Home News Posts उत्तराखंड मैं लंगड़ा नहीं, बूढ़ा घोड़ा जरूर हूंः हरीश

मैं लंगड़ा नहीं, बूढ़ा घोड़ा जरूर हूंः हरीश

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  • राष्ट्रीय नेताओं की सोच के साथ चलने में विश्वासः प्रीतम
  • कांग्रेस में बड़े बदलाव के लिए जारी है चिंतन मंथन

नई दिल्ली। उत्तराखंड कांग्रेस के आंतरिक हालात को कैसे सुधारा जा सकता है यह सवाल लंबे समय से कांग्रेस हाई कमान के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है। दिल्ली में कई राज्यों में कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे में बड़े परिवर्तन किए जाने को लेकर हाई लेवल मीटिंग हो रही है। जिसमें कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी तथा श्ौलजा सहित तमाम बड़े नेता और पदाधिकारी भाग ले रहे हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी जिनकी मंशा है कि कांग्रेस से उम्र दराज और निष्क्रिय नेताओं की छंटनी कर उनकी जगह युवा और ऊर्जावान नेताओं को तजरीह दी जाए।
राहुल गांधी द्वारा कांग्रेस नेताओं का वर्गीकरण करते हुए उन्हें तीन तरह के घोड़े बताया गया है। जिसमें वह कुछ को बारात के घोड़े, कुछ को लंगड़े घोडे, तथा कुछ को रेस के घोड़े बताते हैं। निष्क्रिय नेता वह है जिन्हें बारात के घोड़े कहा गया है। जिनका काम सिर्फ दिखावे भर का है, वही लंगड़े घोड़े का मतलब उम्र दराज नेताओं से है जिन्हें चलने के लिए दूसरों के कंधों के सहारे की जरूरत होती है। तीसरे वह है जो दिन—रात काम करने की क्षमता वाले हैं।
उनके इस फार्मूले के कारण राज्य के पूर्व सीएम हरीश रावत जैसे उम्र दराज नेता चर्चाओं की केंद्र में आ गए हैं। लोग चर्चा कर रहे हैं कि क्या राहुल गांधी व कांग्रेस हरीश रावत जैसे नेताओं को साइड कर सकेगी इस पर खुद हरीश रावत कहते हैं कि मैं लंगड़ा नहीं बूढ़ा घोड़ा जरूर हूं लेकिन बूढ़े घोड़े को भी अस्तबल में बांधा जाता है और खाना दिया जाता है।
उधर प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा का कहना है कि राहुल गांधी का आशय इस बात से है कि हर व्यक्ति अच्छा रिजल्ट दे उनका मतलब किसी की उम्र क्या है इससे नहीं है। कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री तथा पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह का कहना है कि वह राष्ट्रीय नेताओं की सोच के साथ ही चलने और काम करने में विश्वास रखते हैं। देखना यह है कि दिल्ली में चल रही इस कवायद का कोई नतीजा भी निकलता है या नहीं?

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