June 24, 2026देश के पढ़े लिखे युवा बेरोजगार सड़कों पर है। पेपर लीक और सरकार की कार्य प्रणाली तथा सिस्टम की नाकामियों को अपनी बर्बादी का जिम्मेदार मानने वाले यह युवा भले ही अत्यंत आक्रोशित हैं लेकिन वह शांतिपूर्ण और संवैधानिक दायरे में रहकर ही अपनी समस्याओं के समाधान की मांग कर रहे हैं। एक तरफ कॉकरोच जनता पार्टी के संयोजक अभिजीत दिपके अपने ऊपर हुई थप्पड़ों की बरसात के बीच केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के लिए 5 दिन के अल्टीमेट की समय सीमा निकल जाने के बाद भी धैर्य और संयम के साथ पांचवें दिन भी अपने विरोध प्रदर्शन को जारी रखे हुए हैं तथा पुलिस प्रशासन से भी सहयोग की अपेक्षा कर रहे हैं साथ ही वह अनिश्चितकाल तक मैदान में डटे रहने की घोषणा भी कर चुके हैं। जो अब सत्ता में बैठे लोगों को नाकाबिले बर्दाश्त हो चुका है। उन पर पुलिस प्रशासन सत्ता के इशारे पर जंतर मंतर से हटाने के लिए दबाव बना रहा है लेकिन वह भी आर पार की लकीर खींच चुके हैं। शासन प्रशासन के लिए चुनौती बना यह युवा आक्रोश अब सत्ता के लिए चुनौती बन चुका है। मगर उसे यह भी डर है कि अगर इन युवाओं के खिलाफ बल प्रयोग हुआ तो उसके परिणाम श्रीलंका और नेपाल जैसे जेन जे आंदोलन का रूप लेने में समय नहीं लगेगा। दिपके तो अब सभी युवाओं और उनके अभिभावकों को सहयोग के लिए आगे आने की अपील कर ही रहे हैं साथ ही वह किसानों और नेता विपक्ष राहुल गांधी से भी युवाओं के समर्थन में आगे आने की अपील कर रहे हैं। युवाओं के इस आंदोलन को अराजक बनाने की कोशिशे भी पर्दे के पीछे से चल रही है और सरकार तथा प्रशासन मौके की तलाश में बैठा है कि वह इस आंदोलन का अंत कराये। युवाओं के इस आक्रोश के साथ किसी भी तरह का खेला हुआ तो वह आग से खेलना ही होगा। इन युवाओं का दर्द व पीड़ा को अगर ठीक से समझा जाए तो अब पेपर लीक के कारण दर्जन भर से अधिक युवाओं की आत्महत्याओं और मानसिक तनाव से समझा जा सकता है जो वह सालों से पेपर लीक के कारण झेल रहे हैं। राहुल गांधी ने अभी कोटा में छात्रों के साथ जो संवाद का कार्यक्रम आयोजित किया गया था उसमें उमड़ी युवाओं की भीड़ और राहुल गांधी का इस समस्या की जड़ के बारे में बेबाकी से रखी गई अपनी बात से छात्रों को लगा था कि सिर्फ राहुल गांधी ही उनकी समस्या का समाधान कर सकते हैं। युवा वह चाहे राहुल गांधी के साथ खड़े दिख रहे हो या जंतर मंतर पर अभिजीत दिपके के साथ। इन सभी की समस्याएं अलग—अलग नहीं है। सत्ता में बैठे लोगों के लिए यह युवा आक्रोश इसलिए बेकली का कारण बना हुआ है कि यही युवा अब तक सरकार की सबसे बड़ी ताकत बनकर उसके साथ रहा है उनकी नाराजगी का मतलब भी साफ है अगर सरकार के हाथ से यह युवा वोटर छिटक जाता है तो भाजपा का पत्ता साफ समझो। यही कारण है कि सत्ता इनके साथ वैसा करने में हिचक रही है जैसा वह किसान आंदोलनकारी व अन्य आंदोलनकारियों के साथ करती आई है। हालात कब करवट बदल लेते हैं इसका कुछ भी अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है। हो सकता है भाजपा में अब इस्तीफे नहीं होते हैं कहने वाली पार्टी धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा कराकर कॉकरोचों को कभी भी घर भेज सकती है। क्योंकि उनकी मांग सिर्फ धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक ही सीमित है। या फिर पुलिस फोर्स का प्रयोग कर उनके मनोबल को भी चकनाचूर कर सकती है। लेकिन इस खेल में अब सरकार की स्थिति आगे कुआं पीछे खाई वाली ही है। इसका बड़ा नुकसान हर हाल में सरकार को ही होना तय है। क्योंकि उसके पास इसका कोई उचित समाधान ही नहीं है।
