April 17, 2026वीडियो कॉल के जरिए अधिकारियों को दिखाई स्थिति सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायत की पड़ताल करने खुद मौके पर पहुंचे सीएम देहरादून। सीएम हेल्पलाइन पर आई शिकायत को फाइलों में हल करने के बजाय, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को खुद मौके पर जाकर जन समस्याओं की पड़ताल की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कार्य में लापरवाही पर नाराजगी जताते हुए, अधिकारियों को समन्वय के साथ कार्य पूरा करने के निर्देश दिए।देहरादून के जाखन निवासी विवेक मदान ने, राजपुर रोड पर विद्युत लाइन अंडरग्राउंड किए जाने के कारण फुटपाथ को हुए नुकसान की शिकायत सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज कराई थी। मदान ने शिकायत में उल्लेख किया था कि जाखन में पहले सड़क किनारे फुटपाथ बनाया गया, बाद में यूपीसीएल ने इस फुटपाथ को खोदकर, अंडरग्राउंड लाइन बिछा डाली। लेकिन इस दौरान मिट्टी का भरान ठीक से नहीं किया गया, जिस कारण फुटपाथ की टाइल्स बैठ गई हैं। इससे फुटपाथ का पूरा लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है। शुक्रवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को सीएम हेल्पलाइन की समीक्षा करनी थी, लेकिन सीएम ने समीक्षा बैठक से पहले शिकायत की पड़ताल करने सीधे जाखन का रुख किया।मुख्यमंत्री ने शिकायतकर्ता विवेक मदान को साथ लेकर अपने मोबाइल से ही अधिकारियों को वीडियो कॉल के जरिए फुटपाथ की स्थिति दिखाई। मुख्यमंत्री ने स्थिति पर नाराजगी जताते हुए कहा कि विभाग समन्वय के साथ कार्य करें। उन्होंने कहा कि अंडरग्राउंड होने के बावजूद कई जगह बिजली लाइन ऊपर दिखाई दे रही है। जिस कारण जन सामान्य को खतरा पैदा हो सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिकारी प्लानिंग के साथ काम करें, वरना बार बार कार्य होने से एक और पब्लिक को परेशानी का सामना करता है, वहीं धन की भी बर्बादी होती है।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि वे प्रदेश भर के आगामी दौरों पर इसी तरह नियमित निरीक्षण करेंगे। उन्होंने मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन को निर्देश दिए कि प्रदेश में यदि कहीं और भी इस तरह की शिकायत आ रही है तो उन्हें दूर किया जाए, इसके लिए प्रदेश भर में अभियान चलाया जाए। मुख्यमंत्री इस दौरान स्थानीय दुकानदारों और निवासियों से भी बातचीत की।
April 17, 2026आपदा में भी अवसर तलाश लेने में माहिर मानी जाने वाली भाजपा और उसके नेताओं ने शायद इस बात पर कभी कल्पना भी नहीं की होगी कि उनकी यह रणनीति संसद में उन्हें ऐसे गंभीर संकट में भी ला सकती है कि वह अपनी पहली चाल में ही हार जाए। नये अभिनंदन बिल (महिला आरक्षण) की आड़ में सरकार जिस तरह से परिसीमन बिल को भी ससद से पास कराने की फिराक में थी। उसका भंडा या उसके पीछे सरकार की क्या मंशा थी चर्चा शुरू होने से पहले ही फूट गया। महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण बिल के साथ जिन दो अन्य बिलों को भी कल संसद में पेश किया गया उसे पर चर्चा के लिए कराए गए मत विभाजन से सरकार के पक्ष में 251 मत पड़े जबकि विपक्ष ने एकता दिखाई और उसके पक्ष में 185 मत पड़े। जिसमें सरकार दो तिहाई के आंकड़े से पांच मत पीछे रह गई। अब चर्चा के बाद इन बिलों पर कल अंतिम फैसला मतदान से होना है। लेकिन इस शुरुआती झटके से भाजपा की