April 25, 2026देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड विघालयी शिक्षा परिषद की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षा में सफल हुए सभी विघार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्जवल भविष्य की कामना की है।आज यहां मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड विघालयी शिक्षा परिषद की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षा में सफल हुए सभी विघार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्जवल भविष्य की कामना की है। मुख्यमंत्री ने कहा यह सफलता विघार्थियों के निरंतर परिश्रम, अनुशासन और अटूट संकल्प का प्रमाण है। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताते हुए कहा कि इसी लगन और आत्मविश्वास के साथ सभी विघार्थी अपने सपनों को साकार करते हुए जीवन में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन विघार्थियों को इस बार अपेक्षित परिणाम नहीं मिल सका है, वे हतोत्साहित न हों। धैर्य, सकारात्मक सोच और सतत प्रयास के साथ आप निश्चित रूप से सफलता हासिल करेंगे। मुख्यमंत्री ने परीक्षा में सफल विघार्थियों के परिजनों को भी शुभकामनाएं प्रेषित की हैं।
April 24, 20263 दिनों में कुल 6733 यात्रियों को ओपीडी एवं इमरजेंसी सेवाएं प्रदान की गईदेहरादून। उच्च हिमालयी क्षेत्र में संचालित श्री केदारनाथ धाम यात्रा 2026 के दौरान जिला प्रशासन द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं को श्रद्धालुओं हेतु प्रभावी एवं व्यवस्थित ढंग से संचालित किया जा रहा है। संपूर्ण यात्रा मार्ग से लेकर धाम क्षेत्र तक स्थापित चिकित्सा इकाइयों, मेडिकल रिलीफ पोस्ट (MRP), बेस कैंप चिकित्सालयों तथा हेली एवं एम्बुलेंस रेस्क्यू सेवाओं के माध्यम से श्रद्धालुओं को त्वरित उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, यात्रा प्रारम्भ से अब तक 3 दिनों में धाम स्थित चिकित्सालयों में कुल 6733 यात्रियों को ओपीडी एवं इमरजेंसी सेवाएं प्रदान की गई हैं। दिनांक 24 अप्रैल को 4993 श्रद्धालुओं का उपचार किया गया। इसी प्रकार अब तक 2869 यात्रियों की स्वास्थ्य जांच/स्क्रीनिंग की जा चुकी है, जिनमें से आज 1311 जांचें एक ही दिन में की गईं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा यात्रा से पहले और यात्रा के दौरान नियमित परीक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है, जिससे संभावित जोखिम वाले यात्रियों की समय रहते पहचान हो सके।रेस्क्यू व्यवस्था की बात करें तो अब तक 4 यात्रियों को हेली सेवा के माध्यम से उच्च चिकित्सा संस्थान में रेफर किया गया है, 13 यात्रियों को एम्बुलेंस के माध्यम से जबकि 07 श्रद्धालुओ को डंडी कंडी के माध्यम से सुरक्षित नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया है, जो प्रशासन की त्वरित प्रतिक्रिया को दर्शाता है।स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान अब तक 11 यात्री अस्वस्थ अथवा यात्रा हेतु अयोग्य पाए गए हैं, जिनमें 2 मामले आज के दिन के हैं। ऐसे यात्रियों को यात्रा न करने अथवा चिकित्सकीय सलाह के अनुरूप आगे बढ़ने की सलाह दी गई है।यात्रा के दौरान स्वास्थ्य निगरानी के चलते गंभीर मामलों में भी तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। हेली रेस्क्यू के माध्यम से अब तक 04 मरीजों को उच्च चिकित्सा केंद्र में भेजा गया।23 अप्रैल को दो गंभीर मरीजों को हेली रेस्क्यू के माध्यम से उच्च चिकित्सा केंद्र में भेजा गया। इनमें गुजरात के मेहसाणा निवासी 55 वर्षीय धनजी भाई को सांस लेने में तकलीफ और शरीर के दाहिने हिस्से में कमजोरी की स्थिति में केदारनाथ क्षेत्र से बेस कैंप चिकित्सालय लाया गया। जांच में उनका ऑक्सीजन स्तर अत्यंत कम पाया गया, जिसके बाद प्राथमिक उपचार देकर उन्हें जिला चिकित्सालय रुद्रप्रयाग के लिए हेली सेवा से रेफर किया गया।