June 24, 2026हरिद्वार। श्यामपुर फ्लाईओवर पर बीती देर रात हुए एक भीषण सड़क हादसे में एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई। मृतकों में एक पांच वर्षीय मासूम भी शामिल है। हादसे के बाद क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।जानकारी के अनुसार 55 वर्षीय वीर सिंह अपनी पत्नी मंजू और पांच वर्षीय नाती शिवा के साथ बाइक से हरिद्वार से श्यामपुर की ओर जा रहे थे। इसी दौरान श्यामपुर फ्लाईओवर पर अंधेरे में खड़ी ईंटों से लदी ट्रैक्टर—ट्रॉली से उनकी बाइक जा टकराई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि तीनों गंभीर रूप से घायल हो गए। सूचना मिलते ही श्यामपुर पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया। जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद वीर सिंह, मंजू और मासूम शिवा को मृत घोषित कर दिया।प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि फ्लाईओवर पर ट्रैक्टर—ट्रॉली खड़ी थी, जिससे अंधेरे के कारण बाइक सवार उसे समय रहते देख नहीं पाए। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और हादसे के कारणों की पड़ताल की जा रही है।
June 24, 2026भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने पूछा- यूकेडी मैदान में उतरेगी या किसी बड़े दल की गोद में बैठेगी भाजपा को यूकेडी का डर या चुनावी बेचौनी, महेंद्र भट्ट की पोस्ट ने बढ़ाई सियासी हलचल विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की सोशल मीडिया पोस्ट पर उठे सवाल देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव की आहट तेज होते ही प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी का दौर भी शुरू हो गया है। इस बीच भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट की एक सोशल मीडिया पोस्ट ने सियासी गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। अपनी पोस्ट में उन्होंने सीधे उत्तराखंड क्रांति दल पर निशाना साधते हुए लिखा कि अब देखना यह है कि यूकेडी कितनी विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ती है या फिर किसी बड़े दल की गोद में बैठ जाती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यूकेडी का इतिहास सत्ता के साथ जाने का रहा है।यही पोस्ट अब राजनीतिक बहस का विषय बन गई है। सवाल यह उठ रहा है कि जिस यूकेडी का विधानसभा में वर्तमान में कोई प्रभावी प्रतिनिधित्व नहीं है, उस पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष को सार्वजनिक टिप्पणी करने की आवश्यकता क्यों पड़ी? राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जब कोई बड़ा दल किसी छोटे दल पर लगातार टिप्पणी करने लगे तो इसका अर्थ यह भी हो सकता है कि वह उसके संभावित चुनावी प्रभाव को लेकर सतर्क है।यूकेडी भले ही पिछले दो दशकों में चुनावी तौर पर कमजोर हुई हो, लेकिन उत्तराखंड राज्य आंदोलन की विरासत आज भी उसके साथ जुड़ी हुई है। पहाड़ के कई क्षेत्रों में पार्टी का भावनात्मक आधार अभी भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। ऐसे में यदि विधानसभा चुनाव में यूकेडी अधिक सीटों पर उतरती है तो वह कई सीटों पर वोटों का समीकरण प्रभावित कर सकती है। महेंद्र भट्ट की पोस्ट को विपक्ष और राजनीतिक जानकार भाजपा की चुनावी रणनीति से जोड़कर देख रहे हैं। उनका कहना है कि भाजपा यह संदेश देना चाहती है कि यूकेडी स्वतंत्र राजनीतिक ताकत नहीं रही, जबकि दूसरी ओर इस तरह की टिप्पणी यह भी संकेत देती है कि भाजपा किसी भी संभावित वोट कटवा समीकरण को हल्के में लेने के मूड में नहीं है।राजनीतिक जानकारों का कहना है कि उत्तराखंड की राजनीति में यूकेडी का वोट प्रतिशत भले सीमित रहा हो, लेकिन त्रिकोणीय मुकाबलों में उसका प्रभाव कई सीटों पर निर्णायक बन सकता है। यही कारण है कि चुनाव से पहले क्षेत्रीय दलों की गतिविधियों पर राष्ट्रीय दलों की पैनी नजर रहती है। हालांकि भाजपा की ओर से इसे सामान्य राजनीतिक टिप्पणी बताया जा सकता है, लेकिन समय और संदर्भ को देखते हुए यह पोस्ट कई सवाल छोड़ गई है। यदि यूकेडी वास्तव में भाजपा के लिए अप्रासंगिक है तो फिर उसके भविष्य को लेकर प्रदेश अध्यक्ष को सार्वजनिक टिप्पणी करने की जरूरत क्यों महसूस हुई?अब निगाहें यूकेडी की रणनीति पर होंगी। क्या पार्टी पूरे दमखम के साथ चुनावी मैदान में उतरेगी या फिर किसी गठबंधन का रास्ता चुनेगी? इसका जवाब आने वाले महीनों में मिलेगा। लेकिन इतना तय है कि महेंद्र भट्ट की इस एक पोस्ट ने विधानसभा चुनाव से पहले उत्तराखंड की राजनीति में नई बहस जरूर छेड़ दी है।