सरकार और नेता इतने असहज हो चुके हैं कि उन्हें अपनी हार का सुनिश्चित अंदाजा लग चुका है। संसद में आज प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्ष को यह कहकर धमकाया कि अगर उन्होंने इस बिल पर यानी नारी वंदन बिल पर विरोध का रोडा अटकाया तो उन्हें तैयार रहना चाहिए देश की आधी आबादी यानी की महिलाएं 20 29 के चुनाव में उनका क्या हाल करेगी? हास्यापद बात यह है कि कांग्रेस सहित कोई विपक्षी दल इस इस नारी अभिनंदन बिल का विरोध नहीं कर रहा है ना ही इससे पहले कांग्रेस ने इसका विरोध किया है। राहुल गांधी ने इस बिल के पेश होने से पहले ही एक वीडियो जारी कर यह साफ कर दिया था कि इस बिल के साथ परिसीमन बिल को क्यों जोड़ा जा रहा है उनका कहना है कि सरकार परिसीमन बिल का आधार 2011 की जनगणना को क्यों बना रही है जबकि 2026 में जातिगत जनगणना कराई जा रही है उनका आरोप है कि वह महिलाओं तथा एससी एसटी की महिलाओं के साथ धोखा करना चाहती है जो हम नहीं होने देंगे। विपक्ष का कहना है कि सरकार 2026 की जनगणना के आधार पर महिलाओं को आरक्षण दे। 2011 की जनगणना में यह स्थिति स्पष्ट नहीं है कि किस राज्य में किस वर्ग की कितनी महिलाएं हैं देश में जब जातिगत जनगणना हो रही है तो फिर आरक्षण उसी हिसाब से हो। सरकार द्वारा परिसीमन बिल लाकर लोकसभा की सीटों को 543 से 850 किए जाने की कोशिश है तो फिर यह काम नए परिसीमन के अनुसार ही किया जाना चाहिए राहुल गांधी का कहना है कि महिला आरक्षण के भीतर भी आरक्षण की व्यवस्था कर सरकार महिलाओं का हक मारने की कोशिश कर रही है। आपदा में अवसर की जहां तक बात है उसके मद्देनजर खास बात यह है कि जहां एक तरफ लोग ईरान इजरायल के कारण समस्याओं से जूझ रहे हैं वहीं दूसरी ओर दो बड़े राज्यों में चुनाव की प्रक्रिया भी अंतिम दौर में होने के कारण सभी दलों के नेता व्यस्त हैं। सरकार की मनशक्ति थी कि नारी अभिनंदन बिल की आड़ में सरकार परिसीमन बिल को भी आसानी से पास करा लेगी तथा 2029 में भी अपनी जीत का भी पुख्ता तौर पर इंतजाम कर सकेगी लेकिन उचित समय तलाशने के बावजूद भी विपक्ष को सरकार की मंशा और नीयत का पता चल गया। सरकार के पास भले ही इस समय 392 सांसदों का समर्थन है लेकिन दो तिहाई बहुमत के लिए उसे 60 विपक्षी सांसदों का समर्थन भी चाहिए जो वर्तमान हालात में मुश्किल ही नहीं नामुमकिन दिख रहा है।
April 17, 2026टिहरी। आईजी एलओ सुनील कुमार मीणा व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्रीमती श्वेता चौबे ने चारधाम यात्रा मार्ग का स्थलीय निरीक्षण किया।आज यहां चारधाम यात्रा—2026 को सुरक्षित, सुचारु एवं व्यवस्थित रूप से सम्पन्न कराने के उद्देश्य से पुलिस महानिरीक्षक (लॉ एंड ऑर्डर) सुनील कुमार मीणा द्वारा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक टिहरी गढ़वाल श्रीमती श्वेता चौबे के साथ चारधाम यात्रा मार्ग का स्थलीय निरीक्षण किया गया। इस दौरान यात्रा से संबंधित सभी महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं एवं सुरक्षा प्रबंधों का गहनता से जायजा लिया गया। निरीक्षण के दौरान आईजी द्वारा प्रमुख पड़ावों, पुलिस चौकियों, पंजीकरण केन्द्रों एवं संवेदनशील स्थलों का निरीक्षण करते हुए सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए। उन्होंने विशेष रूप से भीड़ प्रबंधन, यातायात नियंत्रण एवं यात्रियों की सुविधा को सर्वाेच्च प्राथमिकता देने पर जोर