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पर्यटकों की भीड़ अपार, कैसे पाए पार

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  • हर साल भीड़ के आगे छोटे पड़ रहे हैं इंतजाम
  • सड़कों पर जाम, प्रशासन के फूले हाथ—पांव

देहरादून। उत्तराखंड का धार्मिक पर्यटन अपार संभावनाओं से भरा हुआ है। सिर्फ चार धाम यात्रा ही नहीं वर्ष भर धार्मिक पर्यटन के कारण उत्तराखंड सैलानियों से गुलजार रहता है। पर्यटकों के जन सैलाब को संभाल पाना अब शासन—प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
उत्तराखंड राज्य की कुल जनसंख्या सवा करोड़ के आसपास है जबकि साल भर में यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या 5 करोड़ तक जा पहुंचती है। जो इस राज्य की आबादी से चार गुना अधिक है। सैलानियों की इस भारी भीड़ को नियंत्रित करना ही एक बड़ी चुनौती नहीं है इन्हें मूलभूत सुविधाएं मुहिया कराने के साथ—साथ उनके जान माल की सुरक्षा तथा आवागमन की बेहतर सुविधाएं प्रदान करना शासन प्रशासन की जिम्मेदारी है।
राज्य में चार धाम यात्रा को शुरू हुए अभी 42 दिन का समय ही हुआ है केदारनाथ धाम में अब तक 10 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंच चुके हैं वहीं बद्रीनाथ में लगभग 8 लाख, गंगोत्री व यमुनोत्री धामों में चार—चार लाख के करीब श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। यह श्रद्धा का सैलाब मौसम की विसंगतियां व आवागमन की दिक्कतों के बावजूद भी थम नहीं रहा है। जगह—जगह सड़कों के बंद होने और लंबे—लंबे जाम का झेलने के बाद भी रिकॉर्ड भीड़ उमड़ रही है जिसके कारण हर साल नये रिकॉर्ड बन रहे हैं।
15 जून को हल्द्वानी के कैंची धाम की स्थापना दिवस पर लगने वाले मेले में आने वाली भीड़ ने प्रशासन के हाथ पैर फुला दिए हैं। भवाली से आगे वाहनों के आवा गमन पर रोक लगा दी गई है तथा लोगों को शटल सेवा के जरिए कैंची धाम तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई है लेकिन भीड़ के कारण भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। बात सिर्फ चार धाम की यात्रा या फिर कुछ खास स्थान पर आने वाले पर्यटकों तक सीमित नहीं है मसूरी और फूलों की घाटी से लेकर अन्य तमाम दर्शनीय स्थलों तक भीड़ का बोलबाला है। कभी कावड़ यात्रा तो कभी कुंभ का मेला प्रदेश में पर्यटकों का हर वक्त तथा हर सीजन में भारी जमावड़ा रहता है जो अब शासन प्रशासन के लिए चुनौती बनता जा रहा है।

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