May 1, 20261100 कन्याओं का पूजन व माँ राजेश्वरी का अभिषेक अल्मोड़ा। अल्मोड़ा जनपद के डोल स्थित आश्रम में आयोजित श्री कल्याणिका हिमालय देवस्थानम न्यास के श्री पीठम स्थापना महोत्सव कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने 1100 कन्याओं का पूजन कर माँ राजेश्वरी का अभिषेक एवं पूजा—अर्चना की तथा प्रदेश एवं देश की सुख—समृद्धि की कामना की।डोल आश्रम में आगमन पर मुख्यमंत्री द्वारा आश्रम परिसर में स्थापित श्रीयंत्र एवं यहां संचालित आध्यात्मिक गतिविधियों का अवलोकन किया गया। उन्होंने कहा कि यहाँ स्थापित दुनिया के सबसे बड़े श्रीयंत्र को देखकर एक विशेष आध्यात्मिक अनुभूति होती है। उन्होंने कहा कि बाबा कल्याणदास की साधना एवं तपस्या के कारण यह स्थान आज पूरे विश्व में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुका है और आध्यात्मिक चेतना के प्रसार का एक प्रमुख केंद्र बन गया है। साथ ही उन्होंने बाबा कल्याणदास द्वारा वैश्विक स्तर पर आध्यात्मिक चेतना के प्रसार हेतु किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आश्रम धार्मिक आस्था, आध्यात्मिक साधना एवं सांस्कृतिक चेतना का प्रमुख केंद्र बन चुका है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर आध्यात्मिक अनुभूति प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयासरत है और चारधाम यात्रा में प्रतिवर्ष बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या प्रदेश में विकसित हो रही बेहतर व्यवस्थाओं एवं सुविधाओं का परिणाम है।कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा, विधायक मोहन सिंह मेहरा, विधायक मनोज तिवारी, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल, भाजपा जिलाध्यक्ष महेश नयाल, जिलाधिकारी अंशुल सिंह, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक चंद्रशेखर आर घोड़के, मुख्य विकास अधिकारी रामजीशरण शर्मा सहित अन्य अधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
May 1, 2026श्रद्धालुओं ने लगाई हर हर गंगे के जयघोष के साथ डुबकी हरिद्वार। बुद्ध पूर्णिमा के पर्व पर हरिद्वार में हरकी पैड़ी, मालवीय द्वीप, सुभाष घाट, गौ घाट, रोडीबेलवाला घाट सहित, विभिन्न घाटों पर स्नान के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़ पड़ें। सुबह पौ फटने से ही स्नान और पूजन का क्रम चल रहा है। हर—हर गंगे और मां गंगा के जयकारों के साथ श्रद्धालु गंगा की पवन सलिला में पुण्य की डुबकी लगा रहे हैं।बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर धर्मनगरी हरिद्वार में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है। हर की पौड़ी सहित गंगा घाटों पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। देश—विदेश से आए श्रद्धालुओं ने गंगा में आस्था की डुबकी लगाकर सुख—समृद्धि और शांति की कामना की। हर हर गंगे के जयघोष से पूरा गंगा घाट क्षेत्र गूंज उठा, जिससे माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो गया।