दिया। बद्रीनाथ रूट पर निरीक्षण के दौरान भीड़ नियंत्रण, सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था तथा निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई। आईजी ने निर्देशित किया कि सभी व्यवस्थाएं समय से पूर्ण करते हुए यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न होने दी जाए तथा सुरक्षा व्यवस्था चाक—चौबंद रखी जाए। मुनि की रेती क्षेत्र के भ्रमण के दौरान पुलिसिंग व्यवस्था की समीक्षा करते हुए उन्होंने तैनात पुलिस कार्मिकों को उच्च मानकों के अनुरूप कार्य करने, यात्रियों के साथ सौम्य एवं सहयोगात्मक व्यवहार रखने तथा आपदा प्रबंधन के प्रति पूर्ण रूप से तैयार रहने के निर्देश दिए। इसके अतिरिक्त जनप्रतिनिधियों एवं व्यापार मंडल के पदाधिकारियों के साथ बैठक कर यातायात, पार्किंग एवं अन्य व्यवस्थाओं पर समन्वय स्थापित करते हुए व्यावहारिक एवं प्रभावी समाधान सुनिश्चित करने हेतु निर्देशित किया गया।घ् आईजी ने कहा कि चारधाम यात्रा प्रदेश की आस्था एवं प्रतिष्ठा से जुड़ी है, अतः सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए यात्रियों को सुरक्षित एवं सुगम यात्रा अनुभव प्रदान करें।
April 17, 2026प्रदेश में 2027 में होने हैं विधानसभा के चुनाव भाजपा-कांग्रेस में कुनबा बढ़ाने की जंग है जारी दलों में इस राजनीति से कई बार उपजा असंतोष देहरादून। चुनावी साल में राजनैतिक दल अपनी रणनीति के साथ अपने ‘कुनबे’ को बढ़ाने में लग गए है। प्रमुख दल भाजपा और कांग्रेस में ‘कुनबा’ बढ़ाने को लेकर कई बार अंतरकलह का भी सामना करना पड़ता है। अकेले प्रदेश में विगत दिनों कांग्रेस में उपजे असंतोष भी कुनबा बढ़ाने की लड़ाई का ही परिणाम था। यही नहीं भाजपा में भी इसको लेकर ‘द्वंद’ सामने आया था। इसके बाद भी प्रमुख दलों की रणनीति दूसरे दलों के लोगों को अपने दल में शामिल करने की जारी है।बता दें कि प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं और चुनाव की घोषणा से पहले भाजपा और कांग्रेस सहित अन्य दल अपनी पार्टी को बड़ा करने की दिशा में कार्य कर रहे है। मतदाताओं को अपने पक्ष में माहौल है को प्रदर्शित करने के लिए दल इस रणनीति पर कार्य कर रहे हैं। हालांकि इससे दलों में बिखराव और अंतरकलह के साथ कई अन्य परेशानियों से जूझना पड़ता है। इसके बाद भी सभी दल चुनाव से पूर्व अपने पक्ष में माहौल बनाना चाहते हैं। दलों की यह राजनीति चुनाव के समय उनके काम आयेगी या नहीं यह तो चुनाव के समय ही पता चलेगा, लेकिन दल अभी से इसी बहाने माहौल तैयार कर रहे हैं।अकेले भाजपा की बात करें तो भाजपा में सब ठीक है यह तो संभव नहीं है, लेकिन भाजपा अपने कुनबे को बढ़ाने में लगी है। वर्तमान में प्रदेश में भाजपा की सरकार है और भाजपा से जुड़ने वालों की लाइन लंबी है। खासकर सूबे में प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस के कार्यकर्ता भाजपा से जुड़ना चाहते है। यह हमारा नहीं भाजपा का है। भाजपा प्रदेश कार्यालय में प्रतिदिन ज्वांनिंग कार्यक्रम और भाजपा की विज्ञप्ति इस बात की पुष्टि करती है। भाजपा से जुडे़ने वालों को सरकार से उम्मीद है कि उनका भाजपा में आने से भला होगा। वही विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा कुनबे को बड़ा करना चाहती है ताकी विधानसभा चुनाव के समय जमीन पर भाजपा के पक्ष में मतदान के लिए मतदाताओं को रिझा सके।