August 25, 2026देहरादून। 1- राष्ट्रीय सहकारी नीति, 2025 के अनुरूप राज्य में सहकारिता क्षेत्र के विकास हेतु उत्तराखण्ड राज्य सहकारी नीति, 2026 प्रख्यापित किये जाने के सम्बन्ध में।सहकारिता मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा ‘सहकार से समृद्धि‘ की परिकल्पना को साकार करते हुए सतत् सहकारी विकास तथा देशभर में सहकारी आन्दोलन को नई दिशा प्रदान करने के लिए राष्ट्रीय सहकारी नीति, 2025 तैयार की गयी है। इसी परिप्रेक्ष्य में राज्य की भौगोलिक, सामाजिक एवं आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप सहकारिता क्षेत्र को सुदृढ़, प्रभावी बनाने जाने तथा राज्य के अन्तर्गत सहकारिता क्षेत्र के सतत् विकास हेतु राष्ट्रीय सहकारी नीति 2025 के अनुरूप राज्य में एक सहकारिता नीति तैयार की जा रही है, जो सहकारी संस्थाओं को अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी, तकनीक सक्षम एवं व्यावसायिक रूप से सक्षम बनाने हेतु मार्गदर्शक दस्तावेज का कार्य करेगी।भारत सरकार द्वारा दिनांक 24 जुलाई, 2025 को राष्ट्रीय सहकारिता नीति-2025 का अनावरण किया गया, जिसका उद्देश्य ‘सहकार से समृद्धि‘ के दृष्टिकोण को व्यवहारिक रूप देने के साथ-साथ सहकारिता क्षेत्र को विकसित भारत-2047 के लक्ष्य से जोड़ना है। नीति के माध्यम से जहाँ एक ओर सहकारी संस्थाओं को अधिक सशक्त, पारदर्शी, पेशेवर, प्रतिस्पर्धी एवं प्रौद्योगिकी-सक्षम बनाना है वहीं दूसरी ओर इसके माध्यम से ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में रोजगार एवं आय के नए अवसरों को सृजित कर समावेशी विकास के लक्ष्य को प्राप्त करना है। उक्त प्रस्तावित सहकारिता नीति का मुख्य उद्देश्य सहकारी संस्थाओं को आर्थिक एवं तकनीकी रूप से सक्षम एवं सुदृढ़ बनाना, पारदर्शी एवं व्यावसायिक रूप से आत्मनिर्भर बनाते हुए कृषि एवं सम्बद्ध क्षेत्रों में मूल्य-श्रृंखला विकास, महिला एवं युवा सशक्तिकरण, रोजगार सृजन, वित्तीय समावेशन तथा पलायन से पुर्नवास की दिशा में ठोस पहल करना है।उत्तराखण्ड राज्य सहकारिता नीति को राष्ट्रीय सहकारिता नीति, 2025 के अनुरूप राज्य की आवश्यकताओं एवं स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। प्रस्तावित नीति में प्रमुख रूप से सात रणनीतिक मिशन निर्धारित किये गये है, जिसमें नींव का सशक्तीकरण, जीवंतता को प्रोत्साहित करना, सहकारी संस्थाओं को भविष्य के लिए तैयार करना, समावेशिता तक पहुँच का विस्तार करना, नये एवं उभरते क्षेत्रों में सहकारिता का विस्तार करना, युवा पीढ़ी को सहकारी विकास हेतु तैयार करना तथा आर्थिक व्यवहार्यता एवं विविधीकरण शामिल है। अतः इन समस्त उद्देश्यों को पूर्ण किये जाने हेतु राज्य स्तर पर ‘उत्तराखण्ड राज्य सहकारिता नीति, 2026‘ को प्रख्यापित किये जाने का निर्णय लिया गया है।2- वित्त (वे०आ०-सा०नि०) अनुभाग-07 की अधिसूचना संख्या-290/XXVII (7) 50(16) दिनांक 28 दिसम्बर, 2016 के द्वारा राज्य सरकार के अधीन कार्यरत सरकारी सेवकों के वेतन निर्धारण हेतु प्रख्यापित ‘उत्तराखण्ड सरकारी सेवक वेतन नियम, 2016‘ के साथ संलग्न अनुसूची-1 में वेतन मैट्रिक्स की तालिकायें निर्गत की गयी थी। प्रचलित वेतन मैट्रिक्स की तालिकाओं में लेवल-13 क के उपरान्त सीधे लेवल-15 एवं लेवल-16 का प्रावधान है, जबकि भारत सरकार में वेतन लेवल-13 क के पश्चात वेतन लेवल-14 एवं वेतन लेवल-15 अंकित है।अतः उत्तराखण्ड सरकारी सेवक वेतन नियम, 2016 के अनुसूची-1 में वेतन मैट्रिक्स में उल्लिखित वेतनमान रू0 1,44,200-2,18,200 के लिए वेतन लेवल-15 के स्थान पर वेतन लेवल-14 एवं वेतनमान रू0 1,82,200-2,24,100 के लिए वेतन लेवल-16 के स्थान पर वेतन लेवल-15 संशोधित किया जाना है। साथ ही विभागीय पदीय संरचनाओं / सेवा नियमावलियों में उपरोक्तानुसार जहां-जहां वेतन लेवल-15 एवं 16 अंकित है, के स्थान पर क्रमशः वेतन लेवल-14 एवं 15 समझा / पढ़ा जायेगा।