लखनऊ बताये जा रहे है।
May 21, 2026बच्चे—बुजुर्ग और कामकाजी लोग बरतें विशेष सावधानी देहरादून। अगले 24 घंटे हीट वेव का अलर्ट जारी करते हुए स्वास्थ्य विभाग ने बच्चे—बुजुर्गो और कामकाजी लोगों को विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिये।प्रदेश में लगातार बढ़ रहे तापमान और हीट वेव के प्रभाव से जनजीवन प्रभावित होने लगा है। मौसम विभाग ने आगामी 48 घंटों के दौरान कई जिलों में भीषण गर्मी और हीट वेव की संभावना को देखते जिला प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। बढ़ती गर्मी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग भी अलर्ट मोड पर आ गया है तथा चिकित्सकों ने विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और कामकाजी लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। मौसम विभाग के अनुसार देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी गढ़वाल, उधम सिंह नगर, नैनीताल तथा उत्तरकाशी के कुछ क्षेत्रों में तापमान में और वृद्धि होने की संभावना है। मौसम निर्देशक सी.एस. तोमर ने बताया कि मैदानी जिलों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक पहुंच सकता है, जबकि पर्वतीय क्षेत्रों में भी तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहने की संभावना है। राजधानी देहरादून में विगत बुधवार सुबह से ही तेज गर्मी और बढ़ते तापमान का असर महसूस किया गया। जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों और चिकित्सा इकाइयों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. एस.के झा ने लोगों से दोपहर 11 बजे से शाम 4 बजे तक अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यदि अत्यंत आवश्यक कार्य से बाहर जाना पड़े तो सिर को छाते या कपड़े से ढकें तथा चेहरे को मास्क या सूती कपड़े से सुरक्षित रखें। डॉ. झा ने शरीर में पानी की कमी से बचने के लिए दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी एवं तरल पदार्थों का सेवन करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि गर्मी के मौसम में तरबूज, नींबू पानी, जलजीरा, नारियल पानी और अन्य पानी युक्त फलों का सेवन लाभकारी रहेगा। उन्होंने बताया कि हीट वेव के दौरान चक्कर आना, सिरदर्द, तेज बुखार, उल्टी या बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत निकटतम चिकित्सालय में संपर्क करना चाहिए, क्योंकि छोटी सी लापरवाही भी गंभीर स्वास्थ्य समस्या का कारण बन सकती है। जिला प्रशासन ने भी लोगों से अपील की है कि वे अनावश्यक रूप से घर से बाहर निकलने से बचें तथा गर्मी से बचाव के सभी आवश्यक उपाय अपनाएं। प्रशासन का कहना है कि सावधानी और जागरूकता से ही हीट वेव के दुष्प्रभावों से बचा जा सकता है। जिलाधिकारी सविन बंसल के निर्देशों पर हीट वेव से संबंधित सहायता एवं शिकायतों के लिए जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र को सक्रिय कर दिया गया है। आमजन सहायता हेतु हेल्पलाइन नंबर 2726066, 2626066 तथा व्हाट्सएप नंबर 7534826066 पर संपर्क कर सकते हैं।
May 21, 2026पहाड़ में बंजर खेतों की छाती पर उगती कंटीली झाड़ियां और सिसक रही हमारी विरासत जिन खेतों में कभी लहलहाता था धान और मंडुवा, वहां आज उगी हैं कँटीली झाड़ियाँ पहाड़ की खेती को निगल गई है वन्यजीवों की मार, गांवों को खा गया पलायन का दंश देहरादून। पहाड़ के सीढ़ीनुमा खेतों में हरियाली किसी चित्रकार की बनाई तस्वीर जैसी लगती थी। लेकिन आज वही खेत बंजर पड़े हैं। कहीं झाड़ियां उग आई हैं तो कहीं पत्थर और सूखी मिट्टी ने खेती की आखिरी उम्मीद भी निगल ली है। कभी धान, मंडुवा और झंगोरे से लहलहाने वाले उत्तराखंड के पहाड़ी गांवों के खेत पलायन, बंदर-सुअर आतंक और बदलती जिंदगी ने वीरान बना दिए है।उत्तराखंड के पर्वतीय अंचलों में बंजर होते खेत केवल खेती का संकट नहीं, बल्कि टूटते पहाड़ की सबसे दर्दनाक कहानी बन चुके हैं। गांवों से युवाओं का पलायन लगातार बढ़ रहा है, जो हाथ कभी हल चलाते थे, वह अब शहरों में नौकरी और मजदूरी की तलाश में भटक रहे हैं। पीछे बच गए हैं बूढ़े मां-बाप, बंद घर और खाली खेत। पहाड़ की खेती पहले ही मौसम की मार झेल रही थी, ऊपर से बंदरों और जंगली सूअरों ने किसानों की कमर तोड़ दी। कई गांवों में लोगों ने खेती करना इसलिए छोड़ दिया क्योंकि रातभर की मेहनत सुबह उजड़े खेतों में बदल जाती है। खेतों की मेड़ों पर अब बच्चों की आवाजें नहीं, बल्कि सन्नाटा पसरा रहता है।सबसे बड़ा दर्द यह है कि जिन खेतों ने पीढ़ियों का पेट भरा, आज वही खेत अपने लोगों का इंतजार कर रहे हैं। गांव की बुजुर्ग महिलाएं आज भी आस लगाए बैठी हैं कि शायद इस बार उनका बेटा शहर से लौटकर खेतों में हल चलाएगा। लेकिन हर साल यह उम्मीद भी सूखी मिट्टी की तरह दरकती जा रही है। पहाड़ में खेती केवल रोजगार नहीं थी, वह संस्कृति थी, रिश्तों की डोर थी, सामूहिकता का उत्सव थी। पड़्याल और रोपाई जैसी परंपराएं गांवों को एक परिवार की तरह जोड़ती थीं। आज खेत बंजर हुए तो उनके साथ लोकगीत, मेलजोल और गांव की आत्मा भी सूखने लगी है।आज पहाड़ के सीढ़ीदार खेत एक अजीब सी खामोशी ओढ़े हुए हैं। यह खामोशी हरी-भरी फसलों की नहीं, बल्कि खेतों के बंजर होने और उनके सीने पर उग आई कटीली झाड़ियों की है। पहाड़ में खेतों के बंजर होने के पीछे एक ऐसा दुष्चक्र है, जिसने किसानों की कमर तोड़कर रख दी है। ग्रामीणों के मुताबिक खेती छोड़ने की सबसे बड़ी वजह केवल रोजगार की तलाश नहीं, बल्कि जंगली जानवरों का आतंक भी है। पहाड़ के बंजर होते खेत सिर्फ मिट्टी का टुकड़ा नहीं हैं आत्मा के सूखते जाने के जीवंत दस्तावेज हैं।