Home संपादकीय नफरत, टकराव और तकरार

नफरत, टकराव और तकरार

0
23


बीते 12 सालों में भाजपा केंद्रीय सत्ता पर काबिज रही वही उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश सहित 20 राज्यों में उसकी सरकारें हैं जिसमें से कुछ राज्यों में तो लंबे समय से भाजपा ही सत्ता में बनी हुई है खास बात यह है कि भाजपा का शीर्ष नेतृत्व दिल्ली में बैठकर ही भाजपा शासित राज्यों का शासन भी चलाता है। मुख्यमंत्री की कुर्सी पर किसे बैठना है और कब किसे हराकर किसी दूसरे को बैठाना है से लेकर उनके मंत्रिमंडल तक सब कुछ हाई कमान से ही होता है। हाई कमान की नजरे इनायत बनी रहे इसके लिए सबसे जरूरी है पार्टी के उस हार्डकोर पर काम करना और हाई कमान के दिशा निर्देशों का अनुपालन करना। यह सभी जानते हैं कि भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व का एजेंडा क्या है हिंदुत्व सनातन और राष्ट्रवाद को अपने अनुकूल गड़कर पार्टी स्वयं को मजबूत बना सकती है। सबका साथ सबका विकास और सबका विश्वास जैसे लोक लुभावन नारों से उसका कुछ लेना—देना नहीं है। समाज में कहां क्या हो रहा है और देश के नौजवानों और आम आदमी की समस्याएं क्या है इससे भी उसका कोई सरोकार नहीं है। पेपर लीक को लेकर युवाओं का जीवन तबाह हो रहा है। वह जंतर मंतर पर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं करते रहे। किसान अपनी एमएसपी की मांग को लेकर आंदोलन करते हैं करते रहे। आत्महत्या करते हैं तो करते रहें। मणिपुर की हिंसा में बहन बेटियों के साथ कुछ भी होता रहे महंगाई से आम आदमी का जीवन तबाह हो रहा है तो होता रहे। देश में भ्रष्टाचार की गंगा बह रही है तो बहती रहे। देश में लव जिहाद लैंड जिहाद और थूक जिहाद चलते रहना चाहिए और हिंदू मुस्लिम की राजनीति होती रहनी चाहिए। दलित और ओबीसी की राजनीति भी बरकरार रहनी चाहिए। धर्म व संप्रदायों के बीच तकरार भी बनी रहनी चाहिए। सत्ता पर आसीन भाजपा के कार्यकाल में देश में राजनीति का एक नया रूप भी सामने आया है जिसे बुलडोजर वाली राजनीति के नाम से लोग अब जानते हैं। बीते एक दशक से इस राजनीति ने समाज में अलगाव नफरत का एक जहर घोल दिया है कि अलग—अलग धर्म और संप्रदाय के लोग आए दिन सड़कों पर आमने—सामने आ जाते हैं। अभी बीते दिनों उत्तराखंड में कई ऐसी घटनाएं सामने आई जब यह जंग एक समुदाय विशेष का घेरा तोड़कर दो राज्यों के बीच विवाद तक पहुंच गई। हरिद्वार में हरियाणा के पर्यटकों के साथ एक मामूली विवाद में युवको को बुरी तरह पीटा गया और यह विवाद उसे हद तक जा पहुंचा कि हरियाणा व उत्तराखंड राज्य के बीच विवाद तक पहुंच गया। अभी हाल ही में कर्णप्रयाग में पार्किंग को लेकर पंजाब के निहंग समुदाय के लोगों के साथ हुए संघर्ष में तलवारे खिंच गई जिसमें पांच लोग घायल हो गए। तलवारबाजी के आरोपियों के खिलाफ जब पुलिस कार्रवाई की गई तो पंजाब से बड़ी संख्या में निहंगों के जत्थोंं ने उत्तराखंड की ओर कूच कर दिया जिन्हें रोकने में शासन प्रशासन के पसीने छूट गए। उधर एक गुरुद्वारे पर निहंगों के कब्जे की खबर भी कई दिनों तक सुर्खियों में बनी रही। आज हरिद्वार में केतन लाल हत्याकांड को लेकर पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे सांसद व भीम आर्मी के संयोजक चंद्रशेखर को हरिद्वार पुलिस द्वारा रोक दिया गया जहां भारी बखेड़ा खड़ा हो गया। पुलिस के साथ भिंड़त के बाद भी चंद्रशेखर नहीं रुके। सीएम धामी भले ही यह दावे करते रहे कि उनके शासनकाल में कानून व्यवस्था और सामाजिक व्यवस्था में भारी सुधार हुआ है लेकिन राज्य में डेमोग्राफी और देव संस्कृति को बचाने के शोर के पीछे का सच यही है कि सिर्फ नफरत और टकराव तकरार ही बढ़ा है। चुनावी दौर में अब इस हवा दिया भी जाना स्वाभाविक है और नेता अपने—अपने काम में जुट चुके हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here