3-उत्तराखण्ड मोटरयान कराधान सुधार अधिनियम, 2003 की धारा-4 की उपधारा (5) के अधीन मोटर यान पर ग्रीन सेस हेतु निर्गत अधिसूचना में सेस की छूट को समाप्त किये जाने के संबंध में। तथा सी०एन०जी० वाहनों को देय ग्रीनउत्तराखण्ड मोटरयान कराधान सुधार अधिनियम एवं नियमावली, 2003 के अन्तर्गत वर्तमान में श्प्रवेश उपकरश् तथा ‘ग्रीन सेस‘ की दरों को सम्मिलित करते हुए उत्तराखण्ड राज्य में पंजीकृत एवं राज्य में प्रवेश करने वाले अन्य राज्य के व्यवसायिक एवं निजी वाहनों हेतु ग्रीन सेस की दरें निर्धारित की गयी हैं। हाईब्रिड अथवा सी०एन०जी० चालित परिवहन यानों को प्रोत्साहित किए जाने हेतु तत्समय देय मोटरयान कर से छूट प्रदान की गई है। वर्तमान में अधिकांश हानि, सी०एन०जी० तथा सामान्य वाहन यथा ICE (Internal Combustion Engine) वाहन ही हैं, जिनके द्वारा संचालन के दौरान ईधन खपत के साथ-साथ बैटरी का भी उपयोग किया जाता है, जिससे तथा सी०एन०जी० प्रकार के यानों की लोकप्रियता में बढोत्तरी हुई है। वर्तमान में अधिकांश हाईब्रिड तथा सी०एन०जी० प्रकार के वाहन ही बाजार में प्रचलन में आ रहे हैं। ऐसी परिस्थितियों में तथा सी०एन०जी० प्रकार के वाहनों को मोटरयान कर से छूट प्रदान किए जाने पर राजस्व पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है, जिसके दृष्टिगत उपरोक्त प्रकार के वाहनों को क्रमबद्ध तरीके से कराधान में लाया जाना आवश्यक है।4- ‘उत्तराखण्ड चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सांख्यिकीय संवर्ग समूह क, ख एवं ग सेवा नियमावली 2026‘ के सम्बन्ध में।उत्तराखण्ड चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभागान्तर्गत सांख्यिकीय संवर्ग के अन्तर्गत सेवा में भर्ती और उसमें नियुक्त व्यक्तियों की सेवा शर्तों को विनियमित किये जाने के उद्देश्य से ‘उत्तराखण्ड चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सांख्यिकीय संवर्ग समूह क, ख एवं ग सेवा नियमावली 2026‘ के प्रख्यापन का प्रस्ताव है।5- प्रदेश में आम जनमानस को शीघ्र स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ प्रदान करने और विभागीय स्तर पर विशेषज्ञ उपलब्ध न होने को दृष्टिगत रखते हुए औषधियों, सर्जिकल सामग्री, रसायन, उपकरण एवं इंप्लांटस की समयबद्ध एवं पारदर्शी अधिप्राप्ति हेतु उत्तराखण्ड मेडिकल सप्लाईज कॉर्पाेरेशन का गठन का प्रस्ताव मंत्रिमण्डल के विचारार्थ प्रस्तुत किया गया है जिस पर मंत्रिमण्डल ने विभागीय प्रस्ताव पर सहमति की गयी है।6- उत्तराखण्ड राज्य में एन०सी०डी०सी० (राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र) शाखा की स्थापना से राज्य में रोग निगरानी, प्रकोप महामारी की जांच और प्रकोप से निपटाने के लिए त्वरित प्रतिक्रिया की क्षमता और दक्षता में और वृद्धि होगी। राज्य स्तर पर निदान सुविधाओं को बढ़ावा मिलेगा और प्रत्येक शाखा में बी०एस०एल०-3 स्तर की सुविधाए उपलब्ध होंगी। राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों में प्रस्तावित शाखाएं मुख्यालय के साथ-साथ अन्य राज्य की शाखाओं और क्षेत्रीय केंद्रों से जुड़ी होंगी। राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) नई दिल्ली, भारत सरकार को राजकीय मेडिकल कॉलेज, हरिद्वार में अवस्थित 65 एकड भूमि में से 01 एकड़ भूमि को 99 वर्ष की लीज (रू0 01) पर लीज पर दिये जाने के प्रस्ताव पर मा० मंत्रिमण्डल द्वारा सहमति प्रदान की गयी।7-‘उत्तराखण्ड कारागार उप कारापाल अधीनस्थ (अराजपत्रित) सेवा (संशोधन) नियमावली, 2026‘ का प्रख्यापन।कारागार प्रशासन एवं सुधार विभाग, उत्तराखण्ड की […]