दूसरे मामले में नागपुर (महाराष्ट्र) निवासी 19 वर्षीय मंदार मधुकर को पिछले दो दिनों से सांस लेने में कठिनाई, चक्कर एवं कमजोरी की शिकायत थी। केदारनाथ स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में जांच के दौरान उनका ऑक्सीजन स्तर कम पाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें हेली सेवा से जिला चिकित्सालय रुद्रप्रयाग भेजा गया, जहां से एम्बुलेंस द्वारा अस्पताल में भर्ती कराया गया।वहीं आज 24 अप्रैल 2026 को भी 02 गंभीर मरीजों को हेली रेस्क्यू के माध्यम से उच्च चिकित्सा केंद्र में भेजा गया।जिला प्रशासन द्वारा यात्रा मार्ग पर चिकित्सा सेवाओं को 24×7 सक्रिय रखा गया है। विभिन्न स्थानों पर ऑक्सीजन सुविधा, प्रशिक्षित चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ, एम्बुलेंस और हेली सेवाएं तैनात हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सहायता उपलब्ध कराई जा सके।जिला प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे यात्रा पर आने से पूर्व अपना स्वास्थ्य परीक्षण अवश्य कराएं, निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करें तथा किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या होने पर तुरंत नजदीकी चिकित्सा केंद्र से संपर्क करें।कुल मिलाकर, केदारनाथ यात्रा के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं की सुदृढ़ व्यवस्था और त्वरित रेस्क्यू प्रणाली के चलते श्रद्धालुओं को सुरक्षित एवं सुगम यात्रा अनुभव प्रदान करने की दिशा में प्रशासन निरंतर सक्रिय है।
April 24, 2026मुख्यमंत्री आवास में हिमालयी राज्यों से समन्वय और नीति निर्धारण परिषद की बैठक सम्पन्नदेहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास में हिमालयी राज्यों के मध्य आपसी समन्वय को सुदृढ़ करने, साझा चुनौतियों के समाधान हिमालयी राज्यों से समन्वय एवं नीति निर्धारण परिषद की प्रथम बैठक आयोजित की गई। बैठक के लिए समेकित रणनीति तैयार करने तथा क्षेत्रीय विकास को गति देने के विभिन्न बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा की गई।मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमालयी राज्यों की भौगोलिक, पर्यावरणीय एवं सामाजिक परिस्थितियाँ समान होने के कारण आपसी सहयोग और अनुभवों के आदान-प्रदान से प्रभावी नीति निर्माण संभव है। उन्होंने कहा कि जिन हिमालयी राज्यों में विभिन्न क्षेत्रों में अच्छे कार्य हुए हैं, उन कार्यों का विस्तृत अध्ययन बेस्ट प्रैक्टिस के रूप में राज्य में अपनाया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि इकॉनोमी और ईकोलॉजी में समन्वय के साथ मानव जीवन स्तर को बेहतर बनाना हमारा मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड प्राकृति सम्पन्नता एवं जैव विविधता की दृष्टि से महत्वपूर्ण राज्य है। हिमालय और औषधियों के संरक्षण के क्षेत्र में राज्य में कार्य करने की अपार संभावनाएं हैं।मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संरक्षण के दिशा में राज्य सरकार द्वारा निरंतर प्रयास किये जा रहे हैं। जल स्रोंतों के पुनर्जीवीकरण की दिशा में अनेक प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हिमालय और पर्यावरण सरंक्षण के क्षेत्र में जो संस्थान अच्छा कार्य कर रहे हैं, उनका भी निरंतर सहयोग लिया जाए। हिमालयी राज्यों की विभिन्न चुनौतियों के समाधान के लिए हिमालयी राज्यों के विशेषज्ञों के साथ बैठक समय-समय पर बैठकों और विचार गोष्ठियों का आयोजन भी किया जाए। बैठक के दौरान जलवायु परिवर्तन, आपदा प्रबंधन, पर्यटन, जैव