एसएसपी हरिद्वार नवनीत भुल्लर का कहना है कि श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। घाटों पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। वहीं ड्रोन कैमरों और सीसीटीवी के जरिए लगातार निगरानी रखी जा रही है। इसके साथ ही भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बैरिकेडिंग और ट्रैफिक डायवर्जन की भी विशेष व्यवस्था लागू की गई है, ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था ना हो। वहीं हरिद्वार स्थित नारायणी शिला के मुख्य सेवक प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित मनोज त्रिपाठी के अनुसार हिंदू पंचांग के वैशाख मास की पूर्णिमा का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। इसे बुद्ध पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि इसी पावन तिथि पर भगवान गौतम बुद्ध का जन्म हुआ था। यह तिथि हिंदू धर्म के साथ—साथ बौद्ध धर्म में भी अत्यंत पवित्र मानी गई है।
May 1, 2026उद्योगपति गौतम अडानी पहुंचे केदारधाम रूद्रप्रयाग। केदारनाथ धाम में अव्यवस्थाओं और वीआईपी दर्शन को लेकर तीर्थ पुरोहितों का पारा चढ़ गया। उन्होंने बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया। साथ ही वीआईपी गेट बंद करने की मांग उठाई। जिसका वीडियों सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।केदारनाथ मंदिर परिसर में तीर्थपुरोहितों ने कहा कि वीआईपी कल्चर को तुरंत समाप्त किया जाए। उनका कहना है कि विशेष लोगों को दी जा रही प्राथमिकता से आम श्रद्धालुओं को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। तीर्थपिरोहितों ने बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और मुर्दाबाद के नारे भी लगाए।बता दें कि बीकेटीसी और जिला प्रशासन का यह दावा है कि इस बार यात्रा में वीईआईपी कल्चर खत्म किया गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी यह कहते है कि सभी श्रद्धालु एक समान हैं, किसी को वीआईपी ट्रीटमेंट नहीं दिया जाएगा। बावजूद इसके केदारनाथ धाम में प्रदर्शन की तस्वीरें यह बताने के लिए काफी है कि इन आदेशों का कितना पालन हो रहा है।देश के प्रमुख उघोगपति गौतम अडानी ने आज सुबह केदारनाथ धाम में दर्शन किए। इस अवसर पर उनके साथ उनकी पत्नी भी मौजूद रहीं। अपनी शादी की 40वीं वर्षगांठ के मौके पर दोनों ने भगवान शिव का जलाभिषेक कर आशीर्वाद लिया। अडाणी सुबह दिल्ली से देहरादून पहुंचे और वहां से निजी हेलिकॉप्टर के जरिए केदारनाथ धाम पहुंचे। वीआईपी आगमन को देखते हुए केदारनाथ धाम क्षेत्र में सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन अलर्ट रहा। माना जा रहा है कि अडानी को दर्शन के लिए वीआईपी सुविधा प्रदान की गई, जिससे तीर्थपुरोहितों में नाराजगी व्याप्त है। केदारनाथ दर्शन के बाद अडानी ने प्रस्तावित सोनप्रयाग—केदारनाथ रोपवे परियोजना का हवाई सर्वे भी किया।
May 1, 2026खेत की मेड़ पर ‘डाइनिंग टेबल’ आपसी मेलजोल और प्रेम का सबसे बड़ा प्रतीक है ‘पंगत’ पहाड़ की परंपराकृमें एक साथ बैठकर भोजन करने की प्रथा रिश्तों, श्रम और सादगी का यह उत्सव आज भी है जीवित पहली ग्रास अक्सर जमीन पर देवता या प्रकृति को देते हैं देहरादून। उत्तराखंड के ऊंचे पहाड़ों पर जब धूप की पहली किरणें सीढ़ीदार खेतों को छूती हैं, तो केवल खेती का काम शुरू नहीं होता, बल्कि एक सांस्कृतिक उत्सव की शुरुआत होती है। पहाड़ में खेती केवल पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि आपसी मेलजोल और प्रेम का सबसे बड़ा प्रतीक है। यहाँ की एक सुंदर परंपरा हैकृपंगत में बैठकर खेत में ही भोजन करना।