दूसरी ओर कांग्रेस सत्ता में वापसी के लिए सभी जुगत लगा रही है। कांग्रेस के रणनीतिकार जहां भाजपा के बडे़ नेताओं को दल में शामिल करवा रही है। वहीं सत्ता में वापसी की ‘चाहत’ में शायद ‘लालच’ देकर भाजपा के बडे़ नेताओं को दल में जगह दे रही है। इस बात की पुष्टि विगत दिनों कांग्रेस के बडे़ नेताओं में उपजे असंतोष ने कर दी है। कांग्रेस के एक बडे़े नेता अपने चहेते को दल में शामिल करवाना चाहते थे, लेकिन हाईकमान से इसकी छूट नहीं मिली तो वह तिलमिला गए और राजनैतिक अवकाश पर चले गए। कांग्रेस में यह घटनाक्रम कोई नया नहीं है। इससे पहले के भी कई उदाहरण हैं जब कांग्रेस में आपसी फूट पड़ी है।वही प्रदेश के एकमात्र क्षेत्रिय दल यूकेडी की सक्रियता और गांव-गांव सदस्यता अभियान से भाजपा और कांग्रेस में खलबली मची हुई है। क्योंकि इस बार यूकेडी का नेतृत्व युवा कर रहे हैं और सभी को हालिया राजनैतिक घटनाक्रम जो पड़ोसी देश नेपाल में घटा उससे भाजपा और कांग्रेस का असहज होना लाजमी है। इसके साथ ही विधानसभा चुनाव को देखते हुए अन्य दल भी खुद की उपस्थिति दर्ज करवाने में लगे है। अब विधानसभा चुनाव में यह दिलचस्प होगा कि जनता किसके सिर ताज पहनाती है। पूर्व सैनिकों ने ज्वाइन की भाजपासीमांत क्षेत्र से संख्या में आए पूर्व सैनिकों ने भाजपा सदस्यता ग्रहण की है। भाजपा मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में प्रदेश महामंत्री तरुण बंसल और दीप्ति रावत ने धारचूला विधानसभा से आए सभी पूर्व सैनिकों को पटका पहनाकर पार्टी में स्वागत किया। भाजपा में शामिल होने वाले धारचूला से आए पूर्व सैनिकों में कैप्टन भूपाल सिंह रावल, अध्यक्ष गौरव सेनानी संगठन, सूबे मेजर, दीवान सिरवाल, सूवेदार पुष्कर वम, सूबेदार धन सिंह, नायब सूबेदार नारायण सिंह आदि शामिल थे।
April 16, 2026हरिद्वार। बहादराबाद—दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर हुए दर्दनाक सड़क हादसे में एक युवा डॉक्टर की मौत हो गई, जबकि साथ मौजूद महिला डॉक्टर सदमे में हैं। घटना से स्वास्थ्य विभाग में शोक की लहर दौड़ गई है।जानकारी के अनुसार बिहार निवासी डॉ. ऋतुराज (25) बहादराबाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में इंटर्नशिप कर रहे थे। बताया जा रहा है कि आज सुबह वह स्कूटी से सीएचसी जा रहे थे, उनके साथ महिला डॉक्टर डॉ. दिव्या भी मौजूद थीं। इसी दौरान तेज रफ्तार से आ रहे दिल्ली नंबर के एक वाहन ने उनकी स्कूटी को जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में डॉ. ऋतुराज की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि डॉ. दिव्या घटना के बाद गहरे सदमे में हैं। सीएचसी बहादराबाद की प्रभारी डॉ. आरती सिंह ने बताया कि डॉ. ऋतुराज मदरहुड यूनिवर्सिटी, रुड़की से बीएमएएस की पढ़ाई कर रहे थे और छह माह की ट्रेनिंग के तहत उनकी तैनाती बहादराबाद सीएचसी में हुई थी। वहीं, थाना बहादराबाद प्रभारी अमरजीत सिंह ने बताया कि हादसे के बाद वाहन चालक मौके से फरार हो गया। पुलिस उसकी तलाश में जुटी है। मृतक के शव को पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया गया है। घटना के बाद अस्पताल स्टाफ और स्थानीय लोगों में गहरा दुख और आक्रोश देखने को मिल रहा है।
