July 6, 2026देहरादून। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में आज सचिवालय में नाबार्ड की उच्च स्तरीय समिति की बैठक सम्पन्न हुयी। बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने प्राईमरी सेक्टर पर जोर देते हुए, ग्रामीण अवसंरचना विकास कोष (आरआईडीएफ) के तहत् अधिक से अधिक प्रोजेक्ट शामिल किए जाने के निर्देश विभागों को दिए।मुख्य सचिव ने सभी विभागों को अपने प्रोजेक्ट अगले तीन दिन में पोर्टल पर अपलोड किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि गतिमान परियोजनाओं की प्रतिपूर्ति के लिए भी प्रस्ताव शीघ्र अपलोड किए जाएं, ताकि समय से प्रतिपूर्ति जारी की जा सके। उन्होंने धीमी गति से चल रहे प्रोजेक्ट्स पर भी चिंता जाहिर करते हुए पुरानी परियोजनाओं को प्राथमिकता पर पूर्ण किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विभागीय सचिव स्लो गोईंग प्रोजेक्ट्स की साप्ताहिक समीक्षा करते हुए कार्यों को पूर्ण कराएं।मुख्य सचिव ने कहा कि सभी विभागों द्वारा एकीकृत दृष्टिकोण अपनाते हुए प्रोजेक्ट तैयार करने पर ही किसी क्षेत्र में योजनाओं का उचित लाभ मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने की आवश्यकता है। कृषि—बागवानी क्षेत्र में सम्पूर्ण लिंकेज के साथ एक से अधिक क्लस्टर्स को शामिल करते हुए बड़े प्रोजेक्ट बनाए जाएं। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रोजेक्ट्स में एक क्षेत्र के आसपास के सभी क्लस्टर्स को कोल्ड चेन, इंफ्रास्ट्रक्चर, ट्रांसपोर्टेशन आदि की सुविधा एक ही प्राजेक्ट के अंतर्गत मिल सके।मुख्य सचिव ने इसके लिए नाबार्ड से तकनीकी एवं विशेषज्ञ सहायता उपलब्ध कराए जाने का भी अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि नाबार्ड को गतिशक्ति पोर्टल का एक्सेस उपलब्ध कराया जाए, ताकि वह सभी परियोजनाओं का अध्ययन कर पायलट प्रोजेक्ट के रूप में 4, 5 क्षेत्र चिन्हित करते हुए इन चिन्हित क्षेत्रों के एक सम्पूर्ण लिंकेज प्लान तैयार करने में तकनीकी एवं विशेषज्ञ सहायता उपलब्ध करा सकें। इस पर नाबार्ड ने शीघ्र एक टीम लगाए जाने के आश्वासन दिया।मुख्य सचिव ने कहा कि उघान विभाग को पॉलीहाऊस परियोजना को शीघ्र से शीघ्र पूर्ण कराए जाने हेतु सचिव स्तर पर साप्ताहिक समीक्षा करते हुए लगातार निगरानी किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने पशुपालन विभाग को भी सभी जनपदों में बड़े स्तर के अस्पतालों को स्थापित कर दूरस्थ क्षेत्रों में पशुओं के लिए स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराए जाने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि जो प्रोजेक्ट पूर्ण हो चुके हैं, उन प्रोजेक्ट्स के पूर्ण होने का प्रमाण—पत्र एवं रिपोर्ट, शीघ्र से शीघ्र नाबार्ड को उपलब्ध कराए जाएं। बैठक के दौरान बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2026—27 के लिए कुल 1 हजार करोड़ के प्रस्ताव का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से 500 करोड़ से अधिक के प्रस्ताव शासन को प्राप्त हो गए हैं। इनमें से कुल 271 करोड़ के प्रस्ताव नाबार्ड को प्राप्त हो गए हैं, इन 271 करोड़ के प्रोजेक्ट्स में से 210 करोड़ की डीपीआर नाबार्ड को प्राप्त हो गई हैं। इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुन्दरम, विशेष प्रमुख सचिव अमित सिन्हा, सचिव दिलीप जावलकर, डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरूषोत्तम, सी. रविशंकर, धीराज सिंह गर्ब्याल एवं सीजीएम नाबार्ड पंकज यादव सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