खेतों में एक साथ बैठकर खाना खाने की यह परंपरा उत्तराखंड के पहाड़ों की आत्मा है। यह हमें सिखाती है कि सादगी में भी खुशी होती है और मिल-बांटकर जीने में ही असली समृ(ि छिपी है। पहाड़ की यह परंपरा आज भी रिश्तों को मजबूत करने और जीवन को सहज बनाने का संदेश देती है। आज पलायन के कारण पहाड़ के कई खेत बंजर हो और मकान बीरान हो गए हैं, लेकिन जो लोग आज भी वहाँ टिके हैं, उन्होंने इस परंपरा को जीवित रखा है। खेत में बैठकर एक साथ भोजन करना हमें सिखाता है कि खुशी अकेले नहीं, बल्कि मिल-बाँटकर जीने में है। मिट्टी की वह सोंधी खुशबू और अपनों के साथ साझा किया गया वह पिसा हुआ नमक आज भी हर उस पहाड़ी की यादों में बसा है जो अपने गांव से दूर शहर में बैठा है।उत्तराखंड के पहाड़ों में जीवन सिर्फ संघर्ष की कहानी नहीं, बल्कि सामूहिकता और अपनत्व की जीवंत परंपराओं का भी प्रतीक है। इन्हीं परंपराओं में एक खूबसूरत परंपरा हैकृखेतों में काम के बीच एक साथ बैठकर खाना खाना। यह सिर्फ भूख मिटाने का समय नहीं, बल्कि रिश्तों को सींचने, थकान मिटाने और जीवन को साझा करने का अवसर होता है। पहाड़ की कठिन भौगोलिक परिस्थिति में अकेले खेती करना लगभग असंभव है। इसलिए यहाँ सामूहिक मदद की परंपरा है। जब गाँव में किसी एक के खेत की रोपाई या कटाई होती है, तो पूरा गाँव अपनी कुदाल और दरांती लेकर पहुँच जाता है।अकेले कुमाऊं के कुछ हिस्सों में खेतों में काम के दौरान हुड़का बजाकर लोकगीत गाए जाते हैं। धुनों की ताल पर हाथ चलते हैं और थकान का नामोनिशान नहीं होता। दोपहर होते-होते जब सूरज सिर पर आ जाता है, तो काम रोक दिया जाता है। किसी बड़े बांज या बुरांश के पेड़ की छाँव में, या सीधे खेत की मेड़ पर ही बैठने का इंतजाम होता है। खेत में बैठकर खाने का स्वाद किसी फाइव-स्टार होटल के खाने से कहीं ऊपर होता है। यह भोजन केवल भूख मिटाने के लिए नहीं होता, बल्कि यह गाँव की सोशल नेटवर्किंग का समय होता है। बुजुर्ग यहाँ बैठकर पुरानी कहानियाँ सुनाते हैं। युवा अपनी भविष्य की योजनाओं और शहर की बातों पर चर्चा करते हैं। महिलाएं अपने लोकगीतों जैसे झुमैलो या चांचरी के जरिए सुख-दुख साझा करती हैं। भोजन शुरू करने से पहले, पहली ग्रास कौर अक्सर जमीन पर देवता या प्रकृति के नाम से रखी जाती है। यह इस बात का प्रतीक है कि हम जो खा रहे हैं, वह उस मिट्टी की ही देन है।हालांकि, बदलते समय और पलायन के कारण यह परंपरा धीरे-धीरे कम होती जा रही है। गांवों में लोगों की संख्या घट रही है और खेती का दायरा भी सिमट रहा है। इसके बावजूद जहां भी यह परंपरा जीवित है, वहां यह आज भी उतनी ही गर्मजोशी और आत्मीयता के साथ निभाई जाती है। प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों में जून से लेकर अगस्त तक धान की रौपाई के समय यह परंपरा हर जगह दिख जाती है। इसके साथ ही आज के दौर में जहां शादी व अन्य समारोहों में टेंट का प्रचलन बढ़ गया है। इसके बाद भी पहाड़ के गांवों में आज भी कई स्थानों पर इस परंपरा को निभाया जाता है। बदलते दौर में पहाड़ को अगर आपने करीब से देखना है तो आ जाइए मेने पहाड़।
