
- दिल्ली में जो हुआ वह दून में क्यों नहीं हो सकता
देहरादून। भले ही देहरादून अब उत्तराखंड की राजधानी के तौर पर जाना जाता हो या फिर देश के स्मार्ट शहरों की सूची में शुमार किया जाता हो लेकिन दून के लोग आज भी उस तीन दशक पूर्व के दून को तलाशते देखे जा सकते हैं जो वास्तव में स्वच्छ दून और सुंदर दून की अपनी अलग छवि के लिए जाना जाता था। सवाल यह है कि क्या देहरादून भविष्य में कभी वैसा स्वच्छ दून और सुंदर दून बन सकेगा।
दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता ने दिल्ली मेट्रो की दीवारों और पिल्लरों पर चिपके पोस्टर बैनर देखे तो दिल्ली प्रशासन को आदेश दिया कि इनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। हरकत में आये प्रशासन ने 53 एजेंसियों व लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज कराये गए तथा 327 मेट्रो साइट से यह बैनर पोस्टर हटा दिए गए। दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता की इस कार्रवाई से दिल्ली के लोग उनकी तारीफ कर रहे हैं। रेखा गुप्ता का कहना है कि मेट्रो दिल्ली का गौरव है इसे स्वच्छ और सुंदर रखा जाना चाहिए इसके लिए तमाम विभागों के अधिकारियों को इसकी जिम्मेदारी सौंप दी गई है।
अगर हम राजधानी दून पर एक नजर डाले तो यहां के हालात दिल्ली से भी अधिक बदतर है। एक दौर था जब दून नगर पालिका हुआ करती थी लेकिन शहर में दीवारों से लेकर सड़कों व नालियों तक में कहीं गंदगी नहीं दिख सकती थी। किसी के घर की नाली में कूड़ा पड़ा दिख जाता था तो चालान काट दिया जाता था। आज पूरा शहर गंदे गंदे फूहड़ पोस्टर—बैनरों से पटा हुआ है स्मार्ट सिटी का हाल यह है कि अगर आईएसबीटी से हरिद्वार बाईपास की ओर कारगी चौक तक आए तो इतनी बदबूदार हवा मिलेगी कि किसी को भी उल्टियां हो जाए। जैसे यहां कोई लेदर का कारखाना चल रहा हो। लेकिन किसी को क्या फर्क पड़ता है देश—विदेश तक के लोग आए और देखें भारत के दून स्मार्ट सिटी की असलियत, सवाल यह है क्या जो दिल्ली में हुआ वह दून में नहीं हो सकता?