April 16, 2026इन दिनों भारत का एक पड़ोसी देश नेपाल चर्चाओं के केंद्र में है। क्षेत्रफल और आबादी के लिहाज से अत्यंत छोटे से इस देश में यूं तो अभी भी लोकतंत्र है लेकिन जिस युवा नेता के नेतृत्व में नई निर्वाचित सरकार बनाई गई है उसने सत्ता संभालते ही मात्र 48 घंटे में जो परिवर्तनकारी फैसले लिए हैं उन्होंने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है नेपाल के नव निर्वाचित सबसे कम उम्र के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह जिन्हें लोग प्यार से बालेन शाह कहते हैं उनके ही नेतृत्व में जेन—जे ने पूर्व पीएम केपी कोली की सरकार को न सिर्फ उखाड़ कर फेंक दिया अपितु नेपाल के युवाओं ने नेपाल के भविष्य की बागडोर उन्हे सौंप कर यह मौका दिया है कि वह कुछ अलग करके दिखाएं। नेपाल के आंदोलन का मुख्य कारण रहे भ्रष्टाचार और दलितों के पिछड़ेपन पर बालेन्द्र सरकार ने दलितों से राष्ट्रीय माफी मांगी है तथा उसे पूरी तरह बदलने तथा भ्रष्टाचार के खात्मे के लिए 100 सूत्रीय एजेंडे पर अपनी मोहर लगाई है। बालेेन्द्र सरकार ने फैसला किया है कि किसी भी वीआईपी के लिए सड़क पर ट्रैफिक को नहीं रोका जाएगा। सभी मंत्री संत्री और अधिकारी सामान्य लोगों की तरह ही चलेंगे बिना हूटर— शूटर के। बालेन्द्र शाह की सरकार ने सभी नेताओं और अधिकारियों तथा सरकारी कर्मचारियों के अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ना अनिवार्य कर दिया है साफ है कि सरकारी नौकरी करनी है या नेतागिरी करनी है तो बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाओ वरना नौकरी छोड़ो व राजनीति छोड़ो। उनका यह फैसला शिक्षा के लिए युगांतरकारी माना जा रहा है। सरकार ने कॉलेज की राजनीति पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है किसी भी राजनीतिक पार्टी का समर्थन किसी भी छात्र यूनियन को नहीं होगा ठीक वैसे ही कोई सरकारी नौकर किसी भी यूनियन का हिस्सा नहीं बनेगा। नेपाल की नई सरकार द्वारा सभी कोचिंग सेंटरों को बंद करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं भ्रष्टाचार पर बड़ा प्रहार करते हुए 1990 से सभी संदिग्ध खातों की जांच एक माह में करने और विदेश में जमा काले धन को वापस लाने का फैसला लिया गया है। नेपाल के विदेश मंत्री ने राजदूतों को एक—एक कर मिलने की प्रथा को समाप्त करते हुए 17 देश के राजदूतों के साथ एक साथ मुलाकात की जो इस बात का संकेत है कि नेपाल की नई सरकार एक बड़े बदलाव की ओर बढ़ चुकी है। पूर्व पीएम केपीएस कोली और गृहमंत्री के भ्रष्टाचार का पूरा हिसाब किताब करने की दृढ़ इच्छा शक्ति के साथ नई सरकार ने काम शुरू कर दिया है। निजी स्कूलों को बंद करने और छात्र राजनीति पर बैन तथा नौकरशाही को राजनीति मुक्त बनाने के फैसले बड़े फैसले हैं पांचवी तक छात्रों की कोई परीक्षा न करने का फैसला व सरकारी स्कूलों की दिशा व दशा सुधारने का फैसला नेपाल की तस्वीर बदल सकता है। सामाजिक न्याय भी बालेन्द्र सरकार की प्राथमिकता है नेपाल की कुल आबादी के 13 फीसदी दलित व पिछड़े हैं जिसमें 48 फीसदी अत्यंत की गरीब है नई सरकार का मानना है कि समाज में उन्हें बराबरी की हिस्सेदारी मिलनी चाहिए। भले ही अभी नेपाल की नई सरकार के बड़े फैसले को लेकर आम तौर पर लोग यही कह रहे हैं कि नया मुल्ला अल्लाह ही अल्लाह आने वाले समय में बालेन्द्र और उनकी सरकार भी इसी व्यवस्था में घुल मिल जाएगी लेकिन अगर वह कुछ बड़ा कर पाए जैसा कि उनके फैसले में दिख रहा है तो इसका असर अन्य तमाम देशों में देखा जाना तय है। क्योंकि सत्ता की क्रूरता से तमाम देश परेशान है जिन्हें बालेन्द्र जैसे प्रधानमंत्री की जरूरत है।