विविधता संरक्षण, जल स्रोतों के संरक्षण तथा सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज बैठक में जो भी सुझाव प्राप्त हुए हैं, उस दिशा में तेजी से काम आगे बढ़ाये जायेंगे। मुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन ने कहा कि हिमालयी राज्यों की चुनौतियों को दूर करने के लिए हिमालयी राज्य कैसे एकीकृत रूप में कार्य कर सकते हैं, इस दिशा में प्रयास किये जायेंगे। उन्होंने कहा कि देश की बड़ी आबादी को हिमालय से फायदा होगा। हिमालय के संरक्षण और संवर्द्धन की दिशा में कार्य करने के लिए हमें इस क्षेत्र में कार्य करने वाले राष्ट्रीय संस्थानों का भी नियमित सहयोग लेना होगा। हिमालयी राज्यों से समन्वय एवं नीति निर्धारण परिषद के सदस्य एवं विधायक श्री किशोर उपाध्याय ने कहा कि हिमालय एवं मध्य हिमालय क्षेत्र की अद्यतन वैज्ञानिक एवं पारिस्थितिकि स्थिति का अध्ययन होना चाहिए। हिमालयी नदियों के जल स्तर और प्रवाह का आंकलन करना भी जरूरी है। सदस्य एवं पूर्व डीजीपी श्री अनिल रतूड़ी ने कहा कि हिमालयी राज्यों को संगठित रूप से कार्य कर हिमालयी से संबंधित सभी सम्पदाओं और लोगों की आजीविका को बढ़ाने की दिशा में प्रयास करने होंगे। आचार्य डॉ. प्रशांत ने कहा कि हिमालयी राज्यों के लिए ज्वाइंट टास्क फोर्स बननी चाहिए। हिमालयी राज्यों की चुनौतियां लगभग एक जैसे होती हैं, इनके लिए मिलकर बेहमर नीति निर्धारण की दिशा में कार्य होने चाहिए। डॉ. जी.एस. रावत ने कहा कि प्रकृति और संस्कृति के संरक्षण की दिशा में निरंतर कार्य होने चाहिए। पद्मश्री श्री कल्याण सिंह रावत ने कहा कि बुग्यालों का संरक्षण बहुत जरूरी है। जड़ी-बूटियों के क्षेत्र में राज्य में अनेक संभावनाएं हैं। इस अवसर पर प्रमुख सचिव डॉ. आर.मीनाक्षी सुदंरम, सचिव श्री शैलेश बगौली, यूकॉस्ट के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।
April 24, 2026हरिद्वार। ऑपरेशन प्रहार के तहत उत्तराखण्ड गौवंश स्क्वाड, गढवाल परिक्षेत्र व कोतवाली रानीपुर की संयुक्त पुलिस टीम ने आज एक सूचना पर ग्राम दादूपुर गोविन्दपुर स्थित एक घर पर छापेमारी कर 4 आरोपियो अकरम, अजीम, आदिल व नसरत को दबोचते हुए मौके से मौके से 300 किलो पशु मांस व कटान के उपकरण बरामद किए। मौके से एक आरोपी फरार हो गया जिसकी तलाश की जा रही है।गिरफ्तारी व बरामदगी के आधार पर कोतवाली रानीपुर पर आरोपियों के खिलाफ उत्तराखण्ड गौ वंश संरक्षण अधिनियम का अभियोग पंजीकृत किया गया। गिरफ्तार आरोपियो को न्यायालय में पेश किया जा रहा है। गिरफ्तार लोगो के नाम अकरम पुत्र स्व. असगर ग्राम दादूपुर सलेमपुर थाना रानीपुर हरिद्वार उम्र 60 वर्ष, अजीम पुत्र अकरम ग्राम दादूपुर सलेमपुर थाना रानीपुर हरिद्वार उम्र—22 वर्ष, आदिल पुत्र यासीन निवासी ग्राम दादूपुर सलेमपुर थाना रानीपुर हरिद्वार उम्र—50 वर्ष, नसरत पुत्र अख्तर निवासी ग्राम दादूपुर सलेमपुर थाना रानीपुर हरिद्वार उम्र—27 वर्ष बताये जा रहे है।
April 24, 2026घबराए नहीं, अफ वाहों से बचें, यह सिर्फ अभ्यास है: जिला प्रशासन देहरादूून। राजधानी देहरादून में नागरिक सुरक्षा तंत्र की तैयारियों को परखने के लिए आज रात 10 बजे एयर रेड एवं ब्लैकआउट मॉक ड्रिल का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान शहर के चार संवेदनशील क्षेत्रों में 30 मिनट तक बिजली आपूर्ति बाधित रहेगी।मॉक ड्रिल का उद्देश्य किसी संभावित हवाई हमले या आपात स्थिति में सुरक्षा एजेंसियों की तत्परता एवं समन्वय क्षमता का आकलन करना है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आईएसबीटी, घंटाघर, आराघर तथा रायपुर स्थित रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स अनुप्रयोग प्रयोगशाला (डीईएएल/डीआरडीओ) क्षेत्र में सायरन बजाकर एयर रेड अलर्ट जारी किया जाएगा और तत्पश्चात ब्लैकआउट किया जाएगा। आपदा प्रबंधन की दृष्टि से जिला प्रशासन द्वारा कंट्रोल रूम में इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर स्थापित किया गया है, जहां मोबाइल, वायरलेस एवं दूरसंचार के माध्यम से सभी विभागों के बीच समन्वय सुनिश्चित किया जाएगा। