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दुपहिया वाहन चोर गिरोह का खुलासा, दो शातिर गिरफ्तार

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  • चुराये गये 13 दुपहिया वाहन बरामद

देहरादून। दुपहिया वाहन चोर गिरोह का खुलासा करते हुए पुलिस ने दो शातिरों को गिरफ्तार कर लिया है। जिनके पास से चुराये गये 7 बुलेट मोटरसाइकल सहित 13 दुपहिया वाहन बरामद हुए है। आरोपी पुलिस से बचने के लिये घटना के बाद वाहनों की नम्बर प्लेट हटाकर गली मोहल्लों के रास्ते फरार हो जाते थे।
जानकारी के अनुसार बीते दिनों आदित्य पुत्र विरेन्द्र निवासी चन्द्रबनी चोयला पटेलनगर देहरादून द्वारा अपनी बुलेट राँयल इनफिल्ड तथा दीपक सिंघल निवासी शक्ति विहार माजरा देहरादून द्वारा अपनी बुलट राँयल इनफील्ड के चोरी होने के सम्बन्ध कोतवाली पटेलनगर में मुकदमा दर्ज कराया गया था। जिस पर पुलिस ने चोरो की तलाश शुरू कर दी गयी। चोरो की तलाश में जुटी पुलिस टीमों द्वारा घटना स्थलों का निरीक्षण कर आस—पास आने जाने वाले मार्गों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेजों का अवलोकन किया गया। साथ ही पूर्व में वाहन चोरी की घटनाओं में प्रकाश में आये आरोपियों की अध्यतन स्थिती की जानकारी कर उनका भौतिक सत्यापन किया गया। पुलिस द्वारा लगातार किये जा रहे प्रयासों से बीते रोज एक सूचना के बाद चलाये गये चैकिंग अभियान के दौरान हरिद्वार बाईपास रोड कबाडी बाजार के पास नव निर्मित सडक से वाहन चोरी की घटनाओ में शामिल दो आरोपियों को चोरी की 2 बुलेट मोटर साईकिलो के साथ गिरफ्तार किया गया। जिन्होने पूछताछ में अपना नाम विवेक सिंह विश्नोई पुत्र धनवीर सिंह विश्नोई निवासी निकट लखेड़ा टैंट हाउस, श्यामपुर कांगड़ी, थाना श्यामपुर, जिला हरिद्वार व गुरप्रीत सिंह पुत्र कुलवंत सिंह निवासी ग्राम टाटवाला श्यामपुर कांगड़ी, थाना श्यामपुर, जिला हरिद्वार बताया। आरोपियों द्वारा देहरादून के अलग—अलग स्थानों से अन्य बुलेट मोटर साईकिलें व दोपहिया वाहनों को चोरी करना स्वीकार किया गया। जिनकी निशानदेही पर पुलिस द्वारा 5 अन्य राँयल इनफील्ड बुलट मोटर साईकिल सहित चोरी के कुल 13 दो पहिया वाहन बरामद किये गये। आरोपियों द्वारा चोरी के 2 अन्य दो पहिया वाहनों, जिसमें 1 राँयल इनफील्ड मोटर साईकिल के थाना श्यामपुर हरिद्वार व 1 अन्य वाहन के पानीपत हरियाणा में पुलिस द्वारा सीज किये जाने की जानकारी दी गई, जिनकी बरामदगी हेतु टीम रवाना की गई है। आरोपियों ने बताया कि उनके द्वारा योजना बनाकर अलग—अलग स्थानों पर घूमते हुए सुनसान जगहों पर खडे दो पहिया वाहनों को चिन्हित किया जाता है तथा मौका देखकर वहां चोरी की घटनाओ को अंजाम दिया जाता है। घटना के बाद पुलिस को गुमराह करने के लिये आरोपी चोरी के वाहनों से नम्बर प्लेट को हटाकर उन्हें गली—मोहल्लों के बीच से ले जाते हुए पूर्व में चिन्हित किये गये स्थान पर खडा कर देते थे तथा सही ग्राहक मिलने पर वाहनों को उन्हें बेच देते थे। अपने खर्चों की पूर्ति के लिये आरोपियों द्वारा वाहनों की नम्बर प्लेट हटाकर उन्हें अपनी पहचान के लेागों को किराये पर भी दिया जाता था। आरोपियों की योजना चोरी के उक्त सभी वाहनों को बाहर ले जाकर बेचने की थी , जिसके लिये वे ग्राहकों की तलाश कर रहे थे।

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