हमारे देश की राजनीति भी क्या खूब है? अनेकता में एकता की अदभुत संस्कृत के लिए विश्व भर में अपनी अलग पहचान रखने वाले इस देश के आम लोग न तो धर्म और जाति अथवा क्षेत्र के लिए लड़ना चाहते हैं और न लड़ाना चाहते हैं। देश के संविधान निर्माताओं ने संविधान की परिभाषा और प्रस्तावना में जिस धर्मनिरपेक्ष शब्द का इस्तेमाल किया है वही वास्तव में इस देश के समाज की मूल भावना है। तमाम जातियों, धर्मो और संप्रदायों वाले इस देश में संविधान द्वारा सभी को समान अधिकार प्रदान किए गए हैं। लेकिन देश के राजनीतिक और नेताओं द्वारा अपने राजनीतिक सरोकारों को साधने के लिए जिस तरह से देश के लोगों को डराया जाता रहा है और लड़ाया जाता रहा है वह भी अपने आप में एक अजब—गजब इतिहास रहा है। इसके लिए हम उस इतिहास के पन्नों को नहीं पलटना चाहेंगे। ताजा उदाहरण भर के लिए कुछ हालिया घटनाओं पर ही गौर करना चाहेंगे। 18वीं लोकसभा के चुनाव में प्रचार के दौरान हमने देश के प्रधानमंत्री को यह कहते सुना कि अगर आपने कांग्रेस को वोट दिया तो वह तुम्हारा आरक्षण छीन कर अधिक बच्चे पैदा करने वालों को दे देंगे वह तुम्हारा मंगलसूत्र और भ्ौंस छीन ले जाएंगे। वह हिंदुओं को डर दिखाकर क्या कहना चाहते थे या इसके पीछे उनकी क्या मंशा थी? इसे बताने की जरूरत नहीं है। कांग्रेस के नेता जो इस बार पूरे प्रचार अभियान के दौरान हाथ में संविधान की प्रति लेकर प्रचार करते दिखे और सामाजिक समानता और न्याय की बात कर रहे थे उससे भाजपा के नेता भयभीत होकर लोगों को डराने के लिए काम कर रहे थे। वर्तमान सरकार के पहले ही सदन सत्र में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने सभी धर्मो के देवी—देवताओं और महापुरुषों की तस्वीर दिखाकर सदन में डरो मत और डराओ मत की आवाज बुलंद की। विपक्ष में बैठने के बाद भी उनकी आवाज की प्रतिध्वनि पूरे देश में सुनाई दी। अभी कावड़ यात्रा शुरू होने से एक—दो दिन पूर्व कावड़ यात्रा मार्गों पर सभी दुकानदारों से बोर्ड पर अपनी पहचान सार्वजनिक करने के लिए अपने नाम लिखने का सरकारी फरमान जारी हुआ यह अलग बात है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी गई लेकिन इसे लेकर सवाल अभी भी बना हुआ है कि इसके पीछे क्या सांप्रदायिक अलगाव की भावना निहित नहीं थी? आज अखबारों में पिरान करियर की एक तस्वीर छपी हुई है। जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। इस तस्वीर में यूपी, हरियाणा और पंजाब के कुछ कांवड़िया दरगाह साबिर पाक पर जियारत कर रहे हैं। इन कांवड़ियों के दरगाह पहुंचने पर मुस्लिम समुदाय के लोगों द्वारा उनका भव्य स्वागत किया गया। इन कॉवड़ियों का भी कहना था कि उन्होंने आपसी भाईचारे और सांप्रदायिक सद्भावना को बढ़ाने के लिए ऐसा किया। इस देश का सच यही है कि यहां हर आम आदमी अमन चैन और सद्भाव के साथ रहना चाहता है। कंावड़ बनाने का काम करने से लेकर कांवड़ियों के लिए सेवा शिविर लगाकर उनकी सेवा करने का काम तमाम मुस्लिम लोग करते आए हैं अपवाद के तौर पर हर जाति और धर्म में कुछ लोग असामाजिक या उपद्रवी हो सकते हैं लेकिन ऐसे लोगों से निपटने के लिए पुलिस और कानून भी है। आजादी के 77 सालों में इस देश की एकता अखंडता और सर्व धर्म समभाव की संस्कृति को तोड़ने के कलुषित प्रयास किए जाते रहे हैं। लेकिन इसे अक्षुण बनाने वालों की भी कोई कमी नहीं रही है। अच्छा हो कि देश के नेता भी अब डराने और लड़ाने की राजनीति छोड़कर सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़े। क्योंकि शांति व सद्भाव के साथ ही विकास की यात्रा का सरल व संभव बना सकती है।