July 6, 2026हरिद्वार। उत्तराखण्ड में नकली नोट चलाने वाले एक गिरोह का खुलासा करते हुए पुलिस ने पंजाब के चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। जिनके पास से 500 रूपये के 169 नोट यानि 84, 500 रूपये की जाली नोट बरामद किये गये है। आरोपी कुछ जाली कंरेसी जनपद हरिद्वार व अन्य जगहों पर चला भी चुके है। जिनकी जांच की जा रही है।जानकारी के अनुसार बीती रात सिटी कोतवाली पुलिस चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान मेला अस्पताल की ओर से आते चार युवक पुलिस को संदिग्ध दिखाई दिए। पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया तो वे वापस मुड़कर तेजी से भागने लगे, लेकिन बिल्केश्वर तिराहे से टिबड़ी तिराहे के बीच उन्हें दबोच लिया गया। तलाशी के दौरान चारों के पास से 500 के 169 जाली नोट बरामद हुए। पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया है। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उन्होंने गुरदासपुर (पंजाब) के ही एक व्यक्ति से 20,000 देकर 500 के 200 नकली नोट (कुल 1 लाख) खरीदे थे। इन नकली नोटों को असली बताकर बाजार में चलाने के लिए वे हरिद्वार आए थे। आरोपितों ने यह भी स्वीकार किया कि उन्होंने एक दिन पहले हरिद्वार के बाजारों में कुछ नकली नोटों से खरीदारी भी की थी। पुलिस अब इस पूरे गिरोह के मुख्य सप्लायर तक पहुंचने के लिए विशेष टीम गठित कर चुकी है। साथ ही जिन दुकानों पर नकली नोट चलाए गए, उनकी भी पहचान की जा रही है। बहरहाल पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया है। आरोपियों के नाम सरजीत सिंह (58), टिंकू (29), सुमित कुमार (20), संजीव कुमार (47), निवासी गुरदासपुर, पंजाब बताए गए हैं। पुलिस ने सभी के खिलाफ विधिक कार्यवाही करते हुए उनका चालान कर दिया है।
July 6, 2026हेमवती नंदन विश्व विघालय से सम्बन्धित कई फर्जी दस्तावेज बरामद पौड़ी। उत्तराखण्ड में शिक्षा जगत से जुड़े एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा होने से तहलका मच गया है। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविघालय के नाम पर फर्जी मार्कशीट, डिग्रियां और अन्य श्ौक्षणिक दस्तावेज तैयार कर उनका इस्तेमाल करने वाले एक संगठित नेटवर्क का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। मामले में बड़ी कार्यवाही करते हुए पुलिस ने उत्तर प्रदेश के बिजनौर से एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है, जिसके कब्जे से विश्वविघालय से संबंधित कई फर्जी दस्तावेज बरामद किए गए हैं।शिक्षा जगत से जुड़े इस बड़े फर्जीवाड़े के मामले का खुलासा तब हुआ जब एचएनबी गढ़वाल केंद्रीय विश्वविघालय के परीक्षा नियंत्रक ने मार्च 2026 में श्रीनगर कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि विभिन्न सरकारी और गैर—सरकारी संस्थानों में कार्यरत अभ्यर्थियों की डिग्रियों और अंकतालिकाओं का सत्यापन विश्वविघालय से कराया जा रहा था। जब इन दस्तावेजों का विश्वविघालय के मूल रिकॉर्ड से मिलान किया गया तो कई मार्कशीट और डिग्रियां रिकॉर्ड से मेल नहीं खाईं। जांच में कई ऐसे दस्तावेज भी मिले जिनका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड विश्वविघालय के पास मौजूद नहीं था। विश्वविघालय प्रशासन की जांच में सामने आया कि विश्वविघालय के नाम, आधिकारिक मोहर, डिग्री प्रारूप और संबंधित अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षरों का इस्तेमाल कर नकली श्ौक्षणिक दस्तावेज तैयार किए जा रहे थे। इन दस्तावेजों का कथित तौर पर नौकरी और अन्य सरकारी कार्यों में उपयोग किया जा रहा था।मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्वविघालय प्रशासन ने कुलपति को जानकारी दी, जिसके बाद श्रीनगर कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत के आधार पर श्रीनगर कोतवाली में सम्बन्धित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गयी। कोतवाली श्रीनगर की विशेष टीम ने तकनीकी साक्ष्यों और स्थानीय पुलिस की मदद से उत्तर प्रदेश के बिजनौर में छापेमारी कर नामजद आरोपी कासिफ कलीम को गिरफ्तार कर लिया।