May 1, 2026नैनीताल। हल्द्वानी के नजदीक भीमताल के रानीबाग क्षेत्र में आज सुबह एक तेंदुआ पिंजरे में फंसा हुआ मिला। तेंदुए के फंसे होने की सूचना ग्रामीणों ने वन विभाग के अधिकारियों को दी। वन विभाग की टीम ने तेंदुए को रानीबाग रेस्क्यू सेंटर भेज दिया है। तेंदुए के पकड़े जाने से ग्रामीणों को राहत मिली है। गांव के लोगों ने बताया कि तेंदुए के लगातार घरों के पास दिखाई देने से ग्रामीणों में भय का माहौल था। आज तेंदुए के पिंजरे में फंसते ही उसे रानीबाग रेस्क्यू सेंटर भेजा गया है। वहीं दो दिन पहले वन विभाग की टीम ने भीमताल के ज्योली गांव से बाघ को ट्रैंकुलाइज करने और मोरा गांव में पिंजरे में फंसे तेंदुए को भी रानीबाग रेस्क्यू सेंटर भेजा है। साथ ही खुटानी में एक बाइक की टक्कर से बाइक पर फंसे तेंदुए को टैंकुलाइज कर रानीबाग में रखा गया है।
May 1, 2026देहरादून। बसंत विहार क्षेत्र के कांवली माड़ी इलाके में घर—घर जाकर ईसाई धर्म का प्रचार करने और कथित तौर पर प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराने का मामला सामने आया है। स्थानीय निवासियों और वीर सावरकर संगठन के पदाधिकारियों ने इस गतिविधि के खिलाफ बसंत विहार पुलिस को तहरीर सौंपी गयी है।पुलिस को दी गयी तहरीर के अनुसार सीतापुरी (निवासी बनियावाला) और सुमित्रा (निवासी कांवली गांव) नाम की दो महिलाएं कांवली माड़ी क्षेत्र में सक्रिय थीं। आरोप है कि वे स्थानीय हिंदू महिलाओं को ईसाई धर्म अपनाने के फायदे बताते हुए प्रलोभन दे रही थीं। स्थानीय निवासी दीपक कुमार ने इसकी सूचना वीर सावरकर संगठन के कार्यकर्ता इंद्रजीत को दी। इसके बाद संगठन के सदस्य मौके पर पहुंचे, जहां दोनों महिलाएं लोगों को ईसाई धर्म अपनाने के लाभ बता रही थीं। स्थानीय लोगों ने तुरंत 112 पर कॉल करके पुलिस को सूचित किया। पुलिस की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक दोनों महिलाएं वहां से चली गई थीं। बाद में पुलिस ने विकास मॉल क्षेत्र से दोनों महिलाओं को हिरासत में लेकर बसंत विहार थाने पहुंचाया। वीर सावरकर संगठन के संस्थापक अध्यक्ष कुलदीप स्वेडिया ने अपनी तहरीर में मांग की है कि दोनों महिलाओं के खिलाफ उत्तराखंड फ्रीडम ऑफ रिलिजन एक्ट (धर्म स्वतंत्रता कानून) के तहत सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रचार से समाज में अशांति फैल सकती है और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कड़ी कानूनी कार्रवाई जरूरी है। उत्तराखंड सरकार ने जबरन या प्रलोभन वाले धर्म परिवर्तन को रोकने के लिए सख्त कानून लागू किया हुआ है। वर्तमान प्रावधानों के अनुसार, प्रलोभन, धोखाधड़ी या जबरदस्ती से धर्मांतरण कराने पर 3 से 10 वर्ष तक की सजा और न्यूनतम 50,000 रुपये का जुर्माना हो सकता है। यदि मामले में महिला, नाबालिग, अनुसूचित जाति/जनजाति या दिव्यांग व्यक्ति शामिल हो तो सजा 5 से 14 वर्ष तक बढ़ सकती है। बड़े पैमाने पर या विदेशी फंडिंग से जुड़े मामलों में सजा और भी कड़ी है। पुलिस ने दोनों महिलाओं को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। बसंत विहार थाना प्रभारी शेंकी कुमार ने बताया कि मामले की विस्तृत जांच की जा रही है। सभी पक्षों से बयान दर्ज करने और सबूतों की जांच के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।