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सिविल डिफेंस एवं पुलिस बल भी मौके पर तैनात रहकर स्थिति पर नजर रखेंगे।जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी ऋषभ कुमार ने बताया कि यह मॉक ड्रिल गृह मंत्रालय के निर्देशानुसार आयोजित की जा रही है, जिसमें जिलाधिकारी कंट्रोलर के रूप में संचालन करेंगे। उन्होंने आमजन से अपील की है कि इस दौरान किसी प्रकार की अफवाह या घबराहट में न आएं, यह केवल आपातकालीन तैयारियों का अभ्यास है। जिला प्रशासन ने नागरिकों से सहयोग करने एवं जारी दिशा—निर्देशों का पालन करने का आग्रह करते हुए कहा है कि इस तरह के अभ्यास आपदा प्रबंधन तंत्र को मजबूत बनाने के साथ—साथ जनजागरूकता बढ़ाने में सहायक होंगे।
April 24, 2026देहरादून। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, देहरादून के तत्वावधान में आगामी 9 मई, 2026 को जनपद देहरादून के मुख्यालय सहित समस्त बाह्य न्यायालय परिसरों में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। इस लोक अदालत का उद्देश्य लंबित एवं प्री—लिटिगेशन वादों का आपसी सुलह—समझौते के आधार पर त्वरित, सुलभ एवं सौहार्दपूर्ण निस्तारण सुनिश्चित कराना है।सचिव/सिविल जज (वरिष्ठ प्रभाग) जिला विधिक सेवा प्राधिकरण देहरादून सीमा डुंगराकोटी ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत में दीवानी, वैवाहिक एवं पारिवारिक वाद, चेक बाउंस प्रकरण, वसूली एवं मोटर दुर्घटना से संबंधित वाद, श्रम विवाद, उपभोक्ता फोरम के मामले तथा प्री—लिटिगेशन वादों का निपटारा किया जाएगा। इसके अतिरिक्त न्यायालयों में लंबित शमनीय प्रकृति के मोटर वाहन अधिनियम (एमवी एक्ट) के चालानों का भी निस्तारण किया जाएगा, जिसमें निर्धारित शुल्क जमा कर बिना अतिरिक्त व्यय के मामलों का समाधान संभव होगा।शमनीय प्रकृति के वादों में तेज गति से वाहन चलाना, खतरनाक तरीके से वाहन चलाना, बिना लाइसेंस/आर.सी./ इन्श्योरेंस / परमिट के वाहन चलाना, बिना सीटबैल्ट या हेलमेट, अप्राधिकृत व्यक्ति द्वारा वाहन चलाना, क्षमता से अधिक सवारी वाहन में बैठाना, आवश्यकता से अधिक हॉर्न बजाना, आपातकालीन वाहनों को पास न देना, मोटर साइकिल ड्राइवर या पिछली सीट सवारी द्वारा सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करना, किसी खड़े वाहन में अनधिकृत रूप से हस्तक्षेप करना, मानसिक या शारीरिक रूप से अयोग्य होते हुए वाहन चलाना शामिल है। हालांकि, शराब पीकर वाहन चलाने एवं नाबालिग द्वारा वाहन चलाने जैसे मामलों को शमनीय श्रेणी में शामिल नहीं किया गया है।लोक अदालत की एक विशेषता यह भी है कि इसमें निस्तारित वादों पर कोई न्यायालय शुल्क देय नहीं होता। यदि पूर्व में शुल्क जमा किया गया है, तो वह नियमानुसार वापस किया जाता है। लोक अदालत के निर्णय अंतिम एवं बाध्यकारी होते हैं तथा इनके विरुद्ध कोई अपील नहीं की जा सकती। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने आम जनमानस से अपील की है कि जिन व्यक्तियों के वाद देहरादून, ऋषिकेश, विकासनगर, डोईवाला, चकराता एवं मसूरी के न्यायालयों में लंबित हैं, वे 9 मई, 2026 से पूर्व अपने संबंधित न्यायालय में राजीनामे के आधार पर निस्तारण हेतु आवेदन कर इस अवसर का लाभ उठाएं। राष्ट्रीय लोक अदालत आमजन को सस्ता, सुलभ और त्वरित न्याय प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।