पुलिस के अनुसार, आरोपी के कब्जे से गढ़वाल विश्वविघालय के नाम पर तैयार की गई कई फर्जी अंकतालिकाएं, कूटरचित डिग्रियां और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद हुए हैं। आरोपी को न्यायालय में पेश कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह पहले डीएवी पीजी कॉलेज, देहरादून में बीएससी का छात्र था। परीक्षा में असफल होने के बाद उसने खुद को योग्य साबित करने और नौकरी हासिल करने के उद्देश्य से फर्जी मार्कशीट और श्ौक्षणिक दस्तावेज तैयार करना शुरू कर दिया। पुलिस का मानना है कि यह अकेले व्यक्ति का मामला नहीं बल्कि एक संगठित फर्जी डिग्री नेटवर्क हो सकता है। अब जांच इस बात पर केंद्रित है कि अब तक कितने लोगों ने इन नकली दस्तावेजों का इस्तेमाल कर नौकरी या अन्य लाभ हासिल किए हैं और इस गिरोह में और कौन—कौन लोग शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
July 6, 2026नैनीताल। गौला पुल से छलांग लगाने वाले 17 वर्षीय किशोर प्रियांशु का शव एसडीआरएफ ने आज सुबह गहन सर्च अभियान के बाद बरामद कर लिया। रविवार शाम से ही एसडीआरएफ की टीम गौला नदी में बने चेक डैम के गहरे पानी में किशोर की लगातार तलाश कर रही थी, लेकिन देर रात तक कोई सफलता नहीं मिली।आज सुबह एक बार फिर एसडीआरएफ ने सर्च अभियान शुरू किया। कई घंटों की मशक्कत के बाद टीम ने गहरे पानी से प्रियांशु का शव बाहर निकाल लिया। सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस की टीम भी मौके पर पहुंच गई। तहसीलदार कुलदीप पांडे ने बताया कि मृतक की पहचान 17 वर्षीय प्रियांशु के रूप में हुई है, जो हल्द्वानी के मोतीनगर क्षेत्र का निवासी था और 12वीं कक्षा का छात्र था।पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है। यह पता लगाया जा रहा है कि प्रियांशु ने किन परिस्थितियों में गौला पुल से छलांग लगाई। पुलिस परिजनों और अन्य लोगों से पूछताछ कर घटना के कारणों का पता लगाने का प्रयास कर रही है।
July 6, 2026भीतरघातियों को बाहर का रास्ता, गुटबाजी आई सामने विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने दे दिया सख्त संदेश कांग्रेस ने आक्रामक तेवर के बीच की अपनों पर कार्रवाई अनुशासन के सहारे कांग्रेस संगठन को साधने की कवायद देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 की आहट के साथ ही प्रदेश कांग्रेस ने अपने संगठन को लेकर सख्त रुख अपनाना शुरू कर दिया है। एक ओर पार्टी भाजपा सरकार के खिलाफ आक्रामक तेवर अपनाए हुए है, वहीं दूसरी ओर उसने अपने ही कार्यकर्ताओं और नेताओं पर अनुशासन का डंडा चलाना शुरू कर दिया है। हाल के दिनों में पार्टी विरोधी गतिविधियों, सार्वजनिक बयानबाजी और संगठन के खिलाफ काम करने के आरोप में कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को बाहर का रास्ता दिखाया गया है। राजनीतिक गलियारों में कांग्रेस की इस कार्रवाई को विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को एकजुट रखने और अनुशासन स्थापित करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, यह कदम पार्टी के भीतर चल रही खींचतान और गुटबाजी को भी उजागर कर रहा है।प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व इस बार किसी भी कीमत पर अनुशासनहीनता को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं दिख रहा है। पार्टी नेताओं का मानना है कि 2022 के विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण से लेकर स्थानीय स्तर की गुटबाजी ने कांग्रेस को भारी नुकसान पहुंचाया था। कई सीटों पर पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ बगावत और अंदरूनी विरोध ने चुनावी गणित बिगाड़ दिया था। इसी अनुभव को देखते हुए प्रदेश नेतृत्व ने स्पष्ट संकेत दिया है कि चुनाव से पहले संगठन विरोधी गतिविधियों में शामिल किसी भी नेता या कार्यकर्ता पर कार्रवाई की जा सकती है।