June 24, 2026नैनीताल। जूते के शोरूम में देर रात आग लगने से क्षेत्र में अफरा—तफरी फैल गयी। सूचना मिलने पर पुलिस व दमकल कर्मियों ने मौके पर पहुंच कर आग पर काबू पाया। आग लगने की इस घटना में लाखों के नुकसान ही आशंका जताई जा रही है।आग लगने की यह घटना शहर के व्यस्ततम बाजार मीरा मार्ग स्थित “माशा शूज” शोरूम में देर रात अचानक हुई। जिससे दुकान में रखा लाखों रुपये का सामान जलकर राख हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार रात करीब 10 बजे दुकान बंद होने के बाद आसपास के लोगों ने शटर के भीतर से घना धुआं निकलता देखा। देखते ही देखते बाजार में हड़कंप मच गया और घटना की सूचना तत्काल फायर सर्विस को दी गई। सूचना मिलते ही दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। फायर कर्मियों की तत्परता के चलते आग को आसपास की दुकानों और प्रतिष्ठानों तक फैलने से रोक लिया गया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।बताया जा रहा है कि यह दुकान सुमेर सिद्दीकी पुत्र मतीन सिद्दीकी की है। आग की चपेट में आने से दुकान का अधिकांश सामान पूरी तरह नष्ट हो गया। नुकसान का आकलन किया जा रहा है, जबकि प्रारंभिक जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है। घटना की गंभीरता को देखते हुए देर रात एसडीएम मोनिका भी मौके पर पहुंचीं और स्थिति का जायजा लिया। राहत की बात यह रही कि इस अग्निकांड में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।
June 23, 2026फुटपाथ बिके, यात्री सड़कों पर पैदल चलने को हैं मजबूर नगर निगम के दावे खोखले, पुलिस की चौकसी पर सवाल सवाल यह नहीं कब्जा है, सवाल यह है कि हटाता कौन नहीं देहरादून। राजधानी देहरादून में यदि किसी को यह जानना हो कि प्रशासनिक व्यवस्था कितनी सक्रिय है, तो उसे किसी सरकारी रिपोर्ट की जरूरत नहीं। बस शहर के किसी भी प्रमुख फुटपाथ पर पांच मिनट खड़े हो जाइए। तस्वीर खुद बता देगी कि फुटपाथ अब पैदल यात्रियों के नहीं, बल्कि कब्जेदारों के हो चुके हैं। आम आदमी सड़क पर है और व्यवस्था फाइलों में। नगर निगम हर महीने अतिक्रमण हटाने के अभियान की तस्वीरें जारी करता है। पुलिस ट्रैफिक व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त बताती है। सरकार स्मार्ट सिटी और सुशासन के दावे करती है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि राजधानी के अधिकांश फुटपाथों पर खुलेआम दुकानें सजी हैं और पैदल चलने वाला व्यक्ति अपनी जान हथेली पर रखकर सड़क पर चलने को मजबूर है।देहरादून के घंटाघर से पल्टन बाजार, लालपुल से प्रिंस चौक, सहारनपुर रोड से राजपुर रोड और आईएसबीटी से बल्लूपुर सहित शहर की सभी सड़कों और फुटपाथों पर रोज दुकानें सजती हैं। यह कोई रातों-रात होने वाला कब्जा नहीं है। यह रोज होता है, सबकी आंखों के सामने होता है और फिर भी चलता रहता है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल नगर निगम से है। आखिर जिन फुटपाथों की जिम्मेदारी उसके पास है, वे वर्षों से कब्जे में कैसे हैं? पुलिस से भी सवाल है कि जब ट्रैफिक पुलिस हर चौराहे पर मौजूद रहती है, तो सड़क पर उतरने को मजबूर पैदल यात्री उसे क्यों दिखाई नहीं देते? और सरकार से भी सवाल है कि क्या स्मार्ट सिटी का मतलब केवल सुंदर टाइलें बिछाना है, या उन पर आम नागरिक का अधिकार भी सुनिश्चित करना है?राजधानी में अतिक्रमण हटाने के अभियान अब लोगों के बीच मजाक का विषय बनने लगे हैं। सुबह जेसीबी चलती है, दोपहर तक फोटो और प्रेस विज्ञप्ति जारी होती है और कुछ दिन बाद वहीं फिर वही दुकानें लग जाती हैं। यदि यही कार्रवाई है, तो फिर यह मानने में क्या संकोच कि समस्या कब्जेदारों से ज्यादा व्यवस्था की इच्छाशक्ति की है?राजधानी के लालपुल में सिटी बस की चपेट में आए लोगों की घटना ने पूरे शहर को झकझोर दिया। दुर्घटना के कारणों की जांच अपने स्थान पर है, लेकिन यह भी उतना ही बड़ा सच है कि जब फुटपाथ कब्जे में होंगे तो पैदल यात्री सड़क पर ही चलेंगे। और जब सड़क पर पैदल यात्री होंगे, तो हादसों का खतरा भी बढ़ेगा। यह केवल ट्रैफिक का मुद्दा नहीं, बल्कि शहरी नियोजन और प्रशासनिक जवाबदेही का भी सवाल है। शहर में वर्षों से एक सवाल गूंज रहा हैकृयदि रोज लगने वाले कब्जे अवैध हैं तो वह रोज लगते कैसे हैं? यदि वैध हैं तो फुटपाथों पर पैदल यात्रियों का अधिकार कहां गया? और यदि अवैध हैं, तो फिर कार्रवाई स्थायी क्यों नहीं होती? यही वह सवाल हैं जिनका जवाब न नगर निगम देता है, न पुलिस और न ही सरकार।सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर सड़कें चौड़ी कर रही है, फुटपाथ बना रही है और शहर को आधुनिक बनाने के दावे कर रही है। लेकिन सबसे बुनियादी अधिकारकृसुरक्षित पैदल चलने का अधिकारकृआज भी नागरिकों को नहीं मिल पाया है। विडंबना यह है कि राजधानी में वाहन के लिए सड़क है, दुकान के लिए फुटपाथ है, लेकिन पैदल चलने वाले के लिए कोई जगह नहीं बची। आमजन का सवाल है कि क्या नगर निगम केवल चालान और प्रेस विज्ञप्तियों तक सीमित रहेगा? क्या पुलिस की जिम्मेदारी केवल वाहनों का चालान काटने तक है? क्या सरकार स्मार्ट सिटी की रैंकिंग से आगे बढ़कर नागरिकों की सुरक्षा पर भी ध्यान देगी? क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही फुटपाथ पैदल यात्रियों को वापस मिलेंगे? अब इन प्रश्नों का उत्तर मांगे तो मांगे किससे।यह सर्व विदित है कि फुटपाथ पर कब्जा केवल अतिक्रमण नहीं, बल्कि आम नागरिक के अधिकार पर कब्जा है। जब व्यवस्था अपनी आंखों के सामने सार्वजनिक स्थानों पर अवैध कब्जे होते देख भी मौन रहती है, तो सवाल केवल प्रशासनिक विफलता का नहीं, बल्कि शासन की प्राथमिकताओं का भी बन जाता है। राजधानी के लोग अब यह नहीं पूछ रहे कि फुटपाथ पर कब्जा किसने किया। वह यह पूछ रहे हैं कि फुटपाथ आखिर खाली कौन नहीं कराना चाहता?
June 23, 2026देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेशभर के सभी अस्पतालों, कोचिंग सेंटरों, बड़े मॉल, होटल, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों एवं अन्य सार्वजनिक उपयोग वाले भवनों का व्यापक फायर सेफ्टी ऑडिट कराया जाए। उन्होंने कहा कि जनसुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है तथा अग्नि सुरक्षा मानकों के अनुपालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन संस्थानों में अग्निशमन संबंधी व्यवस्थाएं निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं हैं, उन्हें तत्काल चिन्हित कर आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि फायर सेफ्टी उपकरणों की कार्यशीलता, आपातकालीन निकास मार्गों, विद्युत सुरक्षा व्यवस्थाओं तथा आपदा की स्थिति में त्वरित निकासी की तैयारियों का विशेष रूप से परीक्षण किया जाए।मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि अग्निशमन विभाग, जिला प्रशासन एवं संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर समयबद्ध ढंग से ऑडिट की प्रक्रिया पूरी की जाए। इस अवसर पर बद्री-केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी, हेमकुंट साहिब प्रबंधन ट्रस्ट के अध्यक्ष नरेन्द्रजीत बिन्द्रा, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर.के.सुधांशु, सचिव गृह शैलेश बगौली, पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ, सचिव विनय शंकर पाण्डेय, डीजी अभिसूचना और सुरक्षा अभिनव कुमार, आईजी श्रीमती रिद्धिम अग्रवाल, अपर सचिव बंशीधर तिवारी और अपर सचिव श्रीमती तृप्ति भट्ट मौजूद थे।