कांग्रेस इन दिनों महंगाई, बेरोजगारी, भू-कानून, पलायन, चारधाम यात्रा व्यवस्थाओं और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति पर काम कर रही है। लेकिन पार्टी नेतृत्व यह भी समझ रहा है कि यदि अंदरूनी कलह पर नियंत्रण नहीं हुआ तो भाजपा के खिलाफ आक्रामकता का राजनीतिक लाभ नहीं मिल पाएगा। यही कारण है कि कांग्रेस ने एक साथ दो मोर्चों पर लड़ाई शुरू की हैकृबाहर भाजपा के खिलाफ और भीतर असंतुष्ट एवं अनुशासनहीन नेताओं के खिलाफ। उत्तराखंड कांग्रेस लंबे समय से गुटबाजी की समस्या से जूझती रही है। पूर्व मुख्यमंत्री, वरिष्ठ नेताओं और क्षेत्रीय क्षत्रपों के अलग-अलग शक्ति केंद्रों ने कई बार संगठनात्मक फैसलों को प्रभावित किया है। ऐसे में पार्टी से कुछ कार्यकर्ताओं को बाहर करने भर से क्या गुटबाजी खत्म हो जाएगी, इस पर राजनीतिक विश्लेषकों की राय बंटी हुई है।राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अनुशासनात्मक कार्रवाई का संदेश तो जाएगा, लेकिन यदि असंतोष के कारणों का समाधान नहीं हुआ तो चुनाव नजदीक आते-आते बगावत के नए स्वर भी सामने आ सकते हैं। कांग्रेस की हालिया सक्रियता को टिकट की संभावित लड़ाई से भी जोड़कर देखा जा रहा है। चुनाव में अभी समय है, लेकिन कई विधानसभा क्षेत्रों में दावेदार सक्रिय हो चुके हैं। ऐसे में संगठन विरोधी गतिविधियों पर सख्ती को आगामी टिकट वितरण की तैयारी के रूप में भी देखा जा रहा है। पार्टी नेतृत्व नहीं चाहता कि 2027 से पहले किसी भी स्तर पर ऐसा माहौल बने, जिससे यह संदेश जाए कि कांग्रेस अभी भी अपने अंदरूनी संघर्षों से बाहर नहीं निकल पाई है।कांग्रेस की ताजा कार्रवाई का राजनीतिक संदेश स्पष्ट हैकृजो पार्टी लाइन से हटेगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। लेकिन इसके साथ ही पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह भी है कि अनुशासन और असंतोष के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। क्योंकि उत्तराखंड की राजनीति में कांग्रेस की सबसे बड़ी कमजोरी भाजपा नहीं, बल्कि कई बार उसकी अपनी अंदरूनी खींचतान रही है। ऐसे में विधानसभा चुनाव से पहले अपने ही कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई पार्टी को अनुशासित संगठन का चेहरा दे सकती है, लेकिन यदि यह असंतोष को और बढ़ाती है तो इसका उल्टा असर भी पड़ सकता है।वही दूसरी ओर भाजपा लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की रणनीति पर काम कर रही है, वहीं कांग्रेस सत्ता में लौटने के लिए हर मोर्चे पर संघर्ष का संदेश देना चाहती है। ऐसे में पार्टी का यह सख्त रुख आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है। अब देखने वाली बात यह होगी कि कांग्रेस की यह अनुशासनात्मक मुहिम संगठन को मजबूत करती है या फिर चुनाव से पहले नए असंतोष और नए समीकरणों को जन्म देती है।
July 6, 2026देश में पेट्रोल में एथनाल मिश्रण बढ़ाने की नीति को सरकार ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है। तर्क दिया जा रहा है कि इससे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटेगी, विदेशी मुद्रा की बचत होगी, प्रदूषण कम होगा और गन्ना तथा मक्का उत्पादक किसानों को अतिरिक्त आय मिलेगी। इन उद्देश्यों से असहमत होने का कोई कारण नहीं है। दुनिया के कई देश वैकल्पिक ईंधन की ओर बढ़ रहे हैं और भारत को भी ऊर्जा सुरक्षा के लिए ऐसे विकल्प तलाशने ही होंगे। लेकिन किसी भी नीति की सफलता केवल उसके घोषित उद्देश्यों से नहीं, बल्कि उसके वास्तविक प्रभावों से तय होती है। इसी कसौटी पर एथनॉल मिश्रण की नीति कई सवालों के घेरे में दिखाई देती है। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यदि पेट्रोल में अपेक्षाकृत सस्ता एथनाल मिलाया जा रहा है, तो उपभोक्ताओं को इसका लाभ क्यों नहीं मिल रहा? पिछले कुछ वर्षों में पेट्रोल में एथनाल मिश्रण का प्रतिशत तेजी से बढ़ा है, लेकिन पेट्रोल की कीमतों में वैसी कोई राहत दिखाई नहीं दी, जिसकी अपेक्षा की जा रही थी। आम उपभोक्ता के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि सरकार और तेल कंपनियां आयातित तेल पर निर्भरता कम करके बचत कर रही हैं, तो उस बचत का हिस्सा आखिर जनता तक क्यों नहीं पहुंच रहा? इस नीति का दूसरा पक्ष वाहनों की कार्यक्षमता से जुड़ा है। विशेषज्ञों का कहना है कि एथनाल की ऊर्जा क्षमता पेट्रोल की तुलना में कम होती है। इसका सीधा अर्थ यह है कि अधिक एथनाल मिश्रित ईंधन से कुछ वाहनों की माइलेज प्रभावित हो सकती है। यदि किसी वाहन को पहले जितनी दूरी तय करने के लिए अधिक ईंधन की जरूरत पड़ेगी, तो इसका सीधा असर उपभोक्ता की जेब पर पड़ेगा। देश में करोड़ों दोपहिया और चारपहिया वाहन ऐसे हैं, जिन्हें उच्च एथनाल मिश्रित ईंधन के अनुरूप तैयार नहीं किया गया है। ऐसे में इंजन की कार्यक्षमता, रख-रखाव और मरम्मत की बढ़ती लागत भी आम आदमी के लिए चिंता का विषय है। यह चिंता भी कम महत्वपूर्ण नहीं है कि एथनाल उत्पादन के लिए कृषि क्षेत्र पर दबाव बढ़ रहा है। गन्ने और मक्का जैसी फसलों का बड़ा हिस्सा अब ईंधन उत्पादन की ओर जा रहा है। भारत जैसे देश में, जहां खाद्य सुरक्षा अभी भी एक बड़ी चुनौती है, वहां खाद्यान्न और ईंधन के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं होगा। यदि भविष्य में कृषि संसाधनों का बड़ा हिस्सा ईंधन उत्पादन की ओर मुड़ता है, तो इसका असर खाद्य पदार्थों की उपलब्धता और कीमतों पर भी पड़ सकता है। महंगाई से पहले ही जूझ रहे आम नागरिक के लिए यह एक नई समस्या बन सकती है। पानी की बढ़ती कमी के बीच एथनॉल उत्पादन का एक और पहलू भी चर्चा में है। गन्ना एक ऐसी फसल है, जिसमें अत्यधिक पानी की आवश्यकता होती है। देश के कई राज्यों में भूजल स्तर लगातार गिर रहा है। ऐसे में यदि एथनाल उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए जल-गहन फसलों पर अत्यधिक निर्भरता बढ़ती है, तो इसके दूरगामी पर्यावरणीय परिणाम भी सामने आ सकते हैं। इसलिए यह आवश्यक है कि ऊर्जा सुरक्षा की नीति पर्यावरणीय संतुलन और जल संरक्षण की चुनौतियों को नजरअंदाज न करे। सरकार यह अवश्य कह सकती है कि एथनाल मिश्रण से देश को दीर्घकालिक लाभ होंगे और आयात बिल में कमी आएगी। यह तर्क अपनी जगह सही भी है, लेकिन किसी भी आर्थिक सुधार का उद्देश्य केवल सरकारी बचत नहीं हो सकता। उसका अंतिम लाभ आम नागरिक तक पहुंचना चाहिए। यदि जनता को महंगा ईंधन, कम माइलेज और बढ़ती रख-रखाव लागत का सामना करना पड़े, तो फिर यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि इस नीति का वास्तविक लाभार्थी कौन है। यह भी आवश्यक है कि सरकार एथनाल मिश्रण के आर्थिक और तकनीकी प्रभावों पर एक व्यापक और पारदर्शी अध्ययन सार्वजनिक करे। जनता को यह बताया जाना चाहिए कि देश को अब तक कितनी विदेशी मुद्रा की बचत हुई, किसानों की आय में कितना वास्तविक सुधार आया और उपभोक्ताओं को क्या लाभ मिला। इसके साथ ही, पुराने वाहनों के लिए क्या व्यवस्था होगी और बढ़ते एथनाल मिश्रण से संभावित तकनीकी समस्याओं से निपटने के लिए क्या रोडमैप है। भारत को ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ना ही होगा। वैकल्पिक ईंधन भी समय की आवश्यकता है, लेकिन किसी भी नीति की सफलता का अंतिम पैमाना यही होगा कि वह आम आदमी के लिए कितनी लाभकारी साबित हुई। ऊर्जा सुरक्षा का लक्ष्य स्वागतयोग्य है, लेकिन यह लक्ष्य तब और सार्थक होगा, जब उसके लाभ का बोझ जनता की जेब पर न पड़े, बल्कि उसे भी इस परिवर्तन का प्रत्यक्ष लाभ महसूस हो। अन्यथा एथनाल मिश्रण की यह महत्वाकांक्षी नीति जनता के मन में एक असहज प्रश्न छोड़ती रहेगीकृ कि क्या देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की कीमत आम उपभोक्